<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330</id><updated>2011-10-08T13:59:46.381-07:00</updated><category term='इंडिया'/><category term='संघ का  प्रदर्शन'/><category term='संघ'/><category term='मीडिया में आतंकवाद'/><category term='तरकश'/><category term='हिन्दू समागम'/><category term='माँओवादी और चर्च'/><category term='कुरान'/><category term='घुसपैठ'/><category term='अयोध्या'/><category term='श्रीरामजन्मभूमि'/><category term='एनजीओ'/><category term='साहित्य अकादमी'/><category term='दिग्विजय सिंह'/><category term='कश्मीर'/><category term='हिन्दू आतंकवादी'/><category term='स्पंदन फीचर्स'/><category term='मध्यप्रदेश विधानसभा 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term='गोवंश'/><category term='Mughalistan'/><category term='नर्मदा कुम्भ'/><title type='text'>लालमिर्ची</title><subtitle type='html'>तीखी और लगने वाली खबरें</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><link rel='next' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default?start-index=101&amp;max-results=100'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' 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src="http://4.bp.blogspot.com/-NU1JUJD2ndM/TckjkdhHm1I/AAAAAAAAAUc/8ussxtMwVso/s320/naxal_mp_943942774.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5605050320545094482" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;मध्यप्रदेश में माओवादी आतंक के बारे में अब सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। प्रदेश की राजधानी भोपाल में न सिर्फ नक्सली पर्चे और साहित्य बरामद हुए हैं, बल्कि हथियारों का कारखाना भी पकड़ा जा चुका है। मध्यप्रदेश का एक बड़ा भू-भाग छत्तीसगढ़ की सीमा से लगा हुआ है। नक्सली पहले भी बड़े वारदातों को अंजाम देने से पहले मध्यप्रदेश को अपने पनाहगाह के रुप में इस्तेमाल करते रहे हैं। मध्यप्रदेश अब तक नक्सलियों के लिए पनाहगाह और शरणस्थली के रूप में ही इस्तेमाल हो रहा था, लेकिन इस मामले में अब नया बदलाव हुआ है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;छत्तीसगढ़ और बिहार-झारखंड के नक्सली अब मध्यप्रदेश को ‘आॅपरेशनल एरिया’ के रूप में देख रहे हैं। पिछले दिनों बालाघाट में नक्सलियों ने इसका इसका आगाज भी कर दिया है। नक्सलियों ने ‘नक्सल विरोधी अभियान’ में लगे पुलिस के जवानों पर घात लगाकर हमला कर दिया और इसमें में पुलिस का जवान शहीद भी हो गया था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अभी छत्तीसगढ़ ओर बिहार-झारखंड के हथियारबंद नक्सलियों ने सीधी-सिंगरौली क्षेत्र में अपनी आमद दे दी है। केन्द्र और राज्य की खुफिया एजेंसियों ने इस बाबत राज्य सरकार को सचेत भी कर दिया है। लेकिन मध्यप्रदेश सरकार की नक्सल विरोधी नीति या योजना के बारे में किसी को कुछ भी पता नहीं हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक में अपनी चिंता व्यक्त करते रहे हैं, लेकिन उनकी ये चिंता राज्य सरकारों को चिंतित नहीं करती। हां राज्य की सरकार को नक्सल विरोधी अभियान के लिए विशेष पैकेज की दरकार जरुर रहती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मध्यप्रदेश पुलिस ने माओवादी चुनौतियों से निपटने के लिए नये थानों का प्रस्ताव देकर अपना पल्ला झाड़ लिया है। बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, शहडोल और अनूपपुर तो पहले से ही नक्सल प्रभावित रहा है। अब नक्सलियों ने सतना-रीवा और सीधी-सिंगरौली की ओर अपना रूख किया है। पिछले दिनों सीधी-सिंगरौली क्षेत्र में भी नक्सलियों के ‘मिलिट्री दलम’ के हथियारबंद दस्ते देखे गए हैं। वहां की पुलिस पहले से ही बदइंतजामी का शिकार है। नक्सलियों की दस्तक ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है। अब वे आम जनता की सुरक्षा की बजाए अपनी सुरक्षा के लिए अधिक चिंतित हो गए हैं। पुलिस प्रशासन और नागरिक प्रशासन में विश्वास और तालमेल की कमी हैं। सरकार की विेकास योजनाएं अभी भी नक्सली विस्तार को रोक पाने में सफल नहीं हो पायी है। नक्सलियों के स्थानीय दलम से प्रशासन की संाठ-गांठ की चर्चाएं भी होने लगी है। पुलिस और खुफिया विभाग के आला अधिकारी और विशेषज्ञ इस बात की थाह ले रहे हैं कि क्या कारण है कि नक्सलियों के निशाने पर पुलिस और अद्र्धसैनिक बल ही होते हैं। नागरिक प्रशासन के लोग नक्सली खतरे की जद से बाहर कैसे हैं। खुफिया एजेंसियो ने पिछले दिनों बालाघाट के एक आला अधिकारी को संदेह के घेरे में लिया। इस अधिकारी पर नक्सलियों को लेवी देने का संदेह है। इन स्थितियों में पुलिस का मनोबल कमजोर हो रहा है। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चैहान नये मंत्रालय, नये जिले और नये तहसील बनाने की घोषणा तो कर रहे हैं, लकिन नये थानों का गठन और पुलिस आधुनिकीकरण की प्रक्रिया काग़जों में ही दौड़ लगा रही है। वाम आतंक के संदर्भ में क्या सरकार ‘‘सहिष्णुता और धैर्य की चाबी’’ का इस्तेमाल कर रही है?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राज्य सरकार इस इस बात पर तो संतोष कर सकती है कि जितने भी बड़े नक्सली हादसे हुए हैं वे सभी दूसरे राज्यों में। सरकार इस बात पर भी अपनी पीठ थपथपा सकती है कि उसकी पुलिस ने राजधानी भोपाल में माओवादियों के केन्द्रीय तकनीकी समिति के सदस्य समेत 5 हार्डकोर नक्सलियों को गिरफ्तार किया और उनके असलहा कारखाने का भंडाफोड़ किया। लेकिन सरकार अपनी ही पुलिस की चिंताओं को कबतक नजरंदाज कर सकती है। वाम आतंक के जानकारों का मानना है कि माओवादियों ने एक खास रणनीति के तहत मध्यप्रदेश में बडे हादसों को अंजाम नहीं दिया है। वे अपने ‘रेड कॉरिडोर’ के निर्माण और विस्तार में मध्यप्रदेश का उपयोग सुरक्षित क्षेत्र के रूप में करते रहे हैं। इसी दौरान माओवादियों ने मध्यप्रदेश में अपने समर्थकों की एक बड़ी फौज खड़ी कर ली। मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में एनजीओ, मानवाधिकार संगठन और बुद्धिजीवियों की जमात इस माओवादी अभियान का समर्थन करती है और उसे सहयोग देती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मध्यप्रदेश सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि केन्द्र सरकार ने जिन राज्यों को गंभीर नक्सल प्रभावित माना है उनमें मध्यप्रदेश भी है। सरकार को यह भी सुध लेनी चाहिए कि अधिक बडे नक्सली हादसे पुराने मध्यप्रदेश और वर्तमान पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में ही हुए हैं। संभव है किसी भी दिन नक्सलियों ने अपनी रणनीति बदली और किसी बड़े हादसे को अंजाम दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;नक्सलियों के सर्वोच्च नेता गणपति ने अपने बयान में भले ही पश्चिम बंगाल के ‘‘लालगढ़’’ और उड़ीसा के ‘‘नारायणपट्टन’’ को माओवादी ‘गुरिल्ला जोन’ बनाने का दावा किया हो लेकिन यह भी गौरतलब है कि माओवादियों ने मध्यप्रदेश के बड़े हिस्से को अपने आॅपरेशन एरिया के लिए चुना है। छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में भले ही माओवादियों का पूरा नियंत्रण न हो और वे केन्द्रीय अद्र्धसैनिक बलों के दबाव में हों, लेकिन यह भी सच है कि बस्तर में छत्तीसगढ़ सरकार का भी कोई नियंत्रण नहीं है। सरकार चाहे कितनी भी कोशिश कर ले वहां विकास कार्यक्रमों को संचालित नहीं कर पा रही है। मनरेगा और अन्य विकास कार्यक्रमों का लाभ आम लोगों से अधिक नक्सलियों को मिल रहा है। यह कहना शायद अतिशयोक्ति नहीं होगा कि माओवादी रणनीतिकार मध्यप्रदेश में भी एक ‘बस्तर’ चाहते है। वे इसी रणनीति के तहत कार्य कर रहे हैं। सीधी-सिंगरौली क्षेत्र में माओवादियों ने खदानों और क्रेशर के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। खदान मालिक या तो माओवादियों से लेन-देन के आधार पर तालमेल कर रहे हैं, या फिर वे भयाक्रांत हैं। कई खदान ठेकेदारों ने अपना कारोबार समेटने का मन बना लिया है। नक्सलियों के इस अभियान को इस क्षेत्र में आम जनता का खासा समर्थन भी मिल रहा है। माओवादियों ने आने वाली स्थितियों के मद्देनज़र अभी से अपनी तैयारी शुरु कर दी है। अद्र्धसैनिक बलों के दबाव के कारण छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ से नक्सलियों के पांव उखड़ने की संभावना है। इस स्थिति को भांपकर माओवादी रणनीतिकारों ने छत्तीसगढ़ से मध्यप्रदेश की ओर ‘‘रणनीतिक निकासी मार्ग’ का विकास शुरु कर दिया है ताकि अबूझमाड़ छोड़ने की आपात स्थिति में वे सुरक्षित निकासी सुनिश्चित कर सकें। इसके लिए उन्होंने पूर्व विदर्भ के वनाच्छादित इलाके भंडारा-गोदिया-बालाघाट की पहचान की है। पेंच नेशनल पार्क - नागपुर और सिवनी भी माओवादियों के ‘‘रणनीतिक निकासी मार्ग’ के लिए मुफीद है। हाल के दिनों में इन इलाकों में माओवादी हचलच तेज हुई है। मतलब साफ है संभल सको तो संभल जाओ - लाल सलाम दस्तक दे चुका है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार भले ही अपनी आंखें भींच ले, लेकिन उसके अनदेखा कर देने से मध्यप्रदेश में माओवादी समस्या खत्म नहीं हो जायेंगी। इसके पहले कि आम लोगों की सुरक्षा खतरे की जद में आ जाये और विकास कार्यक्रमों के लिए गुजाईश खत्म हो जाये सरकार को समय रहते एतिहात बरतना होगा। सुरक्षा जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की पहल करनी होगी। पुलिस बल को आधुनिक, सक्षम और सबल करना होगा। पुलिस और नागरिक प्रशासन के बीच परस्पर भरोसा, विश्वास और तालमेल का विकास जरुरी होगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उत्तर प्रदेश के कई जिले भी वाम आतंक से पीड़ित हैं। पंजाब के मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक ने भी नक्सली गतिविधियों के प्रति चिंता व्यक्त की है। स्पष्ट तौर पर माओवादी देश के उन हिस्सों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं जहां अभी तक उन्हें देखा नहीं गया था, या कम देखा गया। मध्यप्रदेश तो उनकी नजऱ में पहले से ही काफी उर्वर जमीन रही है। कांग्रेस के शासन काल में नक्सलियों को सरकार का सक्रिय समर्थन मिला। भाजपा राज में भी एक अजीब-सी चुप्पी दिखती है। जाहिर-सी बात है संकट के समय अगर कोई आपका विरोध नहीं करे तो संकटग्रस्त के लिए यही काफी होता है। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार नक्सलियों के प्रति ऐसा ही व्यवहार करती हुई दिख रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;तेलंगाना क्षेत्र में माओवादी पुनः अपना मजबूत आधार बनाने की फिराक में हैं। पृथक तेलंगाना राज्य की मांग और पोलावरम डैम विरोधी भावना को वे भुनाना चाहते हैं। मध्यप्रदेश के शहडोल और रीवा संभाग के क्षेत्रों में भी वे शासन की खदान विरोधी भावना निजी क्रेशर विरोधी भावना को अपने पक्ष में करना चाहते हैं। इस क्षेत्र में माओवादियों ने आम लोगों को वैध-अवैध क्रेशर उद्योग से मुक्ति दिलाने का वादा किया है। इसके कारण उन्हें किसानों और जनजातीय लोगों का समर्थन प्राप्त हो रहा है। प्रशासन के जनविरोधी रवैये के कारण पहले से ही माओवाद समर्थक माहौल तैयार हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;केन्द्र सरकार ने नक्सल प्रभावित राज्यों को और अधिक अद्र्धसैनिक बल उपलब्ध कराया है। लेकिन केन्द्र की यह अपेक्षा भी है कि राज्य सरकारें भी और अधिक सुरक्षा जवानों की भर्ती करें, प्रशिक्षण कार्यक्रम पर पहले की तुलना में अधिक निवेश करें, श्रेष्ठ गुणवत्ता और अधिक संख्या में आधुनिक शस्त्रों का भंडारण करें और जवानों को उपलब्ध कराएं और माओवादियों की की सख्त घेरेबंदी करें। लेकिन केन्द्र की अपेक्षाओं के बारे में मध्यप्रदेश की राज्य सरकार कितनी संजीदा है! मध्यप्रदेश सरकार अपने पड़ोसी राज्यों खासकर छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से कितना और किस प्रकार का ताल-मेल और समन्वय विकसित कर रहा है यह भी एक पहेली जैसा ही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकार के पास तात्कालिक, अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक तौर पर क्या उपाय या योजना है, इसका किसी को पता नहीं। पुलिस के उच्च अधिकारी फरमाते हैं - योजना हो तब तो किसी को पता हो। सरकार की माओवादी विरोधी नीति, योजना और रणनीति भगवान भरोसे है। राजनैतिक नेतृत्व शायद यह सोचता हो कि जब आग लगेगी तो कुंआ खोद ही लेंगे। आग बुझाने लायक पानी तो मिल ही जायेगा। लेकिन माओवादी आतंक की आग शायद ऐसी नहीं है। उसकी लपटों से प्रदेश पहले से ही झुलसता रहा है। अब तो वक्त है माओवादी विस्तार को रोकने और खत्म करने की पुख्ता रणनीति और कार्ययोजना तैयार करने की। दशकों पुरानी माओवादी समस्या से निपटने के लिए केन्द्र सरकार ने एक समेकित कार्य-योजना तैयार की है जो - सुरक्षा, विकास, प्रशासन और जन धारणा पर आधारित है। क्या ऐसी कोई सोच, कार्य-योजना या समझ राज्य सरकार की है! आखिरकार केन्द्र की तैयारी भी तो राज्य सरकार के भरोसे ही है। केन्द्र सरकार की तैयारियों का परिणाम राज्य सरकार की क्रियान्वयन दक्षता व क्षमता पर ही निर्भर करती है। यह काम राज्य सरकार की सतत निगरानी, सतर्कता और सावधानी से ही संभव है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-4851625118305869596?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/4851625118305869596/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=4851625118305869596' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/4851625118305869596'/><link rel='self' 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src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-7239593337835335048?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/7239593337835335048/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=7239593337835335048' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/7239593337835335048'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/7239593337835335048'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2011/05/blog-post.html' title=''/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-6JwxhJJzD9Q/TcUyUFE8CVI/AAAAAAAAAUU/BN34RmvUQPI/s72-c/Article%2Bin%2BDainik%2BJagaran.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-5629711489681266523</id><published>2011-04-04T21:19:00.000-07:00</published><updated>2011-04-04T21:20:59.276-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='भ्रष्टाचार'/><title type='text'>भ्रष्टाचार के खिलाफ गुरु-गोविन्द दोनों मैदान में</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-oNfKdSc2Cns/TZqYm-gT9AI/AAAAAAAAATU/2TQoAaCoorY/s1600/VIF%2BFoto.jpg"&gt;&lt;img style="display:block; margin:0px auto 10px; text-align:center;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-oNfKdSc2Cns/TZqYm-gT9AI/AAAAAAAAATU/2TQoAaCoorY/s320/VIF%2BFoto.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5591949682714866690" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;अनिल सौमित्र &lt;br /&gt;भ्रष्टाचार के खिलाफ गोविन्दाचार्य और गुरुमूर्ति फिर मैदान में हैं । बाबा रामदेव ने गुरु-गोविन्द दोनों को भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम मे अपना संरक्षण दिया है। उनके साथ हैं पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री एम.एन. वेंकटचेलैया और न्यायमूर्ति जे. एस. वर्मा, जनता पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी, आईबी के पूर्व निदेशक अजीत डोबाल, वरिष्ठ पत्रकार वेदप्रताप वैदिक और भीष्म अग्निहोत्री जैसे विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज । अन्ना हजारे, किरण बेदी, शांति भूषण, प्रशांत भूषण, राम जेठमलानी, अरविंद केजरीवाल जैसे सामाजिक, कानूनी और प्रशासनिक क्षेत्र के अनुभवी लोग पहले ही हल्ला बोल चुके हैं। लोकसभा के पूर्व महासचिव श्री सुभाष सी कश्यप, पत्रकार श्री एम.डी. नलपत, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो. अरुण कुमार एवं पूर्व राजदूत सतीशचन्द्र, पूर्व प्रशासक भूरेलाल और बी. आर. लाल एवं सी. बी. आई के पूर्व निदेशक श्री जोगिन्दर सिंह, अमेरिका के कर सलाहकार श्री डेविड स्पेंसर, रोनाल्ड लोमे, नुरिआ मोलिना ने भी भ्रष्टाचार के खिलाफ इस मुहिम में साथ देने की इच्छा जाहिर की है। &lt;br /&gt;30 जनवरी को नयी दिल्ली के रामलीला मैदान मे शायद पहली बार बिना किसी राजनैतिक पार्टी के सहयोग अथवा आह्वान के बिना भ्रष्टाचार के विरुद्ध ऎसा हल्ला बोल हुआ। इसमे जस्टिस संतोष हेगड़े, जे.एम .लिंगदोह, स्वामी अग्निवेश तथा आर्चबिशप विन्सेंट एम. कोंसेसाओ सहित  तमाम  संगठनों, विचारों और क्षेत्रों के लोग एक मंच पर आये । जन लोकपाल बिल पर सरकार और समाज आमने-सामने है. सोनिया-मनमोहन लोकपाल बिल पर मनमानी चाहते है । लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने साफ कर दिया है कि जन लोकपाल बिल वही होगा जिसका मसौदा सामाजिक क्षेत्र के लागों ने तैयार किया है । इसी को लेकर वे 5 अप्रैल को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे है. उनके समर्थन मे देशभर के लोग उपवास रखेंगे और भ्रष्टाचार के खिलाफ संकल्प लेंगे.  &lt;br /&gt;राजनीतिक विचारक और स्वदेशी चिंतक गोविन्दाचार्य ने भी देश की नब्ज समझ ली है. वर्षो की संचित ताकत को वे इस भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम मे झोंक देना चाहते है। देश का हाल बेहाल है। आमजन लूट-पिट रहा है. राजनेता, उद्दोगपति और नौकरशाही माला-माल है। राजनीतिक दल चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष – गलबहिया खेल रहे है। विडम्बना यह है कि सबसे ईमानदार प्रधानमंत्री के कार्यकाल मे सर्वाधिक भ्रष्टाचार है. प्रधानमंत्री अर्थशास्त्र के विद्वान है, लेकिन देश महंगाई से त्रस्त है। आम नागरिकों का धैर्य टूट गया है. गोविन्दाचार्य समझ गये है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ हथौडा आजमाने का वक्त आ गया है। 1 और 2 अप्रैल को दिल्ली के विवेकानन्द  इंटरनेशनल फाउंडेशन  में दुनिया भर से दर्जनों और देशभर से सैकडों सामाजिक इकट्ठा हुए। लोग आये तो थे सेमीनार में, लेकिन जाते-जाते "भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा"  बनाने के संकल्प करते गये। योग गुरु स्वामी रामदेव के संरक्षण में बने इस मोर्चे के संयोजक के. एन. गोविन्दाचार्य एवं सह- संयोजक आईआईएम बेंगुलुरु के  प्रो. श्री आर. वैद्यनाथन और श्री भूरे लाल होंगे। श्री एस. गुरुमूर्ति,  श्री अजित डोबाल, श्री वेद प्रताप वैदिक और  श्री भीष्म अग्निहोत्री  इस मोर्चे सदस्य होंगे। यही समिति भ्रष्टाचार के विरोध में बनने वाली सारी योजनाओं और रणनीतियों का खाका तैयार करेगी। जल्द ही राज्यों में भी इस मोर्चे की ईकाइयां गठित कर दी जायेंगी। स्वामी रामदेव जी ने 2 दिन के सेमीनार के अंत में भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का ऐलान करते हुए  इस  विषय से जुड़े प्रतिबद्ध व्यक्तियों और संघठनो से अपील की कि वे  भी अपनी-अपनी विचारधाराओं से ऊपर उठ कर  इस जंग में शामिल हो। &lt;br /&gt;गौरतलब है कि विवेकानन्द इंटरनेशनल फाउन्डेशन के तत्वावधान में ‘‘शासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही : भारतीय परिपेक्ष्य एवं अन्तरराष्ट्रीय अनुभव’’ विषय पर दो दिवसीय सेमीनार के बहाने यह सब हुआ। दोनों दिन राजनीति, खुफिया, अर्थशास्त्र और सामाजिक क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भ्रष्टाचार और काले धन की समस्या के स्वरुप, पहलू और परिणाम पर गहन विचार किया। &lt;br /&gt;पूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री एम.एन. वेंकटचेलैया ने कहा कि शासन का उत्तरदायित्व प्रधानमंत्री का होता है । प्रधानमंत्री जैसा चलेंगे वैसा ही देश चलेगा । वर्तमान में सरकारों के पास न तो दृष्टि और न ही ध्येय । दृष्टि और ध्येय से ही जनकल्याण की भावना उत्पन्न होती है । उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और काले धन का मामला तो संसद कानून बनाकर चुटकियों में हल कर सकती है । जनता पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने कहा कि काला धन और भ्रष्टाचार देश के सामने एक बड़ा खतरा है। श्री एस. गुरुमूर्ति ने कहा कि भ्रष्टाचार से पैदा हुआ करोड़ों रू. विदेशों में जमा है। यह पैसा हमारे देश में हथियार और नशीले पदार्थों के रूप में आता है । विदेश की बात तो छोड़ें, देश में ही एक नहीं अनेक हसन अली है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी दोनों एक्सपोज होने चाहिये। भ्रष्टाचार को दंडित होने के लिये इसका खुलासा बहुत जरुरी है। रुस की खुफिया एजेंसी केजीबी द्वारा राजीव गान्धी के परिवार को पैसा देना दस्तावेजो में मौजूद है, लेकिन सब चुप है। &lt;br /&gt;गोविंदाचार्य ने कहा कि अभी सब कुछ खत्म नही हुआ है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई में जिद्द और संकल्प चाहिये। देश में राजनीतिक व्यवस्था से लोगों का विश्वास उठ चुका है। सत्ता पक्ष और विपक्ष का भेद खत्म हो चुका है। सरकार पर सत्ता लिप्सा, हिस्ट्रीशीटरों और धनबल की चादर चढ गई है। भारतीय राज्य, भारतीय लोगों के ही खिलाफ  संघर्ष कर रहा है। अपराध और भ्रषटाचार का अन्तरराष्ट्री यकरण हो गया है। ऎसी स्थिति में हमें वाक् विलास से आगे की सोचना चाहिये। जाहिर है वे सेमीनार को आन्दोलन की शक्ल देना चाह्ते थे। वे जो चाहते थे वही हुआ। गोविन्दाचार्य चाह्ते है कि देश की समस्या का उपाय राजनीतिक और गैर-राजनीतिक दोनो मोर्चों पर हो। हालांकि उनके पास समय और संसाधन दोनो बहुत कम है। लेकिन वे अपनी ताकत बखूबी जानते है। इस मुहिम में आरएसएस उनके साथ है। बाबा रामदेव के संरक्षण से उन्हें एक बडी ताकत मिली है। जयप्रकाश आन्दोलन के सिपाही बेशक उनका साथ देंगे। भ्रष्टाचार ऎसा मुद्दा जो विचारधारा, दल और संगठन से परे हो गया है। इस मुहिम में कोई वैचारिक अडचन नहीं है। जयप्रकाश आन्दोलन के बाद एक बार फिर देश व्यवस्था परिवर्तन के लिये तैयार खडा है। सामाजिक आन्दोलनों के नेताओं ने मौके की नजाकत भांप ली है।  इकट्ठा होने और देश को इकट्ठा करने की कवायद शुरु हो चुकी है। अन्ना की आवाज को गोविन्द ने हुंकार दी है। जनता पहले से ही कोपाकुल है। उसकी भृकुटि चढी हुई है। लेकिन इस बार सिर्फ सिंहासन खाली करने या भरने की नही, बल्कि व्यवस्था को झंकझोडने की, उसे नई व्यवस्था देने की बात है।&lt;br /&gt;बहरहाल गोविन्दाचार्य के पास खोने को कुछ नही है। वे कई मोर्चों पर कवायद मे जुटे है। वे रचनात्मक, आन्दोलनात्मक और बौद्धिक तीनों ही आयामों पर प्रयोग कर रहे हैं। राजनीतिक तौर पर राष्ट्र्वादी मोर्चा, नये संविधान-सभा के गठन और शासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं के जुटान में उन्होंने साहसिक पहल की है। सिर्फ राजनैतिक मोर्चे पर ही अब दो तक दर्जन से अधिक छोटे-छोटे दल साथ आ चुके है। अगर सफल हुए तो इतिहास रच जायेंगे, असफल हुए तो भी रास्ता तो दिखा ही जायेंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-5629711489681266523?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://www.spandanfeatures.com/' title='भ्रष्टाचार के खिलाफ गुरु-गोविन्द दोनों मैदान में'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/5629711489681266523/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=5629711489681266523' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/5629711489681266523'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/5629711489681266523'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2011/04/blog-post.html' title='भ्रष्टाचार के खिलाफ गुरु-गोविन्द दोनों मैदान में'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-oNfKdSc2Cns/TZqYm-gT9AI/AAAAAAAAATU/2TQoAaCoorY/s72-c/VIF%2BFoto.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-1355777123255944143</id><published>2011-02-13T04:17:00.000-08:00</published><updated>2011-02-13T04:40:39.273-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नर्मदा कुम्भ'/><title type='text'>नर्मदा कुम्भ में धर्मांतण पाप से मुक्ति</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/-zZrxfhvYxPs/TVfM2TXHdlI/AAAAAAAAASQ/9JKoFr3f2pk/s1600/narmada_march_heffa_386951102.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 208px;" src="http://2.bp.blogspot.com/-zZrxfhvYxPs/TVfM2TXHdlI/AAAAAAAAASQ/9JKoFr3f2pk/s320/narmada_march_heffa_386951102.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5573148297176512082" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight:bold;"&gt;ईसाइयों की जैसी आशंका या उनका जैसा आरोप था वैसा कुछ भी नहीं हुआ. नर्मदा कुम्भ का भव्य शुभारंभ हो गया. वनवासी हो या मतांतरित ईसाई कोई न तो डरे और न ही रुके. लेकिन कॉंग्रेस और ईसाई मिशनरी जरुर डरे है. ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जॉन दयाल की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कुंभ के आयोजकों पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि ईसाई समाज की प्रार्थना सभाओं में बाधा डालने की कोशिश की जा रही है। ईसाई परिवारों में जाकर उन्हें वापस हिंदू बनने के लिए दबाव डाला जा रहा है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उधर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सुरेश पचौरी और कॉंग्रेस के ही महासचिव दिग्विजय सिंह ने बार-बार नर्मदा कुम्भ पर रोक लगाने की मांग की है. ईसाई मिशनरियों के सुर में सुर मिलाते हुए कॉंग्रेस के नेताओं ने नर्मदा सामाजिक कुम्भ को भाजपा का आयोजन बताया. दरअसल कॉंग्रेस के नेताओं में मिशनरियों को पीछे छोड़ देने की होड लगी है. कॉंग्रेस के लिए मध्यप्रदेश में नर्मदा कुम्भ के आयोजन से एक तरफ कुआ तो दूसरी तरफ खाई पैदा हो गयी गई. कॉंग्रेस सांप-छछूंदर की स्थिति में है. कॉंग्रेस के नेता, ईसाईं मिशनरी, सोनिया और वनवासियों को एक साथ खुश करना चाहते है. नेताओं को डर है कि अगर ये खुश नहीं हुए तो नाराज हो जायेंगे. वे ये भी जानते है कि ये तीनो एक साथ खुश भी नहीं हो सकते. असमंजस की स्थिति में कॉंग्रेस के नेताओं ने तय किया कि अभी तो कांग्रेसमाता सोनिया और ईसाई मिशनरी को ही खुश किया जाए. अभी अनुसूचित जनजाति के वोट की दरकार कोंग्रेस को नहीं गई. आने वाला चुनाव उत्तरप्रदेश में है. इसलिए वनवासी समाज के नाराज होने से कॉंग्रेस की राजनीतिक सेहत पर तत्काल कोई असर नहीं पडने वाला. मुसलमानों की ही तरह वनवासी (कॉंग्रेस के आदिवासी) भी कॉंग्रेस के लिए सिर्फ वोटबैंक है. इस कुम्भ से वोट बैंक पर तत्काल कोइ खतरा नहीं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मध्यप्रदेश के मंडला में आयोजित तीन दिवसीय नर्मदा सामाजिक कुम्भ पर कॉंग्रेस और मिशनरियों का एक ही सुर है. पोप, जॉन दयाल, सोनिया माइनो और सुरेश पचौरी-दिग्विजय एक ही राग अलाप रहे है. कॉंग्रेस के नेताओं ने अपने आम कार्यकर्ताओं के खिलाफ जाकर इस कुम्भ का विरोध किया तो उसका कारण हर हाल में सोनिया और मिशनरियों को प्रसन्न करना है. कॉंग्रेस नेता सुरेश पचौरी ने नर्मदा कुंभ को सनातन धर्म की मान्यताओं के विरूद्व बताते हुये इस पर मध्यप्रदेश धर्म स्वतंत्रता कानून 1968 के अंतर्गत तत्काल रोक लगाने की मांग की है। केन्द्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम् एवं प्रदेश के राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर को लिखे पत्र में उक्त आशय का आग्रह करते हुये उन्होंने कहा है कि कथित कुंभ में अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा फैलाने के लिये आपत्तिजनक पर्चों का वितरण किया जा रहा है जो घोर निंदनीय है। दरअसल काग्रेस के नेताओं ने वास्ताविकता से आँखे भींचने की कोशिश की है. मिशनरियों के इशारे पर संघ, भाजपा और कुम्भ आयोजकों पर आरोप लगा कर वे स्वयं ही अपनी किरकिरी करा रहे है. मंडला की स्थानीय ईसाई संस्थाएँ कुम्भ में आयोजकों का सहयोग कर रही है. उन्होंने यहाँ अपने कैम्प और स्टॉल भी लगा रखे है. जहां तक मतांतरित ईसाइयों के घर वापसी का सवाल है तो जब सामान्य हिन्दू नर्मदा में स्नान करके अपने पापों से मुक्त हों जाते है तो फिर नि:संदेह मतांतरित हिन्दू भी अपने पापों से मुक्त हों सकते है. नर्मदा कुम्भ के आयोजक भले ही प्रत्यक्ष तौर पर "घर वापसी" के किसी कार्यक्रम से इंकार कर रहे है, लेकिन नर्मदा स्नान से कितनी बडी घर वापसी हो रही है इसका अंदाजा न तो सोनिया माइनो को है और न ही जॉन दयाल को. नर्मदा कुम्भ के आयोजकों की कोशिश है कि नर्मदा स्नान को पापमुक्ति, शुद्धिकारण और घर वापसी के तंत्र के रुप में स्थापित कर दिया जाए. घर वापसी के लिए नर्मदा स्नान का मन्त्र देने में आयोजक सफल रहे. इंकार करने से भी यह सच झूठ नहीं हों सकता कि 10 से 12 फरवरी तक होने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में लाखों हिन्दू अपने पापों से मुक्त होंगे, वहीं हजारों मतांतरित हिन्दू अपने मतांतरण-पाप से भी मुक्त होंगे. उल्लेखनीय है कि नर्मदा सामाजिक कुंभ हिन्दू समाज एक अनूठा आयोजन है। तीन दिन तक चलने वाले इस कुंभ में 20 लाख से भी अधिक वनवासियों के जुटने की उम्मीद है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह सर्वविदित है कि संघ और अन्य हिन्दूवादी संगठन पोप और उनके मतांतरण तंत्र चर्च और मिशनरी की गतिविधियों से काफी चिंतित है. मध्यप्रदेश में गठित नियोगी और रेगे कमिटी ने भी मतान्तरण के खतरे के प्रति आगाह किया था. राज्य सरकार की लापरवाही के कारण चर्च और मिशनरियों ने स्वच्छंद होकर मतान्तरण किया. गाँव-गाँव तक अपना जाल फैलाया. संघ जब चेता तब तक काफी देर हों चुकी थी. अब मतान्तरण और घर वापसी राजनीतिक मुद्दा बन गया है. संघ ने वर्षों पहले (२००२) झाबुआ में "हिन्दू संगम" का आयोजन किया था. बाद में वर्ष 2006 मे गुजरात में शबरी कुम्भ और अब मंडला में नर्मदा सामाजिक कुम्भ. आयोजक सार्वजनिक तौर पर चाहे कुछ भी कहें उनका एजेंडा स्पष्ट है. संघ वनवासियों में पहचान की अस्मिता जागृत करना ही है. यह आयोजन हिन्दू धर्म के प्रति आस्था रखने, राष्ट्रीय एकता का भाव जगाने तथा सामाजिक समरसता का अलख जगाने हेतु किया जा रहा है। संतों के मुताबिक, माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ का उद्देश्य आदिवासियों की संस्कृति, उनकी पहचान और जीवन शैली ही नहीं बल्कि उनके आराध्य देव (बूढ़ादेव)के प्रति उनकी आस्था पर होने वाले आघात से उन्हें सुरक्षित करना भी है। संघ और उनसे जुड़े आयोजक भोले- भाले वनवासियों को धर्मातरण के कुचक्र से बचाने की कवायद में है. नर्मदा तट पर जमा हुए करीब दो लाख से भी अधिक जनसमुदाय से आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और विश्व हिंदू परिषद नेता प्रवीण तोगड़िया और ऐसे ही कई नेताओं ने मंडला में मतान्तण रोकने का आह्वान किया. मोहन भागवत ने कहा कि जब शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं वनवासियों को मिलेंगी तो उन्हें कोई लालच देकर धर्मातरित नहीं कर सकेगा। स्वामी सत्यमित्रानंद सरस्वती ने ईसाई मत ग्रहण करने वाले वनवासियों को उल्लू की संज्ञा देते हुए कहा कि उन्हें दिन के उजाले में भी कुछ नजर नहीं आता है। ओंकारेश्वर से आए स्वामी हरिहरानंद ने कहा कि दो-ढाई हजार साल पहले उत्पन्न हुए धर्म के कीट-पतंगे हमारे भोले-भाले लोगों को बरगला कर उनका धर्म परिवर्तित कर रहे हैं। सभी वक्ताओं ने अपने-अपने तरीके से कहा कि धर्म बदलने के बाद व्यक्ति अपने पूर्वजों को भूल जाता है, फिर उसकी निष्ठाएं बदल जाती हैं। संघ की चिंता है मतान्तण से राष्ट्रान्तरण होता है. एक हिन्दू का मतान्तरण होने से सिर्फ एक ईसाई या एक मुसलमान नहीं बढता बल्कि देश का एक शत्रु बढ़ता है. संघ अब नर्मदा जल से शत्रू प्रक्षालन करेगा. एक-एक मतांतरित ईसाई और मुसलमान को देशभक्त हिन्दू बनायेगा.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ईसाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधि और ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जॉन दयाल का नर्मदा कुम्भ पर छाती पीटना स्वाभाविक है. वर्षों की मेहनत और करोड़ों-अरबों खर्च कर जो काम किया वह नर्मदा जल से यूं ही धुल जाए ये चर्च और मिशनरियों को कैसे सुहायेगा. लोभ,लालच और छल से किया गया धर्मं परिवर्तन एक झटके में नर्मदा मैया के प्रवाह में बह जाए इसे जॉन दयाल कैसे पचा पायेंगे. क्या जवाब देंगे अपने आका को. वे किसा मुंह से पोप को बताएँगे कि कितना खोखला है उनके इसाईयत का मुल्लमा. जैसे पचौरी को सोनिया के सवालों का डर है, शायद जॉन दयाल भी पोप के सवालों से डरे है. कुम्भ के आयोजकों ने सवाल किया है नर्मदा कुम्भ से कोइ देशभक्त भयातुर नहीं है, ईसाई मिशनरी क्यों डर रहे है. संघ की कोशिश है एक बार वनवासी समाज जागरूक और सचेत हों जाए तो फिर चर्च भी कुछ नहीं कर सकेगा. राजनीतिक दल भी उसे सिर्फ वोटबैंक नहीं मानेंगे. तब चाहे भाजपा, कांग्रेस हों या गोंडवाना पार्टी, चर्च-मिशनरी हों या इस्लामिक ताकतें कोइ भी वनवासियों को बरगला नहीं सकेगा. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि समाज के क्रियाशील हुए बिना धर्मातरण नहीं रुक सकता। कुंभ में हम यह संकल्प लें कि हम हिंदू समाज में व्याप्त छुआछूत को समाप्त करने के लिए काम करेंगे। विद्या दान करेंगे, अन्नदान करेंगे। संघ ने हर चार साल में सामाजिक कुंभ का ताना-बाना बुन दिया है. पहले 2006 गुजरात में शबरी कुंभ और 2011 में मध्यप्रदेश के मंडला में नर्मदा कुम्भ. आयोजकों ने हर पांच साल में इस तरह के सामाजिक कुंभ की योजना पहले ही बना रखी है। संघ नेताओं का कहना है कि असली हिंदुत्व तो वनवासियों ने ही बचा रखा है। धार्मिक कुंभ नासिक, उज्जैन, इलाहबाद और वाराणसी में होता आया है. वनवासियों का यहा सामाजिक कुम्भ भी हर चौथे साल में आयोजित होगा. वनवासी क्षेत्र ज्यादातर दुर्गम इलाको में है इसलिए सामाजिक कुम्भ भी सुदूर दुर्गम क्षेत्रों में ही होगा. संभव है अगला कुम्भ झारखंड या पूर्वोत्तर क्षेत्र में कही आयोजित हो. गौर करने लायक बात है कि संघ जहा अपनी पद्धति से काम कर रहा है, वही कॉंग्रेस और मिशनरी भी अपनी स्टाइल में विरोध कर रहे है. अभी तो संघ का पलडा भारी दिखता है. कॉंग्रेस और मिशनरी ने प्रेस और मीडिया के जरिये ज्ञापन देकर अपना विरोध प्रकट किया है. इन्होंने शबरी कुम्भ के समय भी ऐसा ही किया था. संघ ने देशभर से लाखों वनवासियों को इकट्ठा कर विरोधियों कों उनकी औकात बता दी है. संघ ने नर्मदा जयन्ती पर लाखों वनवासियों और नर्मदा भक्तों के बीच वनवासी पहचान को बचाने और मतांतरण को रोकने का आह्वान किया. भाजपा को संघ और सरकार के प्रयासों का लाभ तो मिलना ही है. वही कोंग्रेस अपनी छाती पीटती रही. कॉंग्रेस के नेता चाहते तो इस कुम्भ में भागीदार होकर वनवासियों की इतनी बड़ी उपस्थिति का लाभ ले सकते थे. लेकिन अपने आलाकमान सोनिया की नाराजगी के डर से वे यह भी नहीं कर सके.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-1355777123255944143?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/1355777123255944143/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=1355777123255944143' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/1355777123255944143'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/1355777123255944143'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2011/02/blog-post.html' title='नर्मदा कुम्भ में धर्मांतण पाप से मुक्ति'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-zZrxfhvYxPs/TVfM2TXHdlI/AAAAAAAAASQ/9JKoFr3f2pk/s72-c/narmada_march_heffa_386951102.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-1544840001838554933</id><published>2011-01-10T00:29:00.000-08:00</published><updated>2011-01-10T00:35:14.497-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='शबरी कुंभ के बाद नर्मदा सामाजिक कुंभ'/><title type='text'>गुजरात में शबरी कुंभ के बाद मध्यप्रदेश में नर्मदा सामाजिक कुंभ</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TSrEtZQHeXI/AAAAAAAAARw/ZdKG4eu2zJc/s1600/narmada_devi.png"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 250px; height: 250px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TSrEtZQHeXI/AAAAAAAAARw/ZdKG4eu2zJc/s320/narmada_devi.png" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5560472974093941106" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;भोपाल से अनिल सौमित्र&lt;br /&gt;भोपाल। वर्ष 2011 मध्यप्रदेश ही नहीं, पूरे देश के लिए ऐतिहासिक होने वाला है। 10 से 12 फरवरी तक मां नर्मदा सामाजिक कुंभ का आयोजन हो रहा है। नर्मदा कुंभ मध्यप्रदेश के वनवासी बहुल मंडला जिले में हो रहा है। ऐसा ही एक कंुभ वर्ष 2006 में गुजरात के डांग जिले में शबरी कुंभ के नाम से आयोजित हुआ था। भारत वर्षों से हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में होने वाले धार्मिक कुभ से अलग यह सामाजिक कंुभ है। &lt;br /&gt;नर्मदा सामाजिक कुंभ के मीडिया समन्वयक विराग पाचपोर ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि इस कंुभ के लिए आयोजन समिति का गठन काफी पहले हो चुका है। इस समिति में देश के प्रख्यात धर्माचार्य, सामाजिक संगठन और वनवासी क्षेत्रों में कार्यरत ख्यात लोग शामिल हैं। इस कुभ में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, झारखंड, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, बिहार और दिल्ली के साथ ही पूर्वोत्तर के राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोगों के आने की संभावना है। श्री पाचपोर ने बताया कि वर्तमान तैयारियों के आधार पर यह अनुमान है कि इस कुंभ में लगभग 20 से 25 लाख लोग शामिल होंगे। कुंभ के आयोजन के लिए केन्द्रीय आयोजन समिति के अलावा ब्लॉक, तालुका और जिला स्तर पर आयोजन समिति का गठन किया गया है। &lt;br /&gt;परंपरागत रूप से आयोजित होने वाले ऐतिहासिक कुंभ-मेलों का उद्देश्य भले ही धार्मिक हो लेकिन गुजरात के शबरी कुंभ और छत्तीसगढ़ के राजिम कुंभ से लेकर मंडला में आयोजित होने वाले नर्मदा कुभ का उद्देश्य विकास के साथ सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। वनवासी क्षेत्रों में मतान्तरण रोकना और मतान्तरण से पैदा होने वाले राष्ट्रीय एकता-अखंडता के खतरे को उजागर करना भी इस कुंभ का एक प्रमुख उद्देश्य है। कुंभ के पूर्व और कुंभ के दौरान जनजागरण कार्यक्रमों के द्वारा मंडला की महारानी दुर्गावती, रानी लक्ष्मीबाई सहित मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और जनजातीय संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश किया जायेगा। &lt;br /&gt;मां नर्मदा सामाजिक कुंभ के दौरान रानी दुर्गावती, महाराणा प्रतात, पर्यावरण एवं मां नर्मदा, सिख गुरुपुत्रों की बलिदान गाथा, राष्ट्रीय एकता और विधर्मियों के कुटिल हथकंडे, विश्वमंगल गौ-माता, जल संरक्षण, सामाजिक सुरक्षा और अयोध्या राम मंदिर केन्द्रित 10 से अधिक प्रदर्शनियां भी लगाई जायेगी। चूुकि यह ऐतिहासिक आयोजन मध्यप्रदेश में हो रहा है इसलिए राज्य सरकार ने भी अपनी ओर से तैयारियां कर रही है। सड़कें और पुल-पुलियों के निर्माण और मरम्मत का काम तेजी से हो रहा है। मध्यप्रदेश शासन की ओर से सड़क और बिजली जैसी आधारभूत सुविधाओं के साथ ही सुरक्षा की दृष्टि से भी मदद का आश्वासन दिया गया है। &lt;br /&gt;आयोजकों ने इस सामाजिक कुंभ को समाज के अंतिम व्यक्ति तक ले जाने का निर्णय किया है। इसीलिए तैयारियों से लेकर जन-जागरण और सामग्री संग्रह में भी शहरी और ग्रामीण परिवारों से मदद ली जा रही है। महाराष्ट्र से शक्कर और लाखों की संख्या में लॉकेट बुलाया जा रहा है। इसी प्रकार मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों परिवारों से एक किलो चावल, आधा किलो दाल और एक-एक रूपये का संग्रह किया जा रहा है। उत्तरप्रदेश से आलू तो गुजरात से भाजन सामग्री के साथ बड़ी संख्या में भाजन बनाने और वितरण करने वाले आ रहे हैं। &lt;br /&gt;मां नर्मदा सामाजिक कुंभ के आयोजक एक तरफ इसके सफल आयोजन के प्रति निश्चिन्त हैं, वहीं असामाजिक तत्वों और ईसाइ मिशनरियों के विरोध के प्रति चिंतित भी। शबरी कुंभ के आयोजन में भी इन्हीं तत्वों ने देश-विदेश में काफी विरोध किया था। जबलपुर सहित प्रदेश के अनेक ईसाइ संगठनों ने इस सामाजिक कुंभ के खिलाफ न सिर्फ दुष्प्रचार शुरु कर दिया है बल्कि उन्होेने इसके विरोध की रणनीति भी बना रखी है। आने वाले दिनों में ईसाइयों का दुष्प्रचार और विरोध और अधिक आक्रमक होगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-1544840001838554933?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/1544840001838554933/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=1544840001838554933' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/1544840001838554933'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/1544840001838554933'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2011/01/blog-post_7016.html' title='गुजरात में शबरी कुंभ के बाद मध्यप्रदेश में नर्मदा सामाजिक कुंभ'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TSrEtZQHeXI/AAAAAAAAARw/ZdKG4eu2zJc/s72-c/narmada_devi.png' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-3061039665986716387</id><published>2011-01-10T00:24:00.000-08:00</published><updated>2011-01-10T00:25:30.661-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='माँनर्मदा कुंभ'/><title type='text'>माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ</title><content type='html'>हिन्दू समाज में श्रेष्ठतम् दार्षनिक सिðांत होने के बावजूद काल प्रवाह मंे अनेक ऐसी षिथिलताएं और कुरीतियां समाज में प्रवेष करती चली गयीं, जिनमे सर्वाधिक कष्ट कर विड्ढय जाति के आधार पर हिन्दू और हिन्दू के बीच भेद-भाव एवं अस्पृष्यता रहा,जिनसे हमारे षत्रुओं केा हमें परास्त करने और दासत्व में रखने का अवसर प्राप्त हुआ। इसमें मुख्य रुप से तेरह सौ वर्ड्ढ मुगल एवं पांच सौ वर्ड्ढ ईसाइयांें का रहा। इतने वर्ड्ढों तक विदेषी आक्रांताओं की उपस्थिति के बावजूद हिन्दू धर्म की सर्वव्यापकता के कारण हिन्दू धर्म का अस्तित्व एवं राष्ट्र की एकता अक्षुण्ण रही। विष्व का अन्य कोई भी देष 100-150 से ज्यादा वर्ड्ढों के संघर्ड्ढ मंे अपना अस्तित्व कायम नही रख पाया।  &lt;br /&gt; हमारे समाज को कुरीतियों से मुक्त करने के लिए जितना कार्य किया जाना चाहिए था, उतना अभी हुआ नहीं  है । बौð, जैन, सिक्ख सभी अपने - अपने तत्वज्ञान को कायम रखते हुए हिन्दू धर्म के व्यापक सहायक अंग हैं, अतः हिन्दू समाज को अपने तत्व ज्ञान के अनुरुप अपना आचरण दिखाना है। कुरीतियों और रुढ़ियांे से ग्रस्त इस समाज में बदलाव आना चाहिए। हिन्दू समाज की मूल धारा रहे, जनजातीय व वनवासी बन्धुओं को अलग करने का एक ड्ढड्य××ंत्र चल रहा है। अतः आज स्वयं में परिवर्तन लाये जाने की जरुरत है। हिन्दू ही अपनी संस्कृति से दूर हटेगा तो कौन इस महान संस्कृति का धारक होगा। हम सब भारत माता के पुत्र हैं यह भाव सभी में उत्पन्न करना, यही हम सब का लक्ष्य होना चाहिये। हिन्दू समानता की कल्पना सर्वांगीण समरसता की कल्पना है। सभी में एक ही ईष्वर का अंष है इसलिए न कोई ऊंचा है और न कोई निम्न।&lt;br /&gt; इस माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ में देषभर से संत, महात्माआंे एवं प्रबुðजनों के अलावा लगभग बीस लाख लोगों के आने की संभावना है। इसकी सुचारु व्यवस्था के लिये हजारों कार्यकर्ताओं की आवष्यकता होगी जो दस दिनांे तक रहकर कुंभ मंे आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की व्यवस्था में लगेंगे। विगत 12,13 व 14 नवम्बर को मंडला मंे कुंभ के संचालन हेतु लगभग पांच हजार कार्यकर्ताओं को व्यवस्था संम्बधी  प्रषिक्षण दिया गया। इस कुंभ में सहभागिता हेतु बड़ी संख्या में साधु संतों के अपनी षिष्य मंडली सहित आगमन की सहमति प्राप्त हो रही है। समूचे राष्ट्र से सभी जाति बिरादरियों के बंधु इस कुंभ में पधार रहे हैं। &lt;br /&gt; इस आयोजन से सामाजिक समरसता के निर्माण एवं धर्म की दृढ़ता की परिणति राष्ट्र की सुदृढ़ एकता के रुप में होगी। जबलपुर में दिनांक 21/11/2010 रविवार को आयोजित इस पत्रकार वार्ता को मार्गदर्षक द्वय मा.श्री मुकुंदराव जी पणषीकर(अ.भा.धर्मजागरण प्रमुख), स्वामी महामण्डलेष्वर अखिलेष्वरानंद जी सरस्वती, श्री राजेन्द्र जी (सचिव) माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ ने सम्बेाधित किया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-3061039665986716387?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/3061039665986716387/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=3061039665986716387' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/3061039665986716387'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/3061039665986716387'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2011/01/blog-post_10.html' title='माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-2007197667509961317</id><published>2011-01-10T00:14:00.000-08:00</published><updated>2011-01-10T00:24:14.858-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नर्मदा कुंभ'/><title type='text'>10,11,व 12 फरवरी २०११ माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ</title><content type='html'>किसी राष्ट्र की उन्नति व एकता के लिए वहां के निवासियांे  में अपनी संस्कृति, मान्यताओं व धर्म के प्रति दृढ़ता व सामाजिक समरसता की महती भूमिका है। किसी राष्ट्र की संस्कृति व धर्म को क्षीण कर दिया जाये तो वह ज्यादा दिन तक सबल नहीं रह सकता। भारत एक धर्म प्रधान राष्ट्र है, प्रारम्भ से ही धर्म रुपी सूत्र ने समूचे राष्ट्र को एकरुप बँाध रखा है। विभिन्न बोली-भाड्ढा, खान-पान,रहन-सहन, स्थानीय लोक व्यवहार की भिन्नताआंे  के  बावजूद हिन्दू धर्म की सर्वव्यापकता ने एकात्मता के भाव को सर्वोपरि रखा तथा राष्ट्र की एकता को अक्षुण्ण रखा। स्वामी विवेकानंद ने भी कहा है - धर्म भारत का प्राण है। &lt;br /&gt; प्राचीनकाल से ही कुंभ जैसे बड़े-बड़े धार्मिक स्वरुप लिये हुए वृहद् सामाजिक आयोजन देश की अखण्डता व एकात्मता को सुदृढ़ बनाने के माध्यम रहे हैं। इस अवसर पर सामाजिक व्यवस्थाओं, परम्पराओं के पुनर्मूल्यांकन व संषोधन की प्रक्रिया विद्वत मण्डली, ऋड्ढि-मुनियांे की उपस्थिति में चलती रहती थी। इस प्रकार के आयोजनों से वर्ग भेद को मिटाकर समाज में समरसता, उदारता, एकता और संगठन के सूत्र में पिरोने का कार्य सम्पन्न करने मार्ग निर्देषित किये जाते रहे हैं।&lt;br /&gt; आगामी 10,11,व 12 फरवरी 2011 अर्थात्  माघ षुक्ल, सप्तमी,अष्टमी व नवमी, विक्रम संवत् 2067 को माँ नर्मदा जयंती के अवसर पर ‘‘माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ’’ का आयोजन प्राचीन महिष्मती नगरी (वर्तमान मण्डला ) में किया जा रहा है । इसके पूर्व सन् 2006 में गुजरात के डांग जिले में षबरी कुंभ का आयोजन सफलता पूर्वक सम्पन्न हो चुका है। उस समय सम्पूर्ण भारतवर्ड्ढ से पूज्य संतों के अह्वान पर बड़ी संख्या में आबाल - वृð, नर-नारी सम्मिलित हुये थे। उस समय संतो का यह निर्णय हुआ कि ऐसे सामाजिक कुंभांे का आयोजन पष्चिम से पूर्व की दिषा में बढ़ते हुए हो । उक्त आह्वान की श्रृंखला की कड़ी के रुप में ही इस आयोजन की रचना बनी है। &lt;br /&gt; मंडला मध्यप्रदेष का एक ऐतिहासिक स्थल है जिसका सीधा सम्बंध रानी दुर्गावती की षैार्य गाथाओं से जुड़ा हुआ है। इसके अलावा गढ़ मण्डला हजारों वर्ड्ढों से वनवासी संस्कृति का पोड्ढक कंेद्र भी रहा है।धार्मिक  दृष्टि से भी पुराणकालीन कृष्ण द्वयपायन वेदव्यास ने वेदों का संकलन एवं सरलीकरण तथा प्रख्यात् श्री नर्मदा पुराण की रचना यहीं की थी । ऐसे पावन स्थल पर ‘‘माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ’’ का आयोजन होने जा रहा है। हम सब इस वास्तविकता से अवगत हैं कि गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, क्षिप्रा, गोदावरी, कावेरी जैसी पावन नदियों के तट पर ही संपूर्ण विष्व को अपने ज्ञानसे आलोकित करने वाली सनातन संस्कृति ने जन्म लिया है। यहां आयोजित कुंभ के अवसरों पर देष के कोने-कोने से संत और प्रबुðजन एकत्र होकर काल,परिस्थिति का समग्र विष्लेड्ढण कर समाज का मार्गदर्षन करते रहे हेैंें। इस अवसर पर महामण्डलेष्वर स्वामी अखिलेष्वरानंद जी महाराज, मार्गदर्षक मा.मुकुंदराव पणषीकर एवं सचिव श्री राजेन्द्र प्रसाद जी आदि ने इस अवसर पर पत्रकारों से विषेड्ढ चर्चा की।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-2007197667509961317?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/2007197667509961317/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=2007197667509961317' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/2007197667509961317'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/2007197667509961317'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2011/01/1011-12.html' title='10,11,व 12 फरवरी २०११ माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-8858480931685378647</id><published>2011-01-10T00:11:00.000-08:00</published><updated>2011-01-10T00:13:27.969-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नर्मदा कुंभ'/><title type='text'>"नर्मदा संस्कृति: संक्रमण एवं समाधान" पर विमर्श</title><content type='html'>विश्व संवाद केंद्र, हिंदुस्तान समाचार तथा इंडियन मीडिया सेण्टर भोपाल ने आज उपरोक्त विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की, जिसमे मुख्य अतिथि पूर्व मुख्य सचिव श्री कृपा शंकर शर्मा, तथा मुख्यवक्ता विश्वप्रसिद्ध  मानवशास्त्री श्री विकास भट्ट थे. श्री विराग पाचपोर कार्यक्रम के अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय एकता समिति के उपाध्यक्ष रमेश शर्मा विशिष्ट अतिथि थे. &lt;br /&gt;नर्मदा लोकगाथाओं और वैज्ञानिक तथ्यों, दोनों से ही विश्व की प्राचीनतम नदी मानी गयी है. यही कारण है की इसके तट पर विश्व की प्राचीनतम सभ्यता विकसित हुई. जब विश्व की अनेक प्राचीन संस्कृतियों ने साम्राज्यवाद और अनेक अन्य आक्रमणों के आगे घुटने टेक दिए और पूर्णतः नाश्ता हो गयीं, विश्व नर्मदा की सभ्यता ने अपना अस्तित्व कायम रखा और स्वयं को हर युग में अभिव्यक्त करती रही. इस महान संस्कृति के संरक्षक नर्मदाक्षेत्र के वनवासी हैं जो युगों से अपनी आस्था का केंद्र अपनी नरबदा मैया, अपने संस्कारों, अपनी परम्पराओं और अपने देशज ज्ञान को मानते रहे हैं. वर्तमान युग में यह समाज की जिम्मेदारी है की वे वनवासी बंधुओं से पुनः सांस्कृतिक और सामाजिक सम्बन्ध प्रगाढ़ कर सदियों पुरानी अपनी संस्कृति, कलाओं और ज्ञान को ग्रहण करें तथा इनके संरक्षण हेतु उनके साथ कंधे से कन्धा मिलाकर खड़े हों. इसी विचार से इस विषय को  विस्तार से आम लोगों तक पहुंचाने, नए युग में इस संस्कृति पर आसन्न नयी चुनौतियों को पहचानने, तथा उनका समाधानों पर चर्चा हेतु ये कार्यशाला आयोजित की गयी थी. &lt;br /&gt;उदबोधन:&lt;br /&gt;इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री कृपा शंकर शर्मा ने स्वयं को नर्मदा पुत्र बताते हुए इसके तट पर बसे लोगों का माँ नर्मदा के प्रति उनकी आस्थाओं के बारे मं बताया. उन्होए विश्वास व्यक्त किया की इस कार्यशाला से अनेक उपयोगी विचार निकल कर आयेंगे. मुख्यवक्ता श्री विकास भट्ट ने विस्तार से अमरकंटक से लेकर गुजरात तक नर्मदा तट पर बसे वनवासियों की आस्थाओं और उनसे जुडी परम्पराओं का वर्णन किया. उन्होंने ने इस बात पर भी प्रकाश डाला की किस प्रकार विदेशी आक्रमणकारियों ने वनवासियों को मुख्य से बाटने के हर संभव प्रयास किये, यहाँ तक की उन्हें 'आदिवासी' कह कर उनकी पहचान ही बदलने की कोशिश की. शिक्षाविद श्री संजय द्विवेदी ने नर्मदा तट पर नक्सालियों की समस्या पर प्रकाश डाला तो नर्मदा सहयता के विद्वान नरेन्द्र द्विवेदी ने अनेक नै चुनौतियों का वर्णन किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नागपुर के वरिष्ठ पत्रकार श्री विराग पाचपोर ने धर्मांतरण से उत्पन्न संकट और कम्यूनिस्ट, इस्लामी  आतंकवाद, इसाई मिशनरियों तथा नाक्साल्वादियों के गठजोड़ पर गहरी चिंता जताई. बिनायक सेन की रिहाई के प्रयासों को भी उन्होंने देश के विरुद्ध एक षड़यंत्र बताया. कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन श्री अनिल सौमित्र ने किया.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-8858480931685378647?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/8858480931685378647/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=8858480931685378647' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/8858480931685378647'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/8858480931685378647'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2011/01/blog-post.html' title='&quot;नर्मदा संस्कृति: संक्रमण एवं समाधान&quot; पर विमर्श'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-7062792881856399117</id><published>2011-01-06T21:08:00.000-08:00</published><updated>2011-01-06T21:12:50.728-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नर्मदा कुंभ'/><title type='text'>नर्मदा सामाजिक कुंभ में सहयोग के लिये अपील पत्र</title><content type='html'>आदरणीय बन्धु/भगिनी,&lt;br /&gt;सादर, नमस्कार।&lt;br /&gt;आपको विदित ही होगा कि 10, 11 और 12 फरवरी, 2011 को मध्यप्रदेश के वनवासी बहुल जिला मंडला में नर्मदा सामाजिक कुंभ का आयोजन हो रहा है। यह आयोजन सभी दृष्टियों से विशाल और व्यापक है। अनुमान के मुताबिक लगभग 20 से 25 लाख लोगो के इस आयोजन में सभी नागरिक-ग्रामीण और गिरिजन की अपनी-अपनी कुछ न कुछ भूमिका होगी। जो उपस्थित होंगे वे भी और जो उपस्थित नहीं हो सकेंगे वे भी इस महायज्ञ में कुछ न कुछ योगदान देंगे।&lt;br /&gt;सब का योगदान अपनी-अपनी क्षमता के आधार पर होगा। जानकारी के अनुसार आयोजन समिति नकद राशि के अलावा विभिन्न प्रकार की आवश्यक सामग्रियों का संकलन कर रही है। कोई नगद राशि देगा तो कोई दाल-चावल, गुड़-शक्कर से लेकर दीया-सलाई और अन्य उपयोग की वस्तुएं। &lt;br /&gt;नर्मदा सामाजिक कुभ के दौरान स्पंदन संस्था भी अपनी उपस्थिति और भागीदारी दर्ज कराना चाहती है। लेकिन अकेले नहीं, आप सबके साथ। आप स्पंदन के माध्यम से भी अपनी भावनाएं, अपना स्नेह और सहयोग इस कुंभ में पहुंचा सकते हैं। निश्चित ही आप पुण्य के भागी बनेंगे। आपका सहयोग कई जरूरतमंदों के लिए मददगार सिद्ध होगा। इसके लिए आप भी स्पंदन मुहिम में शामिल होकर हमारे प्रयासों में हाथ बंटाइए।&lt;br /&gt;कृपया आपके पास नए-पुराने, किसी भी साइज के, किसी भी प्रकार के कपड़े जो बच्चों, किशोरों और बुजुर्गों के उपयोग के लायक हों, हमें उपलब्ध कराइए, ताकि इसे जरूरतमंद वनवासी बन्धुओं के बीच वितरित किया जा सके।  इसके आप हमें हमारे ई-मेल या दूरभाष/मोबाईल पर भी संपर्क कर सकते हैं। स्पंदन कार्यकर्ता संकलित वस्त्र आपसे प्राप्त कर लेंगे। आप चाहें तो निम्न पते पर इसे पहुंचा भी सकते हैं - &lt;br /&gt;स्पन्दन, ई-31, 45 बंगले, भोपाल - 462003, मध्यप्रदेश&lt;br /&gt;दूरभाष : 0755-2765472, 2765174, 09425008648&lt;br /&gt;संपर्क हेतु अन्य सूत्र&lt;br /&gt;श्री जी.के. छिब्बर - 09826012960, 2753294    श्रीमती कुंकुम गुप्ता -0755-2760400&lt;br /&gt;श्रीमती दीपशिखा हर्ष – 09425018086           श्री एस.जी. हसन - 9406809422&lt;br /&gt;श्री अंकुर शर्मा – 09926642199               श्री सुनील मीणा - 08109373211 &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आपके माध्यम से स्पंदन समूह समाज के लिए सहयोगी बनना चाहता है। आप हमारी सहायता करें, बड़ी कृपा होगी। हमारा आग्रह स्वीकार करें हमारी मुहिम में शामिल हों, स्पंदन समूह कृतार्थ होगा। कृपया इस सन्देश को आप अपने मित्रों, परिचितों और सगे-संबंधियों तक भी पहुंचाने मे हम सब की मदद किजिये।&lt;br /&gt;सादर,&lt;br /&gt;भवदीय&lt;br /&gt;अनिल सौमित्र&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-7062792881856399117?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/7062792881856399117/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=7062792881856399117' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/7062792881856399117'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/7062792881856399117'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2011/01/kunbha.html' title='नर्मदा सामाजिक कुंभ में सहयोग के लिये अपील पत्र'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-817325112351957376</id><published>2010-12-16T22:28:00.000-08:00</published><updated>2010-12-16T22:36:38.027-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='दिग्विजय सिंह'/><title type='text'>राघोगढ़ का रावण</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TQsE6uViXjI/AAAAAAAAARk/q9DAcGIe7is/s1600/karkare_250_f.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 288px; height: 248px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TQsE6uViXjI/AAAAAAAAARk/q9DAcGIe7is/s320/karkare_250_f.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5551536372581555762" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;द्वापर के रावण और कलियुग के दिग्विजय सिंह में आश्चर्यजनक रूप से समानताएं हैं. दोनों ही राजा हैं. दोनों में पांडित्य है. लेकिन जैसे रावण आसुरी शक्ति के शीर्ष पर था वैसे ही दिग्विजय सिंह भी आसुरी मानसिकता के शीर्ष पर हैं. मध्य प्रदेश में रहते हुए उन्होंने अपनी आसुरी बुद्धि से न केवल प्रदेश को रसातल में पहुंचाया बल्कि अपनी ही पार्टी को हाशिये पर फेंककर दिल्ली चले गये. अब दिल्ली में बैठकर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक विषवमन के जरिए अपनी प्रासंगिकता खोज रहे हैं.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राजनीतिक समीक्षक कहते हैं दिग्गी दूसरे दलों में अपने समर्थक पैदा करते हैं और अपनी पार्टी के भीतर अपने विरोधियों को पैदा नहीं होने देते, अगर पैदा हो गए तो उन्हें बढ़ने नहीं देते, अगर इक्का-दुक्का विरोधी बढ़ भी गए तो उनका तत्काल खात्मा करते हैं। मध्यप्रदेश और देश की राजनीति में ऐसे अनेक उदाहरण हैं। दिग्विजय सिंह सामंती स्वभाव के राजेनता माने जाते हैं। मध्यप्रदेश में अपने 10 वर्षों के राज में वे जनता को कुशासन देने के रूप में जाने जाते हैं। अपने जमाने में उन्होंने नारा दिया - चुनाव विकास से नहीं, प्रबंधन से जीते जाते हैं। उन्होंने एक पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा था कि जब लालू बिना बिजली और सड़क के तीसरी बार सत्ता में आ सकते हैं तो मैं क्यों नहीं। हालांकि 2003 में उनका चुनावी प्रबंधन बुरी तरफ फेल हो गया था। अपने राज में उन्होंने प्रदेश में सांप्रदायिकता का हौव्वा खड़ा कर दिया था। एक तरफ वे हिन्दुओं का दमन करते रहे वहीं ईसाइय-मुसलमानों को शह देते रहे। गौरतलब है कि 22 दिसंबर, 1998 को झाबुआ के नवापाड़ा में जब एक नन के साथ बलात्कार हुआ था तब भी दिग्विजय सिंह ने हिन्दुओं और हिन्दू संगठनों पर ही आरोप मढ़ दिए थे। लेकिन बाद में बलात्कार के कई आरोपी मतान्तरित ईसाई ही पाए गए थे। विपक्ष सहित कई पार्टियों की मांग और राज्यपाल द्वारा सीबीआई जांच के लिए पत्र लिखने के बाद भी मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पूरे मामले से मुह मोड़ लिया था। वे सिर्फ घटना का राजनैतिक लाभ उठाना चाहते थे। दिग्विजय सिंह ने झाबुआ नन बलात्कार कांड के एक आरोपी को कांग्रेस का टिकट भी दिया था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपने मुख्यमंत्री के कार्यकाल में जब उन पर सोम डिस्लरी से घूस लेने का आरोप लगा और वे विपक्ष के आक्रामक तेवरों से घिर गए तो अचानक तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रशंसा करने लगे। वे अचानक ही राजग की शिक्षा नीति के प्रशंसक बन गए। ज्योतिष को विज्ञान मान लिया। लेकिन जब-जब उनको मौका हाथ लगा हिन्दुत्व पर आक्रमण करने से कभी नहीं चूके। महाराष्ट्र एटीएस के मुखिया हेमंत करकरे की आतंकी हत्या को लेकर दिए गए बयान पर दिग्गी बुरी तरह घिर गए हैं। अपनी किरकिरी होते देख कांग्रेस ने भी उनके बयान से पल्ला झाड़ लिया है। लेकिन विपक्ष कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृहमंत्री चिदंबरम से दिग्विजय के बयान पर उनकी प्रतिक्रया पूछ रहा है। कांग्रेस में अलग-थलग पड़े दिग्विजय सिंह को उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद जगदंबिका पाल के बयान से एक और झटका लगेगा। दिग्गी जिस प्रदेश के प्रभारी हैं उसी प्रदेश के कांग्रेसी नेता अब उनके खिलाफ हो गए हैं। जाहिर है दिग्विजय की ओछो राजनीति से कांगेस का धर्मरिपेक्षता का राग भी कमजोर पड़ता दिख रहा है। कांग्रेसी सांसद जगदंबिका पाल ने एक कार्यक्रम में कहा कि दिग्विजय सिंह का बयान गैर जरूरी था। मुम्बई हादसे के बाद गृहमंत्री ने इस मुद्दे पर पाकिस्तान के खिलाफ जिस तरह का माहौल बनाया, उस पर ऐसे बयान से प्रतिकूल असर पड़ेगा। दरअसल अपने बड़बोलेपन से वे कई बार पूरी पार्टी को संकट में डाल चुके हैं। हो सकता है दिग्विजय सिंह का बयान रूवयं को पार्टी में स्थापित करने या अपना कद बढ़ाने के लिए हो। यह भी संभव है कि वे अपने बयानों से पार्टी का भला करना चाहते हों। लेकिन उनके बयानों से हर बार पार्टी को नुकसान ही होता रहा है। ऐसे में पार्टी के भीतर भी वे आलोचना और निन्दा के पात्र बनते हैं। अंततः उनके स्वयं का नुकसान भी होता है। लेकिन दिग्विजय सिंह है कि अपनी करनी से बाज नहीं आते।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मध्यप्रदेश की राजनीति में ‘बुआजी’ के नाम से चर्चित और वर्तमान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रही जमुना देवी ने वर्ष 1995 में कांग्रेस के वर्तमान महासचिव और तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बारे में टिप्पणी की थी, ‘‘ मैं आजकल मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के तंदूर में जल रही हूं।’’ इन्हीं बुआजी ने एक बार कहा था - मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने सलाहकार और वामपंथी विचारधारा के समर्थक संगठनों को विशेष महत्व दे रहे हैं, जिससे नक्सली गतिविधियां फल-फूल रही हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जानकारों के मुताबिक राघोगढ़ ने हमेशा ही अंग्रेजों का साथ दिया। राजा अजीत सिंह के दरम्यान राघोगढ़ के ब्रिटिश राज के ही अधीन रहा। 1904 में राघोगढ़ सिंधिया राज के अधीन हो गया। राघोगढ़ के तब के राजा सिंधिया को नजराना दिया करते थे। राघोगढ़ के राजा बहादुर सिंह भारतीय राजाओं में अंग्रेजों के सबसे वफादार थे। इनकी इच्छा थी कि वे प्रथम विश्व युद्ध में अंग्रेजों की तरफ से लड़ते हुए मारे जायें। अंग्रेजों की इस वफादारी के लिए राघोगढ़ राजघराने को वायसराय का धन्यवाद भी मिला। इतिहास के पन्नों में इस बात का उल्लेख है कि राघोगढ़ सामंत ने अपने क्षेत्र अंग्रेजों के खिलाफ भारतीयों की हर आवाज को दबाया। 1857 के गदर के दौरान भी यह राजघराना भारतीयों की बजाए अंग्रेजों के ही साथ था। दिग्विजय सिंह को यह अवसर मिला था कि वे राघोगढ़ पर लगने वाले आरोपों का जवाब देते, लेकिन उन्होंने न तो अपने 10 वर्षों के अपने शासन में और न ही अब ऐसा कोई प्रयास किया। बजाए इसके वे लगतार ऐसे बयान दे रहे हैं जिससे आतंवादियों और उनके पोषक शक्तियों को ही मदद मिल रही है। मामला चाहे बटला हाउस का हो या आजमगढ़ जाकर आतंकियों के परिजनों से मुलाकात का, हर बार दिग्विजय सिंह पर आतंकियों की मदद करने का आरोप लगा।&lt;br /&gt;मध्यप्रदेश भाजपा ने दिग्विजय सिंह और खूखंार अपराधियों के गठजोर को केन्द्र में रखकर एक पुस्तिका प्रकाशित की थी। ‘एक संदिग्ध मुख्यमंत्री’ नाम से प्रकाशित इस पुस्तिका में मालवा क्षेत्र के खूंखार अपराधी खान बन्धुओं और दिग्विजय के संबंधों को उजागर किया गया था। मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 15 अगस्त, 1995 को स्वतंत्रता दिवस पर भेापाल में बोलते हुए कहा कि ‘‘यहां अल्पसंख्यक असुरक्षा की भावना से पीड़ित होते हैं, और इसीलिए वे हथियारों का जमाव करते हैं।’’ दरअसल दिग्गी अपने उपर लगे आरोपों को ही जायज ठहरा रहे थे। भाजपा ने उन पर संगीन आरोप लगाए थे। गौरतलब है कि 1994-95 में जब गुजरात पुलिस ने मालवा के उज्जैन जिले से पप्पू पठान की गिरफ्तारी की तब विदेशी हथियार कांड का भांडा फूटा। यह भी पता चला कि इसमें रतलाम नगर पालिका निगम का पार्षद भी शामिल है जो दिग्विजय सिंह के पैनल से चुनाव लड़ा था। इस पार्षद का नाम आर.आर खान बताया गया। महिदपुर निवासी पप्पू पठान की जानकारी के आधार पर आर.आर खान के छोटे भाई महमूद खान के पास से कार्बाइन सहित अनेक विदेशी हथियार बरामद हुआ। पकड़े गए आरोपियों का संबंध तस्कर छोटा दाउद और सोहराब पठान से भी पाया गया। पुलिस की तफतीश में यह भी पता चला कि इन सभी आरोपियों को दिग्विजय सरकार के कई मंत्रियों और स्वयं मुख्यमंत्री तथा अल्पसंख्यक आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष इब्राहीम कुरैशी का संरक्षण भी प्राप्त है। मीडिया और विपक्ष ने दिग्विजय सिंह द्वारा मेहमूद खान और उसके बड़े भाई आर.आर खान के बचाव में दिए गए बयान को खूब उछाला था। यह भी आरोप लगा कि इंदौर स्थित खंडवा रोड पर मालवा फार्म हाउस, जहां से देशी-विदेशी हथियारों का जखीरा पकड़ा गया था, तत्कालीन दिग्विजय सरकार के मंत्रीमंडल के कई सदस्यों द्वारा अय्याशी के लिए उपयोग किया जाता था। यह गठजोड़ न सिर्फ अखबारों की सुर्खियों में आया, बल्कि मध्यप्रदेश की विधानसभा में भी गूंजा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने भोपाल में पत्रकारों से बात करते हुए कहा- दिग्विजय सिंह सिर्फ दया के पात्र हैं। वर्ष 2003 में वे मध्यप्रदेश से बेदखल कर दिए गए थे। इस बेदखली में संघ को दोषी मानते हैं। बकौल सुश्री भारती दिग्विजय सिंह को लगता है कि मध्यप्रदेश से कांग्रेस और उनको बेदखल करने में संघ की ही भूमिका थी। इसीलिए वे हर बात में संघ का नाम घसीटते हैं। दिग्विजय सिंह ने हमेशा ही संघ को कटघरे में खड़े करने की कोशिश की है। हिन्दू आतंकवाद का नारा उछालने और संघ को आतंकी संगठन सिद्ध करने के लिए उन्होने हर संभव कोशिश की। हालांकि दिग्विजय सिंह का दामन स्वयं ही दागदार है। कुछ दिन पहले ही माकपा-माओवादी के केन्द्रीय समिति सदस्य तुषारकांत भट्टाचार्य ने एक साप्ताहिक पत्रिका को बताया था कि दिग्विजय सिंह ने पिछले साल अगस्त में उनकी पार्टी से संपर्क साधा था। यह कोशिश हैदराबाद के एक कांगेेसी नेता के जरिए की गई थी।  भट्टाचार्य के मुताबिक उस वक्त वह वारंगल जेल में था। गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने गृहमंत्री चिदंबरम की नक्सल विरोधी नीति की आलोचना की थी।&lt;br /&gt;        मध्यप्रदेश की राजनीति में ‘बुआजी’ के नाम से चर्चित और वर्तमान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रही जमुना देवी ने वर्ष 1995 में कांग्रेस के वर्तमान महासचिव और तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बारे में टिप्पणी की थी, ‘‘ मैं आजकल मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के तंदूर में जल रही हूं।’’ इन्हीं बुआजी ने एक बार कहा था - मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपने सलाहकार और वामपंथी विचारधारा के समर्थक संगठनों को विशेष महत्व दे रहे हैं, जिससे नक्सली गतिविधियां फल-फूल रही हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दिग्विजय सिंह का ताजा बयान यही बयां करता है कि उन्होंने देशभक्ति का कोई सबक नहीं सीखा है, बल्कि इसके उलट वे अंग्रेजो से लेकर आतंकियों और देश विरोधियों के समर्थक के तौर पर उभरे हैं। अब यह सच भी उजागर होन लगा है कि उन्हीं के राज में सिमी, नक्सली गतिविधियां, बांग्लादेशी घुसपैठ और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा मिला, बल्कि अरुंधती राय जैसी देश विरोधी बुद्धिजीवियों को भी शह मिला। इतिहास के पन्नों में यह दर्ज है कि दिग्विजय सिंह के पुरखे अंग्रेजों के प्रति वफादार रहे। अब अखबारों में यह दर्ज हो रहा है कि दिग्विजय सिंह ने आर.आर खान से लेकर अजमल कसाब तक की रहनुमाई राजनीति कैसे की। इन सब से कांग्रेस और दिग्विजय की धर्मनिरपेक्ष छवि को कितना बल मिला या उनके वोट बैंक में कितना इजाफा हुआ यह तो नहीं मालूम, लेकिन तब प्रदेश का और अब पूरे देश का नुकसान जरूर हो रहा है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-817325112351957376?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://visfot.com/home/index.php/author/anilsaumitra/' title='राघोगढ़ का रावण'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/817325112351957376/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=817325112351957376' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/817325112351957376'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/817325112351957376'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/12/blog-post_16.html' title='राघोगढ़ का रावण'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TQsE6uViXjI/AAAAAAAAARk/q9DAcGIe7is/s72-c/karkare_250_f.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-534965788948077994</id><published>2010-12-09T20:39:00.000-08:00</published><updated>2010-12-09T20:42:29.772-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='विज्ञान संचार'/><title type='text'>खजुराहो में अन्तरराष्ट्रीय विज्ञान संचार सम्मेलन की शुरुआत</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TQGvlqrEqzI/AAAAAAAAARc/6LD2o6Gd9DA/s1600/DSCF7331.JPG"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TQGvlqrEqzI/AAAAAAAAARc/6LD2o6Gd9DA/s320/DSCF7331.JPG" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5548909277542132530" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;भारत में 4 से 11 दिसंबर तक दुनिया के पचास से अधिक देशों विज्ञान संचार विशेषज्ञ इकट्ठा हुए। दुनिया भर के संचार विशेषज्ञों का जुटान विज्ञान एवं प्रौद्योगकिी विभाग की ईकाई राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद् ने किया है। आधुनिक समाज में विज्ञान की भूमिका पर आयोजित इस 11 वें ‘‘पब्लिक कम्युनिकेशन आॅफ साईंस एंड टेक्नोलॉजी’ के आयोजन में मध्यप्रदेश विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी परिषद् ने भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। गौरतलब है कि खजुराहो में 4 और 5 दिसंबर को आयोजित ‘‘प्री कांफ्रेरेंस’’ की मेजबानी मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् ने की। 6 से 10 दिसंबर तक मुख्य सम्मेलन दिल्ली में और समापन 11 दिसंबर को जयपुर में होगा। मध्यप्रदेश की ऐतिहासिक नगरी खजुराहो न सिर्फ मंदियों और मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इतिहास, धर्म और कला-संस्कृति के संचार के लिए भी जाना जाता है। संचार नगरी खजुराहो विज्ञान संचार के प्रति नई सोच और दृष्टि उत्पन्न करने के लिए आयोजित अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन का साक्षी बना। यहां आयोजित प्री-कांफ्रेंस में विज्ञान भारती के संगठन सचिव जयकुमार, मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् के महानिदेशक प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा, योजना आयोज के सलाहकार ए.के. वर्मा, एनसीएसटीसी के निदेशक डॉ. मनोज पटैरिया, समाज विज्ञानी डॉ. जितेन्द्र बजाज, संचार विशेषज्ञ शशिधर कपूर, संदीप भट्ट और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के डॉ. पी. के. मिश्रा मुख्यरूप से उपस्थित थे। इस सम्मेलन में विदेशी संचार विशेषज्ञ भी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। इन सम्मेलन में आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, फिलीपींस सहित कई देशों के अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों हिस्सा लिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उद्घाटन सत्र में बोलते हुए विज्ञान भारती के संगठन सचिव जयकुमार ने कहा कि विज्ञान संचार पर बात करते हुए हमें यह भी विचार करना चाहिए कि वैदिक साहित्य कैसे आया यह कैसे विकसित हुआ। वर्षों तक लिखने-पढ़ने की पद्धति विकसित न होने के बावजूद हमारे देश में ज्ञान-विज्ञान का संचार होता आया है। भारतीय समाज साहित्य, विज्ञान और ज्ञान का संचार श्रुति संचार के द्वारा वर्षों तक करता रहा है। पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञान का हस्तांतरण भी एक विशिष्ट भारतीय पद्धति से होता रहा। जब दुनिया अज्ञान के अंधेरे में थी तब भी भारत ने सभी क्षेत्रों में ज्ञान-विज्ञान का संचार किया।&lt;br /&gt;    जयकुमार ने कहा कि वैज्ञानिक का मतलब सिर्फ टाई-कार्ट नहीं है। यहां के किसान और वनवासी वास्तविक वैज्ञानिक हैं। भारत का वनवासी कैंसर का उपचार कर रहा है। अशिक्षित और निरक्षर लोगों ने भी अनेक क्षेत्रों में उत्तम संचार किया है और आज भी कर रहे हैं। भारतीय समाज ने टीवी, विडियो और एलसीडी जैसे उपकरण और तकनीक न होने के बाद भी यह सब किया। यहां अनेक गांवों में आज भी बिजली नहीं है, अंधेरे में आधुनिक संचार कैसे काम करेगा। हम सिर्फ सूचना संचार तकनीक से ही समस्याओं का निदान नहीं कर सकते। मीडिया क्षेत्र में कार्यरत लोगों को भी विज्ञान संचार के बारे में नए सिरे से सोचने की जरूरत है। आज भी अपने देश में एक भी विज्ञान केन्द्रित समाचार पत्र नहीं है।&lt;br /&gt;    उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की समस्याओं और आवश्यकताओं को जानने-समझने की कोशिश होनी चाहिए, फिर इसी के अनुकूल विज्ञान संचार को विकसित किया जाना चाहिए। भारत में भारतीय द्ष्टि से विज्ञान संचार की रूपरेखा बनानी होगी। भारतीय ऋषियों ने ध्वनि विज्ञान, भाषा विज्ञान पर काफी काम किया है।&lt;br /&gt;योजना आयोग के सलाहकार ए.के. वर्मा ने कहा कि सभी सफल प्रधानमंत्रियों ने विज्ञान के महत्व की बात स्वीकर करते हुए इसे बढावा दिया है। आज मोबाइल, कम्प्युटर और टीवी जैसे आधुनिक संचार साधन गरीब और पिछड़े लोगों को भी मदद दे रहे हैं। आज इस बात पर विचार करने की जरूरत है कि विकास और संचार को कैसे जोड़ा जाए। वैज्ञानिकों और संचारकों को मिल कर काम करने की जरूरत है। विज्ञान को लोकप्रिय बनाना भी एक चुनौती है, खासकर भारत जैसे देश में जहां अनेक भाषा, समुदाय और भिन्न-भिन्न संस्कृतियों का समाज है। श्री वर्मा ने कहा कि भारत सरकार का योजना आयोग 12 वीं योजना की तैयारी कर रहा है। इसमें भी विज्ञान और विज्ञान संचार को देश की जरूरतों के मुताकिब शामिल किया जा सकता है। विज्ञान के क्षेत्र में लोक जागरण और लोक जिम्मेदारी को बढ़ावा देने में मीडिया की बड़ी भूमिका हो सकती है।&lt;br /&gt;    मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद्के महानिदेशक प्रो. प्रमोद कुमार वर्मा ने कहा कि हमें लोगों में वैज्ञानिक मनोवृत्ति का विकास करना है। हमारी संचार की विशिष्ट परंपरा रही है। इस परंपरा को संरक्षित और विकसित करने की जरूरत है। हमारी दादी ने ‘काजल’ बनाना और आंखों में लगाना हमारी मां को सिखाया। झारखंड राज्य में बनने वाले हंडिया और मध्यप्रदेश के मंडला जिले के वैद्यों द्वारा किए जाने वाले उपचार विधियों का उल्लेख करते हुए डॉ. वर्मा ने भारतीय परंपराओं में विज्ञान और विज्ञान संचार से प्रतिभातियों को रूबरू कराया। उन्होंने कहा कि भारत ने वैज्ञानिक दृष्टि अपनाते हुए समय, सामग्री, प्रक्रिया और उत्पाद को हमेशा महत्व दिया। भारत में ओझा-वैद्य शायद पढ़ना-लिखना नहीं जानते लेकिन उपचार की श्रेष्ठ विधियों से वे भलि-भांति परिचित थे। हमारे पास आज संचार के अनेक आधुनिक साधन उपलब्ध हो गए हैं लेकिन अभी भी संचार की कमी है। बच्चों के लिए विज्ञान शिक्षा के लिए काुी समय से प्रयास चल रहा है। अभी इस दिशा में वांछित सफलता के लिए और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। विज्ञान की जटिलताओं को सहज और सर्वसुलभ बनाने की काफी आवश्यकता है। मध्यप्रदेश सरकार इस दिशा में काफी प्रयास कर रही है। सरकार के प्रयासों से विज्ञान को एक वर्ग विशेष से आम लोगों का विषय बनाने में काफी सफलता मिली है। मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौैद्योगिकी परिषद् की कोशिश है कि विज्ञान सबके लिए हो, विकास के प्रत्येक पहलू में विज्ञान को शामिल किया जाये।  देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने विज्ञान संचार से संबंधित अनेक प्रस्तुतियां भी दी। कार्यक्रम का संचालन परिषद् के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. संदीप गोयल ने किया।&lt;br /&gt;खजुराहो से अनिल सौमित्र&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-534965788948077994?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://visfot.com/home/index.php/author/anilsaumitra/' title='खजुराहो में अन्तरराष्ट्रीय विज्ञान संचार सम्मेलन की शुरुआत'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/534965788948077994/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=534965788948077994' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/534965788948077994'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/534965788948077994'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/12/blog-post.html' title='खजुराहो में अन्तरराष्ट्रीय विज्ञान संचार सम्मेलन की शुरुआत'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TQGvlqrEqzI/AAAAAAAAARc/6LD2o6Gd9DA/s72-c/DSCF7331.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-5881170907559107042</id><published>2010-11-30T04:02:00.000-08:00</published><updated>2010-11-30T04:10:14.997-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कांग्रेसी  कमीनापन'/><title type='text'>कांग्रेसी  कमीनापन कहाँ से लाओगे</title><content type='html'>सुरेश चिपलूनकर &lt;br /&gt;Friday 26 November 2010&lt;br /&gt;भाजपा के लिये "जगीरा डाकू" का एक सामयिक संदेश…&lt;br /&gt;&lt;object width="640" height="390"&gt;&lt;param name="movie" value="http://www.youtube.com/v/KRyH0eexMpE&amp;hl=en_US&amp;feature=player_embedded&amp;version=3"&gt;&lt;/param&gt;&lt;param name="allowFullScreen" value="true"&gt;&lt;/param&gt;&lt;param name="allowScriptAccess" value="always"&gt;&lt;/param&gt;&lt;embed src="http://www.youtube.com/v/KRyH0eexMpE&amp;hl=en_US&amp;feature=player_embedded&amp;version=3" type="application/x-shockwave-flash" allowfullscreen="true" allowScriptAccess="always" width="640" height="390"&gt;&lt;/embed&gt;&lt;/object&gt;&lt;br /&gt;पहले कृपया यह वीडियो क्लिप देखिये, फ़िल्म का नाम है “चाइना गेट”, राजकुमार संतोषी की फ़िल्म है जिसमें विलेन अर्थात डाकू जगीरा के साथ एक गाँव वाले की लड़ाई का दृश्य है… जिसमें उस ग्रामीण को धोखे से मारने के बाद जागीरा कहता है… “मुझसे लड़ने की हिम्मत तो जुटा लोगे, लेकिन कमीनापन कहाँ से लाओगे…”… फ़िर वह आगे कहता है… “मुझे कुत्ता भाया तो मैं कुत्ता काट के खाया, लोमड़ी का दूध पीकर बड़ा हुआ है ये जगीरा…”… असल में डाकू जागीरा द्वारा यह संदेश भाजपा नेताओं और विपक्ष को दिया गया है, विश्वास न आता हो तो आगे पढ़िये -&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डायरेक्ट लिंक - http://www.youtube.com/watch?v=KRyH0eexMpE&lt;br /&gt;भाजपा से पूरी तरह निराश हो चुके लोगों से अक्सर आपने सुना-पढ़ा होगा कि भाजपा अब पूरी तरह कांग्रेस बन चुकी है और दोनों पार्टियों में कोई अन्तर नहीं रह गया है, मैं इस राय से "आंशिक" सहमत हूं, पूरी तरह नहीं हूं… जैसा कि ऊपर "भाई" डाकू जगीरा कह गये हैं, अभी भाजपा को कांग्रेस की बराबरी करने या उससे लड़ने के लिये, जिस "विशिष्ट कमीनेपन" की आवश्यकता होगी, वह उनमें नदारद है। 60 साल में कांग्रेस शासित राज्यों में कम से कम 200 दंगों में हजारों मुसलमान मारे गये और अकेले दिल्ली में 3000 से अधिक सिखों को मारने वाली कांग्रेस बड़ी सफ़ाई से "धर्मनिरपेक्ष" बनी हुई है, जबकि गुजरात में "न-मो नमः" के शासनकाल में सिर्फ़ एक बड़ा दंगा हुआ, लेकिन मोदी "साम्प्रदायिक" हैं, अरे भाजपाईयों, तुम क्या जानो ये कैसी ट्रिक है। अब देखो ना, गुजरात में तुमने "परजानिया" फ़िल्म को बैन कर दिया तो तुम लोग साम्प्रदायिक हो गये, लेकिन कांग्रेस ने "दा विंसी कोड", "मी नाथूराम गोडसे बोलतोय" और "जो बोले सो निहाल" को बैन कर दिया, फ़िर भी वे धर्मनिरपेक्ष बने हुए हैं…, "सोहराबुद्दीन" के एनकाउंटर पर कपड़े फ़ाड़-फ़ाड़कर आसमान सिर पर उठा लिया लेकिन महाराष्ट्र में "ख्वाज़ा यूनुस" के एनकाउंटर को "पुलिस की गलती" बताकर पल्ला झाड़ लिया…। महाराष्ट्र में तो "मकोका" कानून लागू करवा दिया, लेकिन गुजरात में "गुजकोका" कानून को मंजूरी नहीं होने दी… है ना स्टाइलिश कमीनापन!!!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इनके "पुरखों" ने कश्मीर को देश की छाती पर नासूर बनाकर रख दिया, देश में लोकतन्त्र को कुचलने के लिये "आपातकाल" लगा दिया, लेकिन फ़िर भी तुम लोग "फ़ासिस्ट" कहलाते हो, कांग्रेस नहीं… बोलो, बराबरी कर सकते हो कांग्रेस की? नहीं कर सकते… अब देखो ना, कारगिल की लड़ाई को "भाजपा सरकार की असफ़लता" बताते हैं और एक "चेन स्मोकर" द्वारा पंचशील-पंचशील का भजन गाते-गाते जब चीन ने धुलाई कर डाली, तो कहते हैं "यह तो धोखेबाजी थी, सरकार की असफ़लता नहीं"…। चलो छोड़ो, अन्तर्राष्ट्रीय नहीं, देश की ही बात कर लो, संसद पर हमला हुआ तो भाजपा की असफ़लता, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बावजूद अफ़ज़ल को फ़ाँसी नहीं दी तो इसे "मानवता" बता दिया…। एक बात बताओ भाजपाईयों, तुम्हारे बंगारू और जूदेव कहाँ हैं किसी को पता नहीं, लेकिन उधर देखो… 26/11 हमले का निकम्मा विलासराव देशमुख केन्द्र में मंत्री पद की मलाई खा रहा है, CWG में देश की इज्जत लुटवाने वाला कलमाडी चीन में एशियाई खेलों में ऐश कर रहा है, जल्दी ही अशोक चव्हाण की गोटी भी कहीं फ़िट हो ही जायेगी… तुम लोग क्या खाकर कांग्रेस से लड़ोगे? ज्यादा पुरानी बात नहीं करें तो हाल ही में अरुंधती ने भारत माता का अपमान कर दिया, कोई कांग्रेसी सड़क पर नहीं निकला… पर जब सुदर्शन ने सोनिया माता के खिलाफ़ बोल दिया तो सब सड़क पर आ गये, बोलो "भारत माता" बड़ी कि "सोनिया माता"?  &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हजारों मौतों के जिम्मेदार वॉरेन एण्डरसन को देश से भगा दिया, कोई जवाब नहीं… देश के पहले सबसे चर्चित बोफ़ोर्स घोटाले के आरोपी क्वात्रोची को छुड़वा दिया, फ़िर भी माथे पर कोई शिकन नहीं…। अब देखो ना, जब करोड़ों-अरबों-खरबों के घोटाले सामने आये, जमकर लानत-मलामत हुई तब कहीं जाकर कलमाडी-चव्हाण-राजा के इस्तीफ़े लिये, और तुरन्त बाद बैलेंस बनाने के लिये येदियुरप्पा के इस्तीफ़े की मांग रख दी… अरे छोड़ो, भाजपा वालों, तुम क्या बराबरी करोगे कमीनेपन की…। क्या तुम लोगों ने कभी केन्द्र सरकार में सत्ता होते हुए "अपने" राज्यपाल द्वारा कांग्रेस की राज्य सरकारों के "कान में उंगली" की है? नहीं की ना? जरा कांग्रेस से सीखो, देखो रोमेश भण्डारी, बूटा सिंह, सिब्ते रजी, हंसराज भारद्वाज जैसे राज्यपाल कैसे विपक्षी राज्य सरकारों की "कान में उंगली" करते हैं, अरे भाजपाईयों, तुम क्या जानो कांग्रेसी किस मिट्टी के बने हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक चुनाव आयुक्त को रिटायर होते ही "ईनाम" में मंत्री बनवा दिया, फ़िर दूसरे चमचे को चुनाव आयुक्त बनवा लिया, वोटिंग मशीनों में हेराफ़ेरी की, जागरुक नागरिक ने आवाज़ उठाई तो उसे ही अन्दर कर दिया… भ्रष्टाचार की इतनी आदत पड़ गई है कि एक भ्रष्ट अफ़सर को ही केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त बना दिया… कई-कई "माननीय" जजों को "ईनाम" के तौर पर रिटायर होते ही किसी आयोग का अध्यक्ष वगैरह बनवा दिया…।  भाजपा वालों तुम्हारी औकात नहीं है इतना कमीनापन करने की, कांग्रेस की तुम क्या बराबरी करोगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;डाकू जगीरा सही कहता है, "लड़ने की हिम्मत तो जुटा लोगे, लेकिन कमीनापन कहाँ से लाओगे…?" गाय का दूध पीने वालों, तुम लोमड़ी का दूध पीने वालों से मुकाबला कैसे करोगे? अभी तो तुम्हें कांग्रेस से बहुत कुछ सीखना है…&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-5881170907559107042?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://blog.sureshchiplunkar.com/2010/11/blog-post.html' title='कांग्रेसी  कमीनापन कहाँ से लाओगे'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/5881170907559107042/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=5881170907559107042' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/5881170907559107042'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/5881170907559107042'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/11/blog-post_30.html' title='कांग्रेसी  कमीनापन कहाँ से लाओगे'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-6777518504781445537</id><published>2010-11-29T02:50:00.000-08:00</published><updated>2010-11-29T02:56:33.252-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मीडिया /आर.टी.आई.'/><title type='text'>मीडिया को भी आर.टी.आई.के दायरे में लाया जाए</title><content type='html'>सेवा में,                              &lt;br /&gt;विषय: लोकतंत्र के चौथे खंभे (पत्रकारिता) को सूचना के अधिकार के दायरे में लाने के संदर्भ में&lt;br /&gt;महोदय/महोदया,&lt;br /&gt;     मैं अफ़रोज़ आलम साहिल पत्रकार के साथ-साथ एक आर.टी.आई. एक्टिविस्ट हूं। मेरी मांग है कि लोकतंत्र के चौथे खंभे यानी मीडिया को सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के दायरे में लाया जाए। लोकतंत्र के पहले तीनों खंभे सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के दायरे में आते हैं। यह कानून कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका तीनों पर लागू होता है। इसका मक़सद साफ है कि लोकतंत्र को मज़बूत किया जा सके। इसी मक़सद की मज़बूती की खातिर मेरी ये मांग है कि लोकतंत्र के चौथे खंभे यानी मीडिया को भी सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के दायरे में लाया जाए, ताकि लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को हर स्तर पर लागू किया जा सके।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;                   दरअसल, पिछले कुछ दिनों में कई ऐसे वाक़्यात हुए हैं, जिन्होंने मीडिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे कई मीडिया समूह हैं, जिनकी आमदनी और निवेश संदेह के दायरे में है। ऐसे कई पत्रकार भी हैं जिनकी संपत्ति उनकी आय के ज्ञात स्त्रोतों से कई गुना ज़्यादा है और ये सब उसी मीडिया के हिस्सा हैं, जो समाज के तमाम तबकों से लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करता है। ये उसी मीडिया के लोग हैं, जो राजनेताओं से लेकर अधिकारियों और न्यायपालिका के प्रतिनिधियों की आय के स्त्रोतों की छानबीन में खासी दिलचस्पी दिखाता है और उस पर तमाम तरह के सवाल खड़े करता है। मीडिया इस बात की वकालत करता है कि समाज और लोकतंत्र के ये तमाम तबके अपनी आय का ब्यौरा सार्वजनिक करें। सार्वजनिक तौर पर अपनी ईमानदारी और पारदर्शिता का सबूत दें। फिर सवाल ये उठता है कि आखिर ये मानक खुद मीडिया पर लागू क्यों न हो। समाज और लोकतंत्र के दूसरे तबकों की खातिर जवाबदेही और पारदर्शिता की वकालत करने वाला मीडिया अपनी जवाबदेही और अपनी पारदर्शिता के सवाल से क्यों बचना चाहता है। आख़िर मीडिया इस बात की मांग क्यों नहीं करता कि ख़ुद उसे भी सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के दायरे में लाया जाए।&lt;br /&gt;                   यहां हाल की कुछ घटनाओं के जरिये मैं कुछ सवाल आपके सामने रख रहा हूँ-&lt;br /&gt;1.   अगर NDTV 24X7 की ग्रुप एडिटर बरखा दत्त और हिन्दुस्तान टाईम्स ग्रुप के एडिटर वीर सांघवी का नाम टेलीकॉम घोटाले के मामले में सीबीआई के दस्तावेज़ों में बतौर दलाल दर्ज है, तो इन लोगों की आय का ब्यौरा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाना चाहिए या इस घटना (या दुर्घटना) के सामने आने के बाद सभी पत्रकारों और माडिया हाउस को स्वेच्छा से अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक क्यों नहीं कर देना चाहिए?&lt;br /&gt;2.   अगर संसद नोटकांड मामले में CNN-IBN के एडिटर-इन-चीफ और मालिक राजदीप सरदेसाई का नाम बतौर सीडी मैनेजर सामने आता है तो उनकी संपत्ति की छानबीन क्यों नहीं की जानी चाहिए? एक पत्रकार के मालिक बनने की राह में लिए गए तमाम फायदों की कलई सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के ज़रिए क्यों नहीं खुलनी चाहिए? क्या पत्रकारों को पत्रकार होने के नाते सूचना के अधिकार का इस्तेमाल सिर्फ दूसरों के खिलाफ करने का कोई विशेषाधिकार हासिल है?&lt;br /&gt;3.   अगर इंडिया टुडे के ग्रुप एडिटर रहे प्रभु चावला अमर सिंह की चर्चित सीडी में डिलींग करते हुए सुनाई दे रहे हैं और उनके बेटे अंकुर चावला का नाम सीबीआई के दस्तावेजों में बतौर वित्तीय घालमेल के दलाल के तौर पर दर्ज है तो क्यों नहीं प्रभु चावला की वित्तीय और ज़मीनी संपत्तियों का ब्यौरा सामने लाया जाए?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ये तीन सवाल तो सिर्फ उदहारण भर हैं। ऐसे न जाने कितने मीडिया हाउस और पत्रकार हैं, जिन्होंने लोकतंत्र के चौथे खंभे की आड़ में भ्रष्टाचार की गंगोत्री बहा रखी है। इन तमाम तथ्यों और लोकतंत्र की प्रतिबद्धता के नाम पर मेरी आपसे ये मांग है कि कृपया मीडिया को भी सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के दायरे में लाने की पहल की जाए। ये लोकतंत्र की आत्मा के हक़ में होगा।&lt;br /&gt; आपके सकारात्मक जवाब का आकांक्षी&lt;br /&gt;      अफ़रोज़ आलम साहिल&lt;br /&gt;leaksehatkar@gmail.com&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-6777518504781445537?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/6777518504781445537/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=6777518504781445537' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/6777518504781445537'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/6777518504781445537'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/11/blog-post_29.html' title='मीडिया को भी आर.टी.आई.के दायरे में लाया जाए'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-4480237747880031713</id><published>2010-11-20T21:26:00.000-08:00</published><updated>2010-11-20T21:29:00.982-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='स्पन्दन फीचर्स'/><title type='text'>सुदर्शन के आरोप और सोनिया की चुप्पी !</title><content type='html'>अनिल सौमित्र&lt;br /&gt;10 नवम्बर को राष्ट्रव्यापी धरने के दौरान भोपाल में संघ के पूर्व प्रमुख सुदर्शन ने जो कुछ कहा उसके बाद बहुत कुछ बदल गया। संघ जो चाहता था नहीं हुआ। जो नहीं चाहता था, वही हो गया। सोनिया संबंधी अपने वक्तव्य के बाद सुदर्शन चुप हो गए। मीडिया के लाख प्रयासों के बावजूद वे उपलब्ध नहीं हुए। सुदर्शन जिसके कभी प्रमुख हुआ करते थे, उसने भी उनके बयान को निजी करार दिया। बाद में संघ के सरकार्यवाह का खेद प्रकट करने वाला आधिकारिक बयान जारी हुआ। लेकिन मामला शांत नहीं हुआ। कांग्रेस के महासचिव और कांग्रेसी सेक्यूलरिज्म के नए ठेकेदार दिग्विजय सिंह ने कहा - संघ प्रमुख मोहन भागवत और भाजपा को देश की जनता को यह बताना चाहिए कि वे श्री सुदर्शन के बयान से सहमत हैं या असहमत हैं। कांग्रेस पार्टी के मीडिया प्रकोष्ठ प्रमुख और प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने आग में बारूद डालने का काम किया। उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उकसाते हुए कहा - ऐसे लोगों के खिलाफ समाज की प्रतिक्रया ऐसी होनी चाहिए कि भविष्य में कोई भी इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करने की हिम्मत न कर पाए। द्विवेदी ने कहा कि इस तरह की बातों से अगर देशभर में कांग्रेसजन उत्तेजित होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी किस पर होगी? कांग्रेस के नेताओं पवन कुमार बंसल से लेकर रीता बहुगुणा, अशोक गहलोत, सुरेश पचैरी और कल्पना परुलेकर तक सभी में बयान देने और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को उकसाने की होड़ लग गई। जनार्दन द्विवेदी के बयान के तत्काल बाद कांग्रेसियों ने संघ के दिल्ली स्थित कार्यालय केशवकुंज पर हमला कर दिया। कांग्रेस ये भूल गए कि जहां जूते-चप्पल और पत्थर फेंक रहे हैं वहां भारतमाता का चित्र भी है। लेकिन उन्हें कांग्रेस-माता के समक्ष भारतमाता की केाई कद्र नहीं। मध्यप्रदेश समेत कई प्रदेशों में कांग्रेस के नेता बड़बोले हो गए। वे अपना विरोध सोनिया-माता तक पहुचाने के लिए इतने उतावले हो गए कि एक ही स्थान पर कई-कई दफे पुतले जलाए जाने लगे। कांग्रेस के जहां जितने गुट वहां उतने ही पुतले जलाए गए। केन्द्र सरकार में राज्यमंत्री अरुण यादव ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को सलाह दी कि वे पार्टी के झंडे के साथ डंडा लेकर सडकों उतरें।&lt;br /&gt;इधर संघ और भाजपा के नेता कांग्रेसी योजना की सफलता पर सिर पीटते रहे। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर संसद में और संसद के बाहर हिन्दू विरोधी दुष्प्रचार की राजनीति को लेकर कांग्रेस की घेरेबंदी हवा हो गई। कांग्रेसियों को पता था कि सुदर्शन के बयान पर जितना हल्ला मचेगा विपक्षी घेरेबंदी उतनी ही कमजोर होगी। भाजपा के मध्यप्रदेश अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय प्रवक्ता तक सुदर्शन के बयान को तूल न देने की सलाह कांग्रेस को देते रहे। कांग्रेसियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।&lt;br /&gt;संघ और भाजपा के नेता यह भूल गए कि जिसे फांसने चले थे, उसी ने अपनी चाल में फंसा लिया। कांग्रेस के नेताओं के बयान पहले से ही भड़काउ थे। चाहे वह गृहमंत्री चिदंबरम का हिन्दू-भगवा आतंकवाद संबंधी बयान हो या दिग्विजय सिंह का संघ पर आईएसआई से पैसा लेने का आरोप। बाद में राहुल गांधी ने संघ को सिमी जैसा कह दिया। यह सब कुछ हिन्दू संगठनों को उत्तेजित करने के लिए ही था। कांग्रेस चाहती थी कि संघ या अन्य हिन्दू संगठन उत्तेजित हो जाएं और कुछ ऐसा कर बैठें कि उन्हें अपने आरोपों को जायज ठहराने का बहाना मिल जाये। एक टीवी चैनल पर चर्चा करते हुए मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री और भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय बार-बार कह रहे थे कि संघ का हिंसा में विश्वास नहीं है। संघ कांग्रेस के लाख भड़काने के बावजूद शांति से अपना कार्य कर रहा है। संघ रचनात्मक कार्यों और लोकतांत्रिक पक्रिया में भरोसा रखता है। लेकिन दूारी तरफ कांग्रेस के नता सज्जन वर्मा लगातार चुनौती दे रहे थे। वे बार-बार ललकार रहे थे - भाजपा-संघ में दम हो तो राजस्थान, महाराष्ट्र या फिर आंध्रप्रदेश में हमले करके देखें। वे चाहते हैं कि कांग्रेस के लोगों ने जैसे देशभर में संघ कार्यालयों पर हमले, प्रदर्शन और पथराव किए वैसा ही कुछ संघ के कार्यकर्ता भी करें। फिर उनके दिग्विजय सिंह जैसे नेता यह कहते फिरें कि देखो ये संघी आतंकी कैसा आतंक फैला रहे हैं। बहरहाल कांग्रेस के इतना सब प्रयास करने के बावजूद भी देश में कोई बड़ा तूफान खड़ा नहीं हुआ। संघ के वरिष्ठ लोगों ने कांग्रेसी आग में पानी डाल दिया। कांग्रेस के नेता ऐसा कुछ चाहते थे जिसे देख कर मुस्लिम समुदाय भड़क जाये। वे समर्थक मुसलमानों का धु्रवीकरण चाहते हैं। शायद यह अभी तक हो नहीं सका।&lt;br /&gt;एक समाचार पत्र ने लिखा कि कांग्रेसियों को तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी के प्रति निष्ठा दिखाने का बहाना चाहिए। आरएसएस नेता सुदर्शन ने सोनिया के खिलाफ टिप्पणी क्या कि, पार्टी के नेता सोनिया और राहुल के दफ्तर में फैक्स भेजकर बताने लगे कि उन्होंने आरएसएस के दफ्तर और उनके नेता सुदर्शन के खिलाफ किस-किस तरह से विरोध प्रदर्शित करने की योजना बनाई है। समाचार पत्र के मुताबिक कांग्रेसियों ने अपने नेता को इतने सारे फैक्स भेजे कि कई बार फैक्स रोल बदलने पड़े। सोनिया के दफ्तर में तो फैक्स मशीन को सामान्य फैक्स नम्बर से हटाकर दूसरे नम्बर में लगाना पड़ा। जब नेताओं ने सोनिया-राहुल को फोन करके अपने विरोध कार्यक्रमों के बारे में बताया तो सोनिया-राहुल ने इसमें कोई रूचि नहीं दिखाई। पार्टी से जुड़े वकीलों ने भी हमदर्दी दिखाते हुए आरएसएस और उनके नेता सुदर्शन के खिलाफ मुकदमा दायर करने की अनुमति चाही तो उस पर भी सोनिया खामोश बनी रही।&lt;br /&gt;खबर यह भी है कि सोनिया गांधी को अगले कुछ दिनों में अपनी नई टीम का ऐलान करना है। इसी महीने पार्टी की बैठक में सोनिया ने कई नेताओं को टीम से बाहर रखने का संकेत दे दिया था। इन नेताओं के लिए सुदर्शन का बयान संजीवनी की तरह है। आरएसएस नेता सुदर्शन के बयान के बहाने दिल्ली में जगदीश टाइटलर, भोपाल में सुरेश पचैरी और जयसवाल जैसे नेताओं ने संघ विरोध की कमान संभाल ली। अखबारों की कटिंग ‘कांग्रेस-माता सोनिया निवास तक पहुचायी गई। लेकिन सोनिया ने न तो कांग्रेस नेताओं के इस दिखावटी विरोध को तवज्जो दी और ना ही आगे बढ़कर मानहानि की शिकायत ही की। बयान के बाद जैसे सुदर्शन ने चुप्पी साध ली वैसे ही सोनिया ने भी।&lt;br /&gt;यह सच है कि कांग्रेस-माता सोनिया के बारे में कांग्रेसियों को पता हो या न हो स्वयं सोनिया अपने बोर में तो जानती हैं। वे जानती हैं कि सुदर्शन के वक्तव्य की भाषा, शैली और उनके वक्तव्य की परिस्थितियों पर ही हंगामा मचाया जा सकता है, उनकी कही बातों पर नहीं। सोनिया के बारे में दुनियाभर के लोग, खुफिया एजेंसियां बहुत कुछ जानती हैं। आखिर कांग्रेसी सोनिया के बारे में सच का सामना क्यों नहीं करते! कांग्रेस के नेता-कार्यकर्ताओं ने सुदर्शन-संघ को जितना भला-बुरा कहना था कह दिया। किसी ने उन्हें पागल कहा तो किसी ने मानसिक दिवालिया। लेकिन कांग्रेस के नेता तो मानसिक श्रेष्ठता का परिचय दें। एक बार तो बतायें कि जिसे वे पूजते हैं, जिनके लिए एक बार नहीं बार-बार मरने की कसमें खाते हैं उस कांग्रेस-माता का चलताउ नहीं, असली और पूरा नाम क्या है? कांग्रेसी क्या उन सोनिया माता जिनके लिए वे पलक-पांवडे बिछाए रहते हैं उनके मां-बाप के बारे में भी उतने गर्व और स्वाभिमान से दूसरों को बता सकते हैं? संघ के स्वयंसेवक भारतमाता के आराधक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, श्री माधव सदाशिवराव गोलवरकर, श्री कुप्पहल्ली सीतारमैया सुदर्शन या फिर डॉ. मोहनराव मधुकर भागवत को अपना नेता मानते हैं। वे गर्व और स्वाभिमान से इसे सार्वजनिक रूप से बताते भी हैं। क्या इतने ही गर्व और स्वाभिमान से कांग्रेसी भी यह स्वीकार करते हैं कि उनकी नेता स्टीफेनो माइनो की पुत्री एंटोनिया सोनिया माइनो हैं। सोनिया शायद इसलिए चुप हैं कि उन्हें अपना सच मालूम है। वे भले ही अपने भक्तों से ये सच छुपा लें। लेकिन इस लोकतांत्रिक देश में जहां सूचना का अधिकार हरेक नागरिक को प्राप्त है कोई भी सच ज्यादा दिन छुपाया नहीं जा सकता। कांग्रेसी भले ही सच का सामना करते हुए अपनी आंखें भींच लें, हरेक भारतीय सोनिया के सच को जानने के लिए उतावला है। कांग्रेस के विरोधी भी तो जानें कि एक सोनिया भक्त कांग्रेसी अपने नेता की जीवनी कैसे लिखता, पढ़ता और सुनता है। कांग्रेस के नेता संघ-सुदर्शन को कोसने, उन्हें भला-बुरा कहने और उनका पुतला-अर्थी जलाने से उबर गए होंगे। चाहें तो भले ही कुछ पुतले और जला लें, एकाध मुकदमे और कर दें, लेकिन एक बार हिम्मत करके सोनिया के सच का सामना जरूर करें। भले ही सुदर्शन चुप रहें, सोनिया तो अपनी रहस्यमयी चुप्पी तोडें!&lt;br /&gt;(लेखक पत्रकार और मीडिया एक्टिीविस्ट हैं। )&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-4480237747880031713?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/4480237747880031713/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=4480237747880031713' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/4480237747880031713'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/4480237747880031713'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/11/blog-post_20.html' title='सुदर्शन के आरोप और सोनिया की चुप्पी !'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-8294880918431229180</id><published>2010-11-18T23:52:00.000-08:00</published><updated>2010-11-19T00:00:47.903-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='स्पंदन फीचर्स'/><title type='text'>राहुल गांधी, सुदर्शन जी और कांग्रेस</title><content type='html'>प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कांग्रेस पार्टी सुदर्शन जी की टिप्पणिय्ाों को लेकर प्रचण्ड रोष में है। कांग्रेस के प्रवक्ताओं में से सर्वाधिक सौम्य्ा और सुशील श्री जनार्दन द्विवेदी जी तक ने प्रेसवार्ता में य्ाह कह दिय्ाा बताते है कि य्ादि कांग्रेस कायर््ाकर्ता राष्ट्रीय्ा स्वय्ांसेवक संघ पर सुदर्शन जी की टिप्पणिय्ाों के कारण हमले करते हैं तो इसकी जवाबदेही कांग्रेस पार्टी की नहीं होगी।&lt;br /&gt;कांग्रेस देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय्ा पार्टी है। हालांकि उसकी निरंतरता नाई के उस प्रसिद्ध उस्तरे की भांति है जिसे उक्त नाई ने कभी बेंट और कभी उस्तरा बदलते हुए दसों बार बदल लिय्ाा था, परन्तु फिर भी वह उसे बाप-दादों का पुराना उस्तरा ही बताता था। कांग्रेस पार्टी दस बार बदली गई है और उसके नेतृत्व, संगठन के ढांचे, दल के लक्ष्य्ा, राष्ट्र संबंधी धारणा, समाजवाद के आदर्श आदि विषय्ाों में पचासों परिवर्तन अब तक लाए जा चुके हैं। तब भी एक राजनैतिक दल के रूप में भारत की जनता उसे पुरानी कांग्रेस से किसी न किसी प्रकार संबद्ध ही मानती है । अतः हर एक को उसे इसी रूप में देखना चाहिए। ऐसी पुरानी राष्ट्रीय्ा पार्टी के कई राष्ट्रीय्ा दाय्ाित्व होते हैं। सर्वप्रथम तो य्ाह कि उसका नेतृत्व जो कुछ कहे और दूसरों के लिए जो भी आचरण की कसौटिय्ाां तय्ा करे, उस पर वह स्वय्ां श्रद्धा रखे।&lt;br /&gt;राहुल गांधी देश के राष्ट्रीय्ा नेता हैं, क्य्ाोंकि कांग्रेस ने उन्हें अपना महासचिव बनाया है। उन्हें जो लोग य्ाुवा कहते हैं, वह उनका शौक है, परन्तु आय्ाु की दृष्टि से वे एक प्रौढ नेता हैं। 40 वर्ष की उम्र प्रौढता की उम्र कही जाती है। डॉ. राममनोहर लोहिय्ाा 32 वर्ष के थे जब उन्हांेने भारत छोडो आन्दोलन में महत्वपूर्ण राष्ट्रीय्ा भूमिका निभाई थी। जब वे 40 वर्ष के थे तब तक वे एक परिपक्व विचारक के रूप में ’ख्य्ााति पा चुके थे और माक्र्सवादी दर्शन को जड-मूल से नकार चुके थे। जब वे 42 वर्ष के थे, तब उन्हें माक्र्सवाद के विरोध के कारण ही श्री जय्ाप्रकाश नाराय्ाण और आचायर््ा नरेंद्र देव ने सोशलिस्ट पार्टी से निकाल दिय्ाा था और तब उन्होंने एक नए राजनैतिक दल का गठन किय्ाा था, जिसने भारतीय्ा इतिहास में देशभक्ति और समतामूलक राजनीति के क्षेत्र्ा में अत्य्ांत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय्ा भूमिका निभाई। फिर राहुल गांधी तो देश के सबसे पुराने राजनैतिक दल के एक पूर्णतः प्रौढ राजपुरुष हैं। उन्हें हजारों लोगों से ’फीड बैक‘ मिलता रहता है। कांग्रेस की परम्परा है कि उसके सभी प्रमुख नेता नेहरू परिवार के उत्तराधिकारिय्ाों को अपनी सम्पूर्ण बुद्धि और हृदय्ा से सेवा समर्पित करते रहते हैं तथा पार्टी के हित में परामर्श देते रहते हैं। अतः राहुल गांधी जो भी कहते हैं वह कांग्रेस पार्टी की आवाज है, कांग्रेस की नीति है। उसे हल्के से नहीं लिय्ाा जा सकता। अगर वह कोई अनुचित बात कहते हैं तो वह अत्य्ांत गंभीरता से लिए जाने य्ाोग्य्ा है, क्य्ाांेकि उसमें देश के सबसे बडे राजनैतिक दल द्वारा अनुचित राजनीति की नई तैय्ाारी का लक्षण और प्रमाण दिखता है।&lt;br /&gt;राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रीय्ा स्वय्ांसेवक संघ और सिमी दोनों ही समान रूप से देश के लिए खतरनाक संगठन हैं। उनसे प्रेरणा लेकर रीता बहुगुणा, दिग्विजय्ा सिंह सहित अनेक कांग्रेसी राजपुरुष नितांत अमयर््ाादित और आपत्तिजनक अपशब्दों का प्रय्ाोग राष्ट्रीय्ा स्वय्ांसेवक संघ के लिए करते आए हैं। य्ाह अत्य्ाधिक आपत्तिजनक है। डॉ. राममनोहर लोहिय्ाा, श्री जय्ाप्रकाश नाराय्ाण, आचायर््ा कृपलानी, श्री नीलम संजीव रेड्डी, डॉ. अब्दुल कलाम सहित सैकडों शीर्षस्थ राष्ट्रीय्ा नेताओं, महापुरुषों के साथ ही हिन्दू धर्म के शीर्षस्थ धर्माचायर््ा, संस्कृति पुरुष और ज्ञानीजन राष्ट्रीय्ा स्वय्ांसेवक संघ को एक अद्वितीय्ा देशभक्त संगठन मानते हैं। उसकी राष्ट्रभक्ति असंदिग्ध है। भारत वर्ष में देशभक्तों का उससे अधिक बडा कोई भी संगठन नहीं है। राष्ट्रीय्ा स्वय्ांसेवक संघ के प्रचारक समर्पित देशभक्त हैं। उसके अब तक के सरसंघचालक भारत वर्ष के अद्वितीय्ा महापुरुष हुए हैं। पूजनीय्ा सुदर्शन जी एक धर्मज्ञ तत्ववेत्ता, इतिहास के विद्वान और समर्पित देशभक्त हैं। लाखों नवय्ाुवक उनके चरणों में भक्तिभाव से नत होते हैं। मेरी दृष्टि में भी वे एक प्रणम्य्ा महापुरुष हैं। साथ ही मेरी दृष्टि में श्री राहुल गांधी से भारतीय्ा राजनीति को बडी आशाएं हैं, बडी अपेक्षाएं हैं। उनसे गंभीर जिम्मेदारी भरे राजनीतिक व्य्ावहार की ही आशा की जाती है।&lt;br /&gt;य्ादि किसी एक व्य्ाक्ति के विषय्ा में कोई आपत्तिजनक बात कहना अनुचित है तो किसी एक विराट संगठन के विषय्ा में अप्रमाणित, असत्य्ा और अत्य्ांत आपत्तिजनक टिप्पणी करना उससे भी अधिक अनुचित है। देश में सुव्य्ावस्था और सदाचार की प्रतिष्ठा के लिए आचरण की सार्वभौम कसौटिय्ााँ तय्ा की जानी चाहिए। य्ादि सुदर्शनजी की किसी टिप्पणी के लिए उनसे माफी की उम्मीद की जा रही है तो फिर श्री राहुल गांधी को राष्ट्रीय्ा स्वय्ांसेवक संघ जैसे देशभक्त संगठन के विरुद्ध टिप्पणी के लिए तो अविराम एक वर्ष तक क्षमा मांगनी चाहिए। आखिर किस आधार पर य्ाह सब चल रहा है। कांग्रेस देश से बडी नहीं है। हालांकि वह एक बडी पार्टी है। इसलिए उससे अच्छे आचरण की ही अपेक्षा है। विराट देशभक्त संगठन को देश के लिए खतरनाक बताना सार्वजनिक संवाद और विमर्श की सभी मयर््ाादाओं को तोड डालना है। केवल तोड-फोड में विश्वास रखने वाले कम्य्ाुनिस्टों को य्ाह देश कभी भी गंभीरता से नहीं लेता। परन्तु कांग्रेस के नेतृत्व से गंभीर आचरण की अपेक्षा है। आप इस प्रकार एक विराट संगठन को अनाप-शनाप बोलकर समाज में सार्वजनिक संवाद की सभी संभावनाओं को रौंद रहे हैं। एक तरह से खुली मुठभेड और मारपीट को उकसावा दे रहे हैं। य्ाह भारतीय्ा विधान के अनुसार तो अनुचित है ही, राष्ट्रीय्ा सांस्कृतिक परम्परा के अनुसार अत्य्ाधिक आपत्तिजनक है, निंदनीय्ा है। य्ादि आज आप राष्ट्रीय्ा स्वय्ांसेवक संघ को देश के लिए खतरनाक बता रहे हैं तो कल य्ादि प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ लोग कांग्रेस को हिन्दू धर्म की विनाशक, हिन्दूद्रोही, संस्कृत भाषा और भारतीय्ा गषिय्ाों-मुनिय्ाों की सम्पूर्ण महान परम्परा की उच्छेदक और इस प्रकार राष्ट्रद्रोही कहते हैं तो आप किस मुंह से उनकी निंदा कर पाएंगे। आज आप सुदर्शन जी के बय्ाान के विरुद्ध जगह-जगह मानहानि के मुकदमे दाय्ार करने को अपने कायर््ाकर्ताओं को उकसा रहे हैं तो कल सारे देश में जगह-जगह श्री राहुल गांधी के विरुद्ध इसी प्रकार के मुकदमे य्ादि दाय्ार किए जाएं और य्ाही सिलसिला चल पडे तो फिर राजनैतिक संवाद कैसे होगा। राजनैतिक वक्तव्य्ाों का उत्तर राजनैतिक वक्तव्य्ा ही हैं। न मुकदमेबाजी और न ही गाली-गलौज।&lt;br /&gt;जहां तक क्रिश्चिय्ान चर्च के षडय्ांत्र्ाों की बात है, संपूर्ण य्ाूरोपीय्ा इतिहास इसका साक्षी है कि वहां मध्य्ाय्ाुगीन चर्च ने ऐसे भय्ांकर पापाचार और षडय्ांत्र्ा किए कि अंततः प्रबुद्ध य्ाूरोप को उसके लिए लांछित होना पडा और उस सम्पूर्ण य्ाुग को ’अंधकारय्ाुग‘ घोषित करना पडा। आज भी सेंट टेरेसा जैसी महिला मृत्य्ाु के क्षण तक इस बात को दोहराती गई हैं कि धरती चपटी है क्य्ाांेकि बाइबिल में य्ाही लिखा है और मरते हुए व्य्ाक्ति को भी किसी प्रकार समझ्ाा-बुझ्ााकर ईसाई बपतिस्मा दिलाना एक पुण्य्ा कायर््ा है क्य्ाोंकि इससे वह व्य्ाक्ति ईसा के साम्राज्य्ा का अंग बन जाएगा और ’लास्ट डे आॅफ जजमेंट‘ के दिन शैतान के साम्राज्य्ा में कम आत्माएं होंगी तथा ईसा के साम्राज्य्ा में अधिक आत्माएँ होंगी। इसका अर्थ है कि शैतान क्रिश्चिय्ान ’गॉड‘ का प्रतिस्पर्धी है। भारतीय्ा दृष्टि से इसे नास्तिकता कहा जाएगा। स्वय्ां महात्मा गांधी ने य्ाह बात कही है। इसी प्रकार गांधी जी ने गैर ईसाई लोगों को सामूहिक रूप से बपतिस्मा दिलाकर ’प्रोसिलिटाईजेशन‘ (धर्मांतरण) करने को मानवता के लिए हलाहल विष से भी अधिक भय्ांकर क्रूर-कर्म और अक्षम्य्ा पाप कहा है। गांधी जी ने तो य्ाह भी कहा था कि मैं स्वाधीन भारत में धर्मांतरण पर कानूनन पाबंदी लगी देखना चाहूंगा। मध्य्ाय्ाुगीन चर्च ने य्ाूरोप में जो अमानवीय्ा पाप किए हैं उसी के कारण आज प्रबुद्ध य्ाूरोप मध्य्ाय्ाुगीन ईसाइय्ात में तनिक भी आस्था नहीं रखता। परन्तु पोप भारत आकर इस सहस्त्र्ााब्दी में भारत सहित सम्पूर्ण एशिय्ाा को ईसाई बनाने की अपनी य्ाोजना की सार्वजनिक घोषणा करते हैं। जबकि चीन में ईसाई मिशनरी निरंतर ठोंके-पीटे जाते रहे हैं, इसी कारण वहां ईसाइय्ात नहीं बढ पाई। भारत के प्रति सभी ईसाइय्ाों को गहरी कृतज्ञता रखनी चाहिए कि य्ाहां उन्हें पंथ प्रचार की सुविधा प्राप्त है। य्ाह कृतज्ञता भाव य्ादि सच्चा हो तो कभी-कभार किसी दुखी य्ाा क्षुब्ध हिन्दू नेता द्वारा उनके ऊपर की जाने वाली कोई भी टिप्पणी सर्वथा सहनीय्ा है, क्य्ाोंकि ऐसी छिटपुट टिप्पणिय्ाों तक को न सहना उस कृतज्ञता के भाव का सर्वथा अभाव है जो कि एक हिन्दू बहुल राष्ट्र में उन्हें प्राप्त सुविधाओं से सहज ही मनुष्य्ाता के नाते उनके भीतर जागना चाहिए।&lt;br /&gt;कृतज्ञता के इस भाव का प्रमाण न मिलने पर किसी भी गंभीर हिन्दू विचारक को कभी-कभी भारत में ईसाई षडय्ांत्र्ाों की आशंका होना सामान्य्ा मानवीय्ा प्रवृत्ति है। न्य्ाू टेस्टामेंट, विशेषकर ’सर्मन आॅन द माउंट‘ के उपदेशों को मानने वाले ईसाइय्ाों को ऐसी आशंका को दूर करने के लिए बडी विनम्रता से आगे आना चाहिए, सौम्य्ा और मधुर ढंग से स्पष्टीकरण देना चाहिए। इसके स्थान पर भारत में कुछ ईसाई पादरी नक्सलिय्ाों तथा अन्य्ा आतंकवादिय्ाों से गहरी साजिशन मिली भगत कर सच्ची, सौम्य्ा और विनम्र’ ईसाइय्ात को कलंकित कर रहे हैं। अतः  किसी हिन्दू विचारक के चित्त में उपजने वाली ऐसी किसी भी आशंका की पूर्ण जिम्मेदारी उन गलत किस्म के ईसाई पादरिय्ाों की है जो नक्सलियो सहित विभिन्न आतंकवादियो से सांठ-गांठ कर तथा वामपंथी उग्रवाद की भाषा बोलते हुए हिन्दू नेतृत्व पर आए दिन अपशब्दों की बौछार करते हैं। य्ाह उन्हें शोभा नहीं देता। य्ाह सच्ची ईसाइय्ात की निशानी भी नहीं है। य्ाह क्षमाभाव के सम्पूर्ण विलोप का भी प्रमाण है और सच्ची विनय्ा के अभाव का भी प्रमाण है। सुदर्शन जी ने यदि किसी प्रकार की आशंका व्यक्त की है तो उस पर पूरी गंभीरता और विनम्रता के साथ प्रतिवाद करना ही शोभाजनक है। यदि उसके विरुद्ध कोई राजनैतिक वक्तव्य वैचारिक स्तर पर दिया जाता है तो यह् उचित है। परन्तु अपशब्दों की भरमार, कार्यकर्ताओं को आक्रमण और तोडफोड के लिए उकसावा तथा घृणामूलक प्रचार का सहारा लेना देश में गृहयुद्ध की ज्वाला भडकाने की कोशिश है, जो लोकतंत्र्ा को नष्ट करने का प्रय्ाास सिद्ध होगा। भारतीय राज्य केवल भारतीय राजपुरुषों की वस्तु नहीं है। वह कार्यपालिका, न्यायपालिका और संपूर्ण भारतीय जनता का भी उतना ही अपना है। राजपुरुषों को राज्य का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।&lt;br /&gt;स्पंदन फीचर्स । लेखक धर्मपाल शोधपीठ के निदेशक हैं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-8294880918431229180?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/8294880918431229180/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=8294880918431229180' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/8294880918431229180'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/8294880918431229180'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/11/blog-post_18.html' title='राहुल गांधी, सुदर्शन जी और कांग्रेस'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-5511984327191725576</id><published>2010-11-18T22:30:00.000-08:00</published><updated>2010-11-18T22:31:07.413-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='KGB agents in India'/><title type='text'>Demand for Commission of Inquiry to expose KGB agents in India</title><content type='html'>Dear ,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;This email message is sent to you from PetitionOnline to confirm your signature as "Anil Saumitra" on the online petition:&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  "Demand for Commission of Inquiry to expose KGB agents in India"&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;hosted on the web by our free online petition service, at:&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  http://www.PetitionOnline.com/kgbindia/&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Your signature on the petition is already complete, and there is no need&lt;br /&gt;to reply to this message.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Your signature number for this petition is 296.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;At PetitionOnline, we host the petition you've signed, but we didn't&lt;br /&gt;create it. If you would like to comment on the petition, or otherwise&lt;br /&gt;communicate directly with the petition author, you can contact the author at:&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  Concerned Indian Citizens, radhikasingh70@yahoo.com&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;                      -- * --&lt;br /&gt; Please contribute $1.00 or more to PetitionOnline and help maintain&lt;br /&gt; this premiere free speech forum.  Your contribution is completely&lt;br /&gt; voluntary -- and generous support from visitors like you is what keeps&lt;br /&gt; PetitionOnline going!  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If you can spare a moment, please take a look, and consider&lt;br /&gt;signing yourself.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Best wishes,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Anil Saumitra&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;       + --------- down to here ---------- +&lt;br /&gt;       + paste into your own email, &amp; send +&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;A note along those lines, sent from you to your friends, can make an&lt;br /&gt;especially effective contribution to the petition.  A successful&lt;br /&gt;petition is a grassroots collaborative effort, and now it's your turn.&lt;br /&gt;The power of the Internet is in your hands -- so spread the word!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Note, however, that in helping to promote this petition you are expressly prohibited from sending unsolicited bulk mail messages ("junk mail" or "spam").  This includes, but is not limited to, bulk-mailing of commercial advertising, information announcements, and political tracts.  Such material may only be sent to those who have specifically requested it.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Confirmation in Error?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;On the other hand, if you believe you have received this confirmation of&lt;br /&gt;signature in error, and, if you received the email _directly_ from&lt;br /&gt;PetitionOnline.com, then please forward THIS ENTIRE MESSAGE, with&lt;br /&gt;a brief explanation, to:&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  support@PetitionOnline.org&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;An erroneous signature confirmation is most often caused by a typographic error by a legitimate signer.  With millions of email addresses on the internet, there are very many addresses that are only one letter apart.  However, an erroneous signature confirmation could also be caused by abuse of the petition system, so all confirmation errors will be investigated carefully.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;By the way, we don't keep any email distribution lists associated with petition signers at PetitionOnline.com, so there is never any mail list here you'd need to be unsubscribed from.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;We honor you for the courage of your convictions.  And we thank you for participating in the free and open expression of public opinion.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Best wishes,&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Kevin Matthews&lt;br /&gt;Director&lt;br /&gt;PetitionOnline&lt;br /&gt;www.PetitionOnline.com provides free hosting of public petitions for responsible public advocacy.  There is NO EXPRESS OR IMPLIED ENDORSEMENT OF THIS PETITION or other hosted petitions by Artifice, Inc. or our sponsors.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;                http://www.PetitionOnline.org&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;It's quick and easy.  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As per their well known strategy the Communists have infiltrated in Gandhian Institutions gradually for last four decades. Jawaharlal Nehru was an admirer of communism but he thought himself as the best communist of India &amp; therefore he ridiculed contemporary communist leaders of his time. He preferred only his disciples like V. K. Menon etc. On the other side the communist international treated him as a fellow traveler but also abused him of being a spokesperson of Indian capitalism of which Gandhiji was the supreme leader according to the U.S.S.R. policy makers.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Earlier there was a secret Govt. order to investigate as also to enquire about the activities of communist movement in India. Communists were banned for high post of officers. But later on, during the infighting in Congress Nehru depended on the help of U.S.S.R. of which the later took advantage and managed to infiltrate the Soviet spies in India as writer, intellectuals, journalists and academicians etc. &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Peter Sager in his well written document “Masco’s hand in India” has demonstrated the fact regarding this and now Mitrokhin documents are the solid proof of the whole story.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;When U.S.S.R. launched a fake peace movement worldwide, Nehru also became the propagandist of ‘communist-brand peace’. While earlier during Gandhiji’s life time, he was advocating for an international war between capitalists and the proletariat in which the flames of violence were sure to spread world wide as per Nehru’s own confessions and he was all to be in the side of proletariat in this most violent struggle.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Anyhow, during the Land Reform programme in accordance with soviet collectivist farming, Nehru found that such an agrarians reform is very difficult in India as the peasants are powerful unit of society here and Leftists agrarian reforms would not be that easy like Zamindari abolition Act. So Nehru consulted Vinoba Bhave and both of them prepared a detailed programme of launching the Bhudaan movement through which the peasant were inspired to make way for land reforms. The whole government machinery joined the propaganda mission for Bhudaan Movement which has ultimately failed bitterly.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Acharya Vinoba Bhave was a great Sanskrit Scholar but he knew nothing about International Political Scenario and the nature of political ideologies of modern Europe. He gave many Childish formulas like removing violence from communism which will ultimately lead to a utopian world of SAMYAYOGA, which was never defined by him actually.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;The poor Acharya knew nothing of the communist ideology and of the basic principles of Newtonian decortian model from which communism has took the inspiration. The basic theory was that the society can be transformed as per the programme and in the direction of The Ideologues as the masses can be transformed in the conditioned systems of the laboratory as per the hypothesis of the “scientist” prescribing the experiment. In this belief-system the party workers were expected to work as the catalytic agent to the desired conditioning of the society.&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;An important gathering was convened at Delhi by veteran congress workers with the inspiration of Jawaharlal Nehru and Vinoba was invited as chief consultant and thus the Sarva Seva Sangh was formed. The Sarva Seva Sangh workers were expected to work as catalytic agent for the transformation of peasantry in the direction of land-reforms as per communist models and a nickname as also an Indian Face was given to it with the name of Bhudaan Movement which pleaded for charity and land donations but which never discussed the nature of Indian state as continuation of colonial structure of a state. Thus, in this structure, the state was the lord of all the property of Indian Nation and the peasants as well as all the citizens were given or prescribed their rights and duties by the state. In this sense the state was the real lord of real property including all the land of Nations. The peasants were not the real legal lord of their lands. But the Bhudaan Movement was asking them to donate as if they are the lord of their land. The effort was just to facilitate the “communist type land reform” which was supposed to lead towards collectivist forming in future for which a nick name “cooperative farming” was coined.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;In this process a fake Gandhian movement evolved and gradually thoughtless peace worker and Bhudaan worker full of blissful ignorance started to serve the cause of left oriented congress. Now this was the golden opportunity for the communist infiltrators to creep in, to spread gradually and then to capture the whole movement.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;The process was strengthened during Indira Gandhi’s regime when she collaborated to communists to save her power position. Gradually the whole vocabulary of the leader less Gandhian movement was filled with communist idioms, slogans and phraseology. Many communists card holders like Amarnath Mishra, Ramamurthy and their petty followers like Ram Chandra Rahi, Deepak malik, Muniza khan, Sunil Sahastrabuddhe, etc. captured positions in Sarva Seva Sangh, Gandhi Smarak Nidhi etc. They are good property managers but know nothing about Gandhiji’s thoughts and ideas.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;At present there is no single famous Gandhian in Northern India who has ever read all the hundred volumes of collected works of Mahatma Gandhi. Ranganath Ramchandra Diwakar was the last Gandhian who had read it all. These so called Gandhian Institutions of Northern India are not following a single Vrata of eleven vows of M.G. Cow protection had been left totally by these Institutions. Now, only the followers of Vinoba Bhabe are following it. Not a single office bearer of these Institutions chants Ramanama or reads Geeta or Upanisads. They have nothing to do with Brahmacharya. For last 10yrs Ramchandra Rahi and Amarnath are alleging each other for illicit relations with  their closest relatives i.e. in-laws and other family members, news of which were widely published in renowned newspapers of Varanasi and also the demonstrations have been held by public at Sarva Seva Sangh against them.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Late Mr. Ramamurthy was emphasizing that Gandhiji had told once that Indian culture is full of violence. When and where Gandhiji had said this, he never replied. He pleaded openly in favour of naxalite violence and other violent groups of communism. Charges were also made against him for corruption and other shameful activities. He tried his best along with his group to capture the government property of Gandhian Institute of studies Rajghat, Varansi and forged fake documents  of his being  the office bearer of the institute.  Ultimately  the honorable court held all his documents as forged and  all his claims as illegal. He openly lead the mob breaking the lock of the main gate of Gandhian Institute of Studies, Rajghat, Varanasi and when the police raided the gang lead by him, he approached to senior police officers to leave only him and left all his comrades to be beaten by the police in June 2003. Such a Gandhian Leader he was! He many times led the mob with stones and lock-breaking instruments, iron rods etc. attacking the institute and the Director’s bungalow. He captured illegally properties and houses at  Varanasi sarva  seva  sangh and at some places in Bihar. He remained very close to many violent communist groups  life long.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Ramamurthy was a college teacher of history at Queen’s college Varanasi. He came in touch with Jaypakash Narayan. When J.P. turned away from communism especially after the new inventions in the field of thermodynamics, he saluted finally to communism saying that “No moral society is possible or can be built upon the principles of dialectical materialism”. Then J.P. was inclined towards Indian Philosophy, spirituality and Gandhian thoughts. He worked with Vinoba Bhave. Later on he launched the total revolution movement. Comrades like Ramamurthy claimed that they have also changed and now they have faith in Indian philosophy and culture. But that was not true.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;They remain communists lifelong and associating with J.P., they infiltrated into the Gandhian Institutions and captured them gradually and finally. They deceived J.P. and they had no faith in Gandhi ji ever.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;In their leadership, these Gandhian institutions have become the centres of atheists and many types of anti-national elements. Occasionally the naxalite workers, the Muslim fundamentalist workers and other terrorist groups take shelters in these institutions which are normally looked upon as peace centre. The statements are issued by these so called Gandhians in favour of all type of violence, violent demonstrations, anti-state activities and the activities defaming the Indian nation. They often joined hands with all such groups and organize public meetings with them. Whenever their corruptions are caught red handed, they immediately raised bogey of R.S.S. and propagate that there is a conspiracy of R.S.S. behind the story of corruption.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Truthfulness and non-stealing has nothing to do with such Gandhians. For them non-violence is to be observed by the Hindus only. The Muslim, the Christian and communist violence are a sacred thing for them. They adore and glorify it as well as also plead in favour of it. For them spirituality is a phrase only. None of them has any philosophical depth, none of them observe any yoga practice or meditation, none of them have any faith in divine force or soul force and none of them believe in re-birth. Actually Mr. Amarnath Mishra emphatically says that Gandhiji committed a blunder when he said “I am a Sanatani Hindu”. According to Amarnath, Gandhiji was neither a Hindu nor a Muslim nor a Christian. He was the representative of the whole nation but Hindus have a special duty to observe non-violence. Muslims and Communists need not observe non-violence as their faith permits them violence. Amarnath is of the view that India is not of Hindus. Hindus have no special right over it but they have special duties towards the country. Muslims, Christians and Communists have no such special duties towards Indian Nation but they have a special right over it. When asked by me that whom do you (or other Gandhians like you) really represent he replied-“Only a selected few”. When again asked that “Why the whole nation should abide by the selected few individuals?” Are they some divine entity? Why should you not be disciplined by the Hindu Society? He couldn’t answer.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;For Gandhiji non-violence implied inner peace which comes with a sense of rootedness, knowing one’s own boundaries, but not excluding others, not fearing others, not seeing others as a threat of one’s security and identity but people like Amarnath, Ramamurthy, Rahi fear the Hindu Society and the Hindu organizations and exclude them from their notion of humanity. These people are not rooted in their society. Their sense of exclusion of Hindu organizations is a potential source of psychological violence. Their notion of humanity excludes the traditional religious Hindus. They never search their own minds which possesses such a deep sense of hatred, enmity and violence towards traditional Hindus. Thus, according to them only the Muslims, Christians, Communists and Secularists are the part of Indian humanity which means that more than 70% Indians are not the parts of Indian humanity as or their notions. They easily pass judgments on traditional Hindu Society but never apply the same criteria on their own organizations. They claim to be moralistic but they lack any real moral strength. They have become a poor fellow traveler of communism and are doing their best to ruin these institutions from within. Their sense of authority is not Gandhi, not the Gandhian thought but the opt repeated communist phraseology. They are full of lust and greed, fear and hatred and are engaged in such activities which are constantly breaking the nation. All these in the name of GANDHI. This is to avoid the normal legal actions against them that they have taken shelter under Gandhian cover but their whole conduct is anti-Gandhian.&lt;br /&gt;Director, Dharmapal Shodh Peeth, B-12, Akriti Garden, Bhopal&lt;br /&gt;E-Mail: prof.rameshwar@gmail.com, Cell: o9425602596&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-8576955203296944478?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/8576955203296944478/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=8576955203296944478' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/8576955203296944478'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/8576955203296944478'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/11/communist-infiltration-in-gandhian.html' title='COMMUNIST INFILTRATION IN GANDHIAN INSTITUTION: DANGERS AHEAD'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-2562826618745415476</id><published>2010-11-12T08:17:00.000-08:00</published><updated>2010-11-12T08:21:27.299-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='सोनिया'/><title type='text'>सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TN1pU3IzH_I/AAAAAAAAARU/6nLX-vIbDWo/s1600/India_Sonia_Gandhi_594490677_260024409.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 200px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TN1pU3IzH_I/AAAAAAAAARU/6nLX-vIbDWo/s320/India_Sonia_Gandhi_594490677_260024409.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5538698923854733298" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;अनिल सौमित्र &lt;br /&gt;एक बार फिर लोकतंत्र पर आपातकाल मंडरा पड़ा है. राजमाता सोनिया गांधी के सिपहसालारों ने कांग्रेसी गुण्डों, माफियाओं और लोकतंत्र के हत्यारों का आह्वान किया है कि वह देशभर में संघ कार्यालयों पर धावा बोल दे. इसका तत्काल प्रभाव हुआ और कांग्रेसी गुण्डों ने संघ के दिल्ली मुख्यालय पर धावा भी बोल दिया. ठीक वैसे ही जैसे इंदिरा गांधी की मौत के बाद सिखों को निशाना बनाया गया था. हिंसक और अलोकतातंत्रिक मानसिकता से ग्रस्त कांग्रेसी सोनिया का सच जानकर आखिर इस तरह बेकाबू क्यों हो रहे हैं?&lt;br /&gt;&lt;object width="640" height="390"&gt;&lt;param name="movie" value="http://www.youtube.com/v/3bWtCkTtCCE&amp;hl=en_US&amp;feature=player_embedded&amp;version=3"&gt;&lt;/param&gt;&lt;param name="allowFullScreen" value="true"&gt;&lt;/param&gt;&lt;param name="allowScriptAccess" value="always"&gt;&lt;/param&gt;&lt;embed src="http://www.youtube.com/v/3bWtCkTtCCE&amp;hl=en_US&amp;feature=player_embedded&amp;version=3" type="application/x-shockwave-flash" allowfullscreen="true" allowScriptAccess="always" width="640" height="390"&gt;&lt;/embed&gt;&lt;/object&gt;&lt;br /&gt;10 नवम्बर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देशभर में अनेक स्थानों पर धरना दिया। संघ सूत्रों के अनुसार यह धरना लगभग 700 से अधिक स्थानों पर हुआ। इनमें लगभग 10 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। हिन्दू विरोधी दुष्प्रचार की राजनीति के खिलाफ आयोजित इस धरने में संघ के छोट -बड़े सभी नेता-कार्यकताओं ने हिस्सा लिया। संघ प्रमुख मोहनराव भागवत लखनउ में तो संघ के पूर्व प्रमुख कुप्. सी. सुदर्शन भोपाल में धरने में बैठे। इसी धरने में मीडिया से बात करते हुए संघ के पूर्व प्रमुख ने यूपीए और कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के बारे में कुछ बातें कही। इसमें मोटे तौर पर तीन बातें थी - पहली यह कि सोनिया गांधी एंटोनिया सोनिया माइनो हैं। दूसरी यह कि सोनिया के जन्म के समय उनके पिता जेल में थे और तीसरी बात यह कि उनका संबंध विदेशी खुफिया एजेंसी से है और वे राजीव और इंदिरा की हत्या के बारे में जानती हैं। गौरतलब है कि ये तीनों बातें पहली बार नहीं कही गई हैं। जनता पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी सार्वजनिक रूप से कई बार इन बातों को बोल चुके हैं। गौर करने लायक बात यह है कि हिन्दू आतंक, भगवा आतंक का नारा बुलंद करने वाले और संघ की तुलना सिमी से करने वाले कांग्रेसी अपने नेता के बारे में कड़वी सच्चाई सुनकर बौखला क्यों गए? लोकतंत्र की दुहाई देने वाली पार्टी अपनी नेता के समर्थन में अलोकतांत्रिक क्यों हो गई? क्या कांग्रेस स्वभाव से ही फासिस्ट है?&lt;br /&gt;कांग्रेस के नेता सुदर्शन के बयान की भाषा पर विरोध जता रहे हैं। लेकिन उनकी कही बातों पर नहीं। भाषा चाहे जैसी भी हो, लेकिन कांग्रेस को मालूम है कि उसके नहले पर संघ का दहला पड़ गया है। कांग्रेस के नेता ने भी तो संघ की तुलना आतंकी संगठन सिमी से की थी। उसी कांग्रेस के नेताओं ने भगवा आतंक और हिन्दू आतंकवादी कह कर संघ को लांछित किया था। यह जरूर है कि कांग्रेस के हाथ में केन्द्रीय सत्ता की बागडोर है। संघ के हाथ में ऐसी कोई सत्ता नहीं है। कांग्रेस के बड़े नेता और केन्द्र सरकार में कांग्रेस के मंत्री चाहे तो जांच एजेंसियों और पुलिस को इशारा कर सकते हैं। उनके एक इशारे पर जांच की दिशा तय हो सकती है। आईबी, सीबीआई और अब एटीएस को ऐसे इशारे कांग्रेसी नेता-मंत्री करते रहे हैं। जैसे गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने पुलिस प्रमुखों की बैठक में भगवा आतंक का सिद्धांत गढ़ने की कोशिश की, जैसे दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से चर्चा में संघ पर आईएसआई से पैसा लेने का आरोप लगा दिया, जैसे किसी लेखक ने पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी पर सीआईए से पैसा लेने का उल्लेख किया ठीक वैसे ही सुदर्शन ने कांग्रेस प्रमुख सोनिया के बारे में कुछ रहस्योद्घाटन कर दिया। कांग्रेस सड़कों पर क्यों उतर रही है? क्यों नहीं सुदर्शन के रहस्योद्घाटन की जांच करवा लेती? देश के सामने सोनिया का सच आना ही चाहिए। अगर सुदर्शन झूठे होंगे तो वे या फिर सोनिया बेनकाब हो जायेंगी। लेकिन कांग्रेस माता सोनिया के खिलाफ कांग्रेसी कुछ सुन नहीं सकते, कुछ भी नहीं।  &lt;br /&gt;कांग्रेस आदर्श घोटाले, कॉमनवेल्थ घोटाले, स्पेक्ट्रम घोटाले, कश्मीर, अयोध्या, नक्सलवाद और हिन्दू-भगवा आतंक के सवाल पर बुरी तरह घिर चुकी है। कर्नाटक में उसका खेल बिगड़ चुका है। बिहार चुनाव में उसकी हालत बिगड़ने वाली है। ऐसे में संघ का देशव्यापी आन्दोलन और जन-जागरण्, कांग्रेस के नाक में दम करने वाला है। संघ काफी समय बाद सड़कों पर आया है। कांग्रेस का घबराना स्वाभाविक है। कांग्रेसियों को सड़कों पर लाने और संघ के मुद्दे को दिग्भ्रमित करने का इससे अच्छा मौका और कोई नहीं हो सकता। इसलिए सोनिया माता के अपमान के नाम पर कांग्रेसियों को सड़कों पर उताने की तैयारी हो गई। इस तैयारी की भी संघ ने हवा निकाल दी। सुदर्शन के बयान को संघ की बजाए उनका व्यक्तिगत बयान कह कर संघ ने कांग्रेसी विरोध पर पानी फेर दिया। &lt;br /&gt;हालांकि आज नही तो कल सोनिया गांधी पर उठे सवाल का जवाब तो कांग्रेस को ढूंढना ही होगा। कांग्रेस चाहे न चाहे, उसे देश को यह बताना ही होगा कि सोनिया, एंटोनिया सोनिया माइनो है कि नहीं? वे एक बिल्डिंग कांट्रेक्टर स्टीफेनो माइनो की पुत्री है कि नहीं? माइनों एक रूढ़िवादी कैथोलिक परिवार से है कि नहीं? सोनिया के पिता इटली के फासिस्ट तानाशाह बेनिटो मुसोलिनी के प्रशंसक थे कि नही? क्या सोनिया पर अपने पिता का प्रभाव नहीं था? माइनों ने दूसरे विश्व युद्ध में रूसी मोर्चे पर नाजियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। लेखक व स्तंभकार ए.सूर्यप्रकाश द्वारा संपादित पुस्तक ‘सोनिया का सच’ में यह उद्धृत है कि सन् 1977 में, जब एक भारतीय पत्रकार जावेद लैक ने देखा कि श्री माइनो के ड्राइंगरूम में मुसोलिनी के सिद्धांतों का संग्रह था और उन्होंने अच्छे पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने लैक को बताया कि नव-फासिस्टों को छोड़कर लोकतांत्रिक इटली में किसी अन्य राजनीतिक दल के लिए उनके मन में कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने भारतीय पत्रकार को कहा कि ये सभी दल ‘देशद्राही’ हैं। कांग्रेस के नेताओं को यह भी बताना चाहिए कि क्या सोनिया माइनो का राजनैतिक संस्कार ऐसे ही वातावरण में नहीं हुआ था?&lt;br /&gt;किसी की भाषा, मर्यादा, संस्कृति, और शैली पर आक्षेप करने के साथ ही कांग्रेस को देश की जनता के सामने यह सच भी रखने का प्रयास करना चाहिए कि सोनिया माइनो ने राजीव गांधी से विवाह के पूरे पन्द्रह वर्ष बाद 7 अप्रैल, 1983 को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया। आखिर भारतीय नागरिकता के प्रति वे इतने संशय में क्यों रही? कांग्रेस के नेता कांग्रेस माता के प्रति भले ही सिजदा करें, लेकिन वे देश को यह भी बतायें कि सोनिया अपने विवाह के पन्द्रह वर्ष तक अपनी इटालियन नागरिकता के साथ रही, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से वह भारत में मतदान का अधिकार प्राप्त करने के लिए उत्सुक थीं। वे जनवरी, 1980 में ही नई दिल्ली की मतदाता सूची में कैसे शामिल हो गई? जब किसी ने इस धोखाधड़ी को पकड़ लिया और मुख्य निर्वाचक अधिकारी को शिकायत कर दी तब 1982 में उनका नाम मतदाता सूची से निकाला गया। 1 जनवरी, 1983 को वे बिना भारतीय नागरिकता के ही भारत के मतदाता सूची में शामिल हो गई। किसी भी सभ्य, सुसंस्कृत, मर्यादित और कांग्रेसी शैली में कांग्रेस का कोई नेता यह सब देश के सामने क्यों नहीं रखता?&lt;br /&gt;जाने-अंजाने ही सही, असामयिक ही सही लेकिन सुदर्शन ने कांग्रेस की दुखती रग पर चिकोटी काट ली है। सघ भले ही आहत हिन्दुओं को लामबंद करने, अयोध्या, कश्मीर और कांग्रेसी आदर्श भ्रष्टाचार के आगे ‘सोनिया के सच’ को नजरअंदाज कर दे, लेकिन आज नहीं तो कल उसे ही घांदी, नेहरू, माइनो और ‘बियेन्का-रॉल’ परिवार के सच को सामने तो रखना ही होगा। देश के पूर्व प्रधानमंत्री, भावी प्रधानमंत्री और श्यूडो प्रधानमंत्री के परिवार-खानदान के बारे में जानने-समझने का हक हर भारतीय का है। राजीव गांधी के नाना-नानी के साथ उनके दादा-दादी के बारे में देश को मालूम होना चाहिए। देश अपने जैसे भावी प्रधानमंत्री राहुल-प्रियंका (बियेन्का-रॉल) के दादा-दादी की तरह उनके नाना-नानी के बारे में भी कैसे अंजान रह सकता है। आखिर इस परिवार-खानदान, नाते-रिश्तेदारे के धर्म-पंथ बार-बार बदलते क्यों रहे हैं?&lt;br /&gt;कांग्रेसी भले ही संघ-सुदर्शन का पुतला फूंके, लेकिन जिनके सामने वे सिजदा करते हैं उनके बारे में अपना ज्ञान जरूर दुरूस्त कर लें। संजय गांधी, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, माधवराव सिंधिया, राजेश पायलट सिर्फ कांग्रेस के ही नेता, बिल्क देश के भी नेता थे। एक-एक कर कौंग्रेस के सभी होनहार नेताओ की हत्या या सन्देहास्पद मृत्यु हो गई. किसी प्रकार की जांच नही हुई. एलटीटीई ने राजीव गांधी की हत्या की। दक्षिण की राजनेतिक पार्टियां एमडीएमके, पीएमके और डीएमके लिट्टे समर्थक रहे हैं, आज भी हैं. लेकिन हत्यारों के समर्थकों के साथ कांग्रेस का कैसा संबंध है? कांग्रेस जवाब दे, न दे, देश तो सवाल पूछेगा ही कि जब इंदिरा को गोली लगी तो उनके साथ और कौन-कौन था, किसी एक को भी, एक भी गोली क्यों नहीं लगी? घायल अवस्था में देश की प्रधानमंत्री इंदिराजी को पास के अस्पताल की बजाए इतना दूर क्यों ले जाया गया कि तब तक उनके प्राण-पखेरू ही उड़ गए? इन सब स्थितियों में महफूज और दिन-दूनी रात चैगुनी वृद्धि किसकी हुई, सिर्फ और सिर्फ सोनिया की! कौन भारतीय है जसे संदेश नहीं होगा! कांग्रेसी भी अगर अंधभक्ति छोड़ भारतीय बनकर देखें तो उन्हें भी सुदर्शन के सवालों में कुछ राज नजर आयेगा। वैसे भी सुदर्शन ने कुछ नया नहीं कहा है, बस जुबान अलग है, बातें वहीं है जो कभी एस गुरूमूर्ति ने कही, कई बार सुब्रमण्यम स्वामी ने लिखा-कहा और पत्रकार कंचन गुप्ता ने लिखा। आज तक कांग्रेस ने किसी प्रकार के मानहानि का आरोप नहीं लगाया, कभी सड़कों पर नहीं उतरे। कांगेस कभी तो हंगामे की बजाए सवालों का जवाब दे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-2562826618745415476?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/2562826618745415476/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=2562826618745415476' title='3 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/2562826618745415476'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/2562826618745415476'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/11/blog-post_12.html' title='सोनिया का सच जान बेकाबू क्यों होते हो?'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TN1pU3IzH_I/AAAAAAAAARU/6nLX-vIbDWo/s72-c/India_Sonia_Gandhi_594490677_260024409.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-8933345639808793869</id><published>2010-11-11T01:06:00.001-08:00</published><updated>2010-11-11T01:12:14.751-08:00</updated><title type='text'>अपने गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए गुनाहगारों ने संतों के उपर उंगली उठाई है : पूर्व सांसद आरिफ बेग</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TNuyl6OSL9I/AAAAAAAAARM/FfQxAaB4MlE/s1600/DSCF7277.JPG"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 240px;" src="http://3.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TNuyl6OSL9I/AAAAAAAAARM/FfQxAaB4MlE/s320/DSCF7277.JPG" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5538216531136229330" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;संघ के धरने में उमड़ा विशाल जन समूह&lt;br /&gt;    भोपाल। यूपीए सरकार के हिंदू विरोधी दुष्प्रचार के खिलाफ संघ के आह्वान पर देशभर में धरने का आयोजन किया गया। भोपाल सहित मध्यप्रदेश के सभी जिला केन्द्रों और कुछ तहसीलों में भी धरने का आयोजन किया गया। इस धरने में सभी स्थानों पर आम लोगों ने भी काफी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भोपाल में दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक धरने का आयोजन था।&lt;br /&gt;इस अवसर पर निर्वतमान सरसंघचालक श्री कुप्प सी सुदर्शन ने दीप प्रज्जवलित कर धरने की शुरूआत की। लगभग 10 हजार से अधिक लोग उपस्थित हुए। इस धरने में मुसलमानों ने भी काफी तादाद में भागीदारी की। धरने में वृद्धों, युवाओं और महिलाओं समेत सभी आयु वर्ग के लोगों ने अपना समर्थन खुलकर संघ के पक्ष में दिया।&lt;br /&gt;वक्ताओं ने केंद्र और कांग्रेस की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह प्रशासनिक तंत्र का दुरूपयोग संघ एवं अन्य हिन्दू संगठनों तथा संतों के खलाफ खुलकर कर प्रयोग कर रही है। संघ के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख नरेंद्र जैन ने कहा कि धरना, प्रदर्शन और भाषण संघ का मूल काम नहीं है। संघ तो देश और समाज को संस्कारित कर जागृत करने में लगा है। संघ व्यक्ति-निर्माण कर देश को परम वैभव तक पहुंचाने के लिए कृत संकल्पित है। लेकिन जब राष्ट्र की भावना को आहत कर ’भगवा आतंक’ और ’हिंदू आतंक’ के नाम पर देश की आत्मा पर हमला किया गया तब संघ ने सड़क पर उतर कर इसका प्रतिकार करने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि 1947 में जब देश आजाद हुआ तब सोचा गया था कि देश अपनी जड़ों की ओर लौटेगा, लेकिन चंद महीनों में ही लोगों के हाथ निराशा ही हाथ लगी। जब राष्ट्रगान की बात आई तो देश की आत्मा और आजादी के गान वंदेमातरम को लेकर विरोध किया गया। यह सब काम वह लोग कर रहे थे जिनकी आस्था देश में नहीं बल्कि मास्को और चीन पर है। आज जब संघ देश की एकात्माकता केे सूत्र में बांधने का काम कर रहा है तब उसका मनोबल तोड़ने के लिए बदनाम किया जा रहा है।&lt;br /&gt;    इस अवसर पर पूर्व सांसद आरिफ बेग ने कहा कि मैने इंद्रेश जी के साथ काम किया है। मैं जिस इंद्रेश कुमार को जानता हूं वह उस कश्मीर में बिना सुरक्षा के अकेले ही घूमते हैं जहां बहन सोनिया और प्रधानमंत्री सुरक्षा बलों के साथ जाने से भी कतराते हैं। वहां पर इंदे्रश कुमार मुसलमानों के घर बिना किसी सुरक्षा निवास करते हैं और खाना खाते हैं। उन्होंने कहा कि श्री सुदर्शन जी के नेतृत्व में संघ ने मुसलमानों को राष्ट्रीय धारा से जोड़ने का काम किया गया। आज करोड़ों मुसलमान अपने वतन की मिट्टी से जुड़ गए हैं। इससे घबराए कांग्रेसियों ने अपने वोट बैंक को बनाए रखने का प्लान बर्बाद होते देख संघ और इंदे्रश कुमार को बदनाम करने की साजिश रची है। उन्हांेने कहा कि अपने गुनाहोंे पर पर्दा डालने के लिए गुनाहगारों ने संतों के उपर उंगली उठाई है। लेकिन उनका बाल भी बांका नहीं होगा। वसुधैव कुटुंबकम का संदेश देने वाली संस्कृति को बदनाम करने की यह कोशिश बेनाकाब होगी। उन्होंने कहा कि हमारी पूजा पद्धति अलग-अलग हो सकती है, लेकिन सबका मालिक एक है। हम हिंदुस्थान का गौरव फिर स्थापित करके रहेंगे।&lt;br /&gt;    गायत्री परिवार के डॉ शंकरलाल पाटीदार ने इस मौके पर कहा कि दुनिया में हिंदुत्व जैसा कोई दूसरा विचार नहीं है। हम सब एक जुट होकर देश की अस्मिता और गौरव के लिए काम करते रहेंगे। इस अवसर पर भारतीय किसान संघ के महामंत्री प्रभाकर केलकर ने कहा कि यह धरना केवल संघ पर लगे आरोपों के लिए नहींं बल्कि हिंदूत्व को कलंकित करने के लिए रचे गए षड़यंत्र के खिलाफ है।&lt;br /&gt;    धरने को संबोधित करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा ने कहा कि मैं यहां पर स्वयंसेवक के नाते आया हूं, क्योंकि भारत की आत्मा पर हमला किया गया है। विचारधारा को समाप्त करने के लिए आतंकवादियों का साथ सरकार ले रही है। उन्होंने कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करते हएु कहा कि विचारधारा की लड़ाई लडे़ लेकिन झूठे आरोप नहीं लगाए। कुछ छोटी मोटी घटनाओं से हमें दबाने की कोशिश की जा रही है। इससे हम दबने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि संघ देश और समाज की बढ़ती शक्ति है, संघ वंदेमातरम् है। संघ इस देश का प्राण है।&lt;br /&gt;श्री प्रभात झा, मा. शशिभाई सेठ, श्री प्रभाकर केलकर, श्री आरिफ बेग सहित सभी वक्ताओं ने मंच से यूपीए सरकार को ललकारते हुये कहा कि यह धरना एक चेतावनी है। इस अवसर पर संघ के प्रांत संघचालक शशि भाई सेठ ने सरकार्यवाह भैयाजी जोशी का वक्तव्य पढ़ा।&lt;br /&gt;    धरने में निर्वतमान सरसंघचालक कुप्प सी सुदर्शन जी, क्षेत्र प्रचारक विनोद कुमार, क्षेत्र प्रचार प्रमुख नरेंद्र जैन, पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा, पूर्व सांसद कैलाश नारायण सारंग, भाजपा सह संगठन मंत्री भगवत शरण माथुर, भोपाल की महापौर कृष्णा गौर, प्रदेश महिला मार्चा की अध्यक्षा नीता पटैरिया, उपाध्यक्ष साधना सिंह, प्रांत संघचालक शशि भाई सेठ, प्रांत कार्यवाह अशोक अग्रवाल, सह प्रांत कार्यवाह हेमंत मुक्ति बोध, किसान संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री प्रभाकर केलकर, विहिप के प्रांत संगठननमंत्री रोहित भाई, सांसद अनिल माधव दवे, विभाग संघचालक कांतिलाल चतर भी उपस्थित हुए।&lt;br /&gt;    मध्यप्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार के धरने आयोजित हुए। इंदौर में आयोजित धरने को मालवा प्रांत के संघचालक कृष्ण कुमार आष्ठाना और प्रांत प्रचारक पराग अभ्यंकर ने धरने को संबोधित किया। इसी प्रकार ग्वालियर में आयोजित धरने को मध्यक्षेत्र के संघचालक श्रीकृष्ण माहेश्वरी ने संबोधित किया। धरने को ग्वालियर जिला भाजपा अध्यक्ष वेदप्रकाश शर्मा और पूर्व विभाग संघचालक वैद्यनाथ शर्मा ने भी संबोधित किया। प्रदेशभर में आयोजित धरने में लाखों की संख्या में लोगों ने भागीदारी कर केन्द्र की कांग्रेसनी यूपीए सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देश का अब और बंटवारा स्वीकार नहीं : माहेश्वरी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भोपाल। केन्द्र की कांग्रेसनीत यूपीए सरकार अपनी नाकामी छिपाने और जनता का ध्यान मूल समस्याओं से बंटाने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को बदनाम करने का दुष्प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यक्षेत्र संघचालक श्रीकृष्ण माहेश्री ने भोपाल में पत्रकारों  से यह बात कही। श्री माहेश्वरी ने देशभर में आयोजित होने वाले धरने के दो दिन पहले पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि वर्तमान केन्द्र सरकार के रवैये से देश एक और बंटवारे की ओर अग्रसर हो रहा है। लेकिन संघ इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं करेगा। कश्मीर में जिस तरह के हालात हैं, वहां के लिए स्वायत्ता की मांग की जा रही है, यह एक और बंटवारे की तैयारी है। वहां की राज्य सरकार भी केन्द्र की शह पर अलगाववादियों का साथ दे रही है। उन्होंने कहा कि 1947 में जब देश का बंटवारा हुआ तब संघ की ताकत कम थी। लेकिन अब संघ देश का दूसरा बंटवारा होने नहीं देगा। संघ इस प्रकार के किसी प्रयास का पुरजोर विरोध करेगा। विरोध के स्वरूप के बारे में श्री माहेश्वरी ने कहा कि संघ किसी प्रकार की हिंसा में विश्वास नहीं करता। संघ का विश्वास देश की जनशक्ति में है।&lt;br /&gt;संघ के क्षेत्र. संघचालक ने केन्द्र सरकार पर अपनी नाकामी छिपाने के लिए हिन्ुदओं और संघ को बदनाम किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वोट की राजनीति के कारण ऐसा किया जा रहा है। देश के कुछ हिस्सों में बम विस्फोट में संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता इन्द्रेश कुमार का नाम एक राजनैतिक षड्यंत्र के तहत जोड़ा गया है। एटीएस बिना किसी सबूत के संघ और संघ कार्यकर्ताओं का नाम घसीट रही है। यह सब कांग्रेस के इशारे पर हो रहा है।&lt;br /&gt;श्री माहेश्वरी ने कहा कि आतंकवाद के नाम पर संघ और हिन्दुओं को बदनाम की सरकारी साजिश को अब सहन नहीं किया जायेगा। देश विरोधी, हिन्दुत्व विरोधी और संघ विरोधी ताकतों का हर स्तर पर मुकाबला किया जायेगा, मैदान में उतर कर इसका मुंहतोड़ जवाब दिया जायेगा।&lt;br /&gt;श्री माहेश्वरी ने कहा कि हिन्दू पद भगवा आतंकवाद का आरोप, हिन्दू संगठनों व संतों पर लांछन और हाल में संघ व उसके कार्यकर्ताओं को देश में कुछ स्थानों पर घसीअना हिन्दू विरोधी राजनीति ही है। इन षड्यंत्रों के खिलाफ देशभर में बड़े पैमाने पर जन-जागरण किया जायेगा। संघ की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक में भाग लेकर लौटने के बाद श्री माहेश्वरी बैठक के निर्णयों से अवगत कराते हुए कहा कि हिन्दू समाज कि विरुद्ध हो रहे षड्यंत्र के खिलाफ स्वयंसेवक सड़कों पद उतरकर जन-जागरण और विरोध प्रदर्शन करेंगें। श्री माहेश्वरी ने राजस्ािान की कोंग्रेस सरकार द्वारा संघ के केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य इन्देश कुमार के खिलाफ लगाये गए सभी आरोप निराधार हैं। राजस्थान एटीएस के आरोप पत्र से ही साफ जाहिर होता है कि इन्द्रेश के खिलाफ न तो कोई आरोप है और न ही उन्हें आरोपी बनाया गया है। जांच के दौरान राजस्थान एटीएस ने पिछले महीनों में एक बार भी बातचीत नहीं की। संघ राजस्थान एटीएस से तीन बार आग्रह कर चुका है कि इंदे्रश कुमार को कब उनके पास भेजा जाए। लेकिन एटीएस ने अभी संघ को जवाब नहीं दिया है। इन्द्रेश कुमार के खिलाफ आजतक कोई सबूत भी पेश नहीं किया गया है। इसके बावजूद कांग्रेस सरकार बार-बार संघ और इंदे्रश कुमार का नाम घसीट रही है।  श्री माहेश्वरी ने कहा कि संघ और उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ राजनैतिक साजिश के तहत किए जा रहे दुष्प्रचार को संघ न्यायालय समेत सभी मंचों पर चुनौती देगा। श्री माहेश्वरी ने ग्वालियर में पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-8933345639808793869?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/8933345639808793869/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=8933345639808793869' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/8933345639808793869'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/8933345639808793869'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/11/blog-post_11.html' title='अपने गुनाहों पर पर्दा डालने के लिए गुनाहगारों ने संतों के उपर उंगली उठाई है : पूर्व सांसद आरिफ बेग'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TNuyl6OSL9I/AAAAAAAAARM/FfQxAaB4MlE/s72-c/DSCF7277.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-9093663887968852688</id><published>2010-11-09T03:00:00.000-08:00</published><updated>2010-11-09T03:05:04.419-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आतंकवाद'/><title type='text'></title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TNkqQwaJpSI/AAAAAAAAARE/2WkJiu1E_6s/s1600/Cover%2B1.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 250px; height: 320px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TNkqQwaJpSI/AAAAAAAAARE/2WkJiu1E_6s/s320/Cover%2B1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5537503684189594914" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"आतंकवाद का रंग और मीडिया" &lt;br /&gt;पर एक समसामयिक और वैचारिक संकलन .&lt;br /&gt;आपके लिये भी उपयोगी होगा. सम्पर्क किजिये&lt;br /&gt;अनिल सौमित्र&lt;br /&gt;9425008648&lt;br /&gt;0755-2765472&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-9093663887968852688?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/9093663887968852688/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=9093663887968852688' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/9093663887968852688'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/9093663887968852688'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/11/blog-post.html' title=''/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TNkqQwaJpSI/AAAAAAAAARE/2WkJiu1E_6s/s72-c/Cover%2B1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-3677986088079358490</id><published>2010-11-04T04:11:00.000-07:00</published><updated>2010-11-04T04:13:26.608-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='संघ'/><title type='text'>हिन्दू विरोधी दुष्प्रचार की राजनीति के विरूद्ध भोपाल मे 10 नवंबर को विशाल धरना</title><content type='html'>राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत संघचालक श्री शशिभाई शेठ की प्रेस विज्ञप्ति&lt;br /&gt;हिन्दू विरोधी दुष्प्रचार की विद्वेषपूर्ण राजनीति के विरूद्ध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के देशव्यापी धरने के कार्यक्रम के तहत मध्यभारत प्रांत में भी प्रत्येक जिला केन्द्र पर 10 नवंबर को धरना दिया जाएगा। संघ के मध्यभारत प्रंात संघचालक श्री शशिभाई शेठ ने आज एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी है। श्री शेठ ने कहा है कि विगत कुछ वर्षों से लगातार कतिपय राजनीतिक दलों और पंथनिरपेक्षता की गलत और मनमानी व्याख्या करने वाले निहित स्वार्थी तत्वों द्वारा वोट बैंक की राजनीति के तहत हिन्दू संतों, संगठनों और हिन्दू समाज की छवि खराब करने का षडयंत्र किया जा रहा है। केन्द्र सरकार में तथा अनेक राजनीतिक दलों में मौजूद कुछ व्यक्तियों द्वारा ‘भगवा‘ या ‘हिन्दू आतंकवाद‘ की दुर्भावनापूर्ण चर्चा छेड कर हिन्दू संगठनों, साधु-संतों व मंदिरों को लंाछित करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक पर लगाये जा रहे सारे आरोप उसी व्यापक षडयंत्र का हिस्सा है। श्री शेठ ने कहा कि इन सारे षडयंत्रों से न केवल संघ के स्वयंसेवक बल्कि सारी हिन्दुत्व निष्ठ सात्विक शक्तियंा आहत, अपमानित और आक्रोशित हैं। हिन्दू समाज की इन्हीं भावनाओं को प्रदर्शित करने के लिए सारे देश की तरह मध्यभारत प्रांत के जिला केन्द्रों पर भी 10 नवंबर को धरनों का आयोजन किया जाएगा । श्री शेठ ने कहा कि भोपाल में लिली टॉकीज के समीप दोपहर 12 से 02 बजे तक संघ द्वारा धरना दिया जाएगा जिसमें संघ के स्वयंसेवक और संघ हितैषी सम्मिलित होंगे। प्रंात संघचालक श्री शेठ ने हिन्दू समाज से आव्हान किया है कि हिन्दू समाज की छवि खराब करने के इस व्यापक षडयंत्र के विरूद्ध वह जाग्रत हो तथा धरने में शामिल हो कर अपनी भावनाओं को प्रदर्शित करे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-3677986088079358490?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/3677986088079358490/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=3677986088079358490' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/3677986088079358490'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/3677986088079358490'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/11/10.html' title='हिन्दू विरोधी दुष्प्रचार की राजनीति के विरूद्ध भोपाल मे 10 नवंबर को विशाल धरना'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-4367160864919291763</id><published>2010-10-31T01:12:00.000-07:00</published><updated>2010-10-31T01:13:57.979-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='इन्द्रेश'/><title type='text'>मुसलमानों की संवाद रचना बनी कांग्रेस की आंख की किरकिरी</title><content type='html'>-डॉ. कुलदीपचंद अग्निहोत्री&lt;br /&gt;केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने संघ को बदनाम करने की अभियान को अपनी कार्यसूची में प्राथमिक स्थान दे दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक और कांग्रेस की विचार भिन्नता जगजाहिर है। कांग्रेस भारत का सांस्कृतिक और आर्थिक विकास ब्रिटिश शासकों द्वारा निर्धारित कारकों और मानदण्डों के आधार पर करना चाहती है जबकि संघ इस देश की सांस्कृतिक विरासत, अस्मिता, स्वभाव, प्रकृति के अनुसार देश को आगे ले जाना चाहती है। कांग्रेस के वैचरिक मॉडल का सबसे बडा नुकसान यह है इससे देश तरक्की तो कर सकता है लेनिक उसी पहचान मिट जाएगी। डॉ. मोहम्मद इकबाल जिस यूनान, मिस्र, और रोम के मिटने की बात कह रहे हैं उसमें हिन्दुस्थान का नाम भी जुड जाएगा। संघ के वैचारिक मॉडल की खूबसूरती यह है कि इससे देश में विकास भी होगा और उसकी पहचान भी कायम रहेगी। साम्यवादी टोला कांग्रेस के आर्थिक मॉडल से तो असहमत है लेकिन सांस्कृतिक क्षेत्र में कांग्रेस के वैचारिक मॉडल को ही वह सर्वश्रेष्ठ मानता है। इसमें कहीं न कहीं भीतर से कांग्रेस एवं साम्यवादी आपस में जुडे रहते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस पृष्ठभूमि में मुसलमान या इस्लामपंथी विवाद का मुद्दा बन जाते हैं। कांग्रेस एवं साम्यवादियों की दृष्टि में इस देश के मुसलमान एक अलग राष्टृ है, इसलिए उनको सावधानीपूर्वक इस देश की छूत से बचाना यह टोला जरुरी मानता है। साम्यवादी यह बात खुलकर कहते हैं और कांग्रेस इसे अपने व्यवहार से सिद्ध करती है। इस वैचारिक अवधारणा के आधार पर ये दोनों देश के मुसलमानों को अलग-थलग करके स्वयं को उनके रक्षक की भूमिका में उपस्थित करते हैं। जाहिर है इस भूमिका में रहने पर दम्भ भी आएगा। अतः ये दोनों दल मुसलमानों के तुष्टीकरण की ओर चल पडते हैं। चूंकि इस देश में लोकतांत्रिक प्रणाली है इसलिए मुसलमानों को यदि बहुसंख्यक भारतीयों में डराए रखा जाएगा जो जाहिर है कि वे अपने वोट भी एकमुश्त उन्हीं की झोली में डालेंगे। अब लोकतांत्रिक में प्रणाली ज्यों-ज्यों सत्ता के दावेदार बढ रहे है त्यो-त्यों मुसलमानों के रक्षक होने का दावा करने वालों की संख्या भी बढती जा रही है। लालू यादव, मुलायम सिह यादव और रामविलास पासवानों का इस क्षेत्र में प्रवेश ‘लेटर स्टेज’ पर हुआ है। परन्तु जो देर से आएगा वो यकीनन हो हल्ला ज्यादा मचाएगा। इसलिए मुसलमानों की रक्षा करने के लिए इन देर से आए रक्षकों के तेवर भी उतने ही तीखे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इधर जब पिछल पाचं -छह दशकों में दन सभी ने मुसलमानों के दिमान में यह डाल दिया है कि मामला सिर्फ उनकी रक्षा का है और बाकी चीजें तो गौण है तो उनमें से भी कुछ संगठन उठ आए हैं जिन्होंने यह कहना शुरु कर दिया है अब हमें बाहरी रक्षकों की जरुरत नहीं है हम अपनी रक्षा खुद कर सकते हैं। सुरक्षा का काल्पनिक भय कांग्रेस एवं कम्युनिस्टों ने मुसलमानों के मन में बैठा दिया था और सत्ता में भागीदारी का आसान रास्ता देखकर इन मुस्लिम संगठनों ने भी हाथ में हथियार उठा लिए। यह तक सब ठीक-ठाक चल रहा था केवल मुस्लिम वोटों पर छापेमारी का प्रश्न था जिसके हिस्से जितना आ जाय उतना ही सही।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस मोड पर ‘स्क्रिप्ट ’ में अचानक कुछ गडबड होने लगी। कांग्रेस एवं कम्युनिस्ट जिन लोगों से मुसलमानों को डरा रहे थे उन्ही लोगों ने मुसलमानों से बिना दलालों एवं एजेंटों की सदस्यता से सीघे -सीधे संवाद रचना शुरु कर दी। 1975 की आपात स्थिति में राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ और मुसलमानों के बीच जो संवाद रचना नेताओं के स्तर पर प्रारम्भ हुई थी उसे इक्कीसवीं शताब्दी के शुरु में संघ के एक प्रचारक इन्द्रेश कुमार आम मुसलमान तक खीचं ले गए। ऐस एक प्रयास कभी महात्मा गांधी ने किया था लेकिन वह प्रयास खिलाफत के माध्यम से हुआ था जो वस्तुतः इस देश के मुसलमानों की राष्ट्रीय भावना को कही न कही खण्डित करता था। इसलिए इसका असफल होना निश्चित ही था।जो इक्का -दुक्का प्रयास दूसरे प्रयास हुए लेकिन उनका उद्देश्य तात्कालिक लाभों के लिए तुष्टीकरण ही ज्यादा था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इन्द्रेश कुमार ने संघ के धरातल पर मुसलमानों से जो संवाद रचना प्रारम्भ की उसका उद्देश्य न तो राजनीतिक था औैर न ही तात्कालिक लाभ उठाना। चूंकि राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ को चुनाव नही लडना था। इन्द्रेश कुमार की संवाद रचना से जो हिन्दू मुसलमानों का व्यास आसन निर्मित हुआ। वह इसे देश का वही सांस्कृतिक आसन है जिसके कारण लाखों सालों से इस देश की पहचान बनी हुई है। इस संवाद रचना में स्वयं मुसलमानों ने आगे आकर कहना शुरु किया कि हमारे पुरखे हिंदू थे और उकनी जो सांस्कृतिक थाती थी वही सांस्कृतिक थाती हमारी भी है। इन संवाद रचनाओं में इन्द्रेश कुमार का एका वाक्य बहुत प्रसिद्ध हुआ कि हम ‘सिजदा तो मक्का की ओर करेंगे लेकिन गर्दन कटेगी तो भारत के लिए कटेगी। देखते ही देखते इस संवाद की अंतर्लहरें देश भर में फैली और मुसलमानों की युवा पीढी में एक नई सुगबुगाहट प्रारम्भ हो गयी। वे धीरे -धीरे उस चहारदीवारी से निकलकर जिस उनके तथाकथित रक्षकों ने पिछले 60 सालों से यत्नपूर्वक निर्मित किया था, खुली हवा में सांस लेने के लिए आने लगे। इन्द्रेश कुमार की मुसलमानों से इसे संवाद रचना ने देखते ही देखते ‘ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ का आकार ग्रहण कर लिया जाहिर है मुसलमानों के भीतर संघ की इस पहल से कांग्रेसी खेमे एवं साम्यवादी टोले में हडबडी मचती। जिसे संघ के बारे में आज तक मुसलमानों को यह कहकर डराया जाता रहा कि उनको सबसे ज्यादा खतरा संघ से है उस संघ को लेकर मुसलमानों का भ्रम छंटने लगा। यह स्पष्ट होने लगा कि संघ मुसलमानों के खिलाफ नहीं है । संघ भारत की इस विशेषता में पूर्ण विश्वास रचना है कि ईश्वर की पूजा करने के हजारों तरीके हो सकते हैं और वास्तव में संघ इसी विचार की आगे बढाना चाहता है जब संघ ईश्वर या अल्लाह के हजारों तरीक में विश्वास करते है तो उसे कुछ लोगों द्वारा इस्लामी तरीके से ईश्वर की पूजा के तरीके से भला कैसे ऐतराज हो सकता था। संघ को लेकर मुसलमानों के भीतर कोहरा छंटने की प्रारम्भिक प्रक्रिया शुरु हो गयी है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस मरहले पर कांग्रेस ने अपनी रणनीति बडी होशियारी से तय की। मालेगांव, हैदराबाद और अजमेर बम विस्फोट में सरकार ने कुछ तथाकथित षडयंत्रकारियों को गिरफ्तार किया इनमें जिन लोगों के नाम शामिल है उनमें से कुछ का सम्बंध कभी संघ से भी रहा होगा। उनका अपराध है या नहीं है इसका निर्णरूा तो अदालत ही करेगी लेकिन सराकार को लगता था कि जैसे ही इन तथाकथित लोगों की जांच होगी तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इन लोगों के पीछे हो हल्ला मचाएगा लेकिन कांग्रेस का यह षडयंत्र तब विफल हो गया जब राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ ने कहा कि सरकार को इस मामले की सफाई से जांच करनी चाहिए औश्र जो भी दोषी जाया जाए उसे दण्ड मिलना चाहिए। संघ ने आधिकारिक रुप से यह भी कहा िकवह जांच एजेंसियों को संगठन का पूरा सहयोग मिलेगा। संघ स्वयं चाहता है कि अपराधी पकडे जाएं और उन्हें सजा मिले। संघ को बदनाम करने का कांग्रेस का सारा षडयंत्र एक झटके में ही विफल हो गया। सरकार एक तीर से दो निशाने करना चाहती थी। वह मुसलमानों को यह संदेश देना चाहती थी कि आतंकवाद को लेकर मुस्लिम समाज जिस कटघरो में खडा दिखायी देता है उससे उन्हें भयभीत होने की जरुरत नहीं है। उनकी मानसिक संतुष्टि के लिए सरकार हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा को स्थापित कर रही थी जिसे बाद में पी चिदम्बरम में कांग्रेस की रणनीति के अनुसर भगवा आतंकवाद कहना प्रारम्भ कर दिया। इससे मुसलमानों में कांग्रेस के रक्षक होने का भ्रम भी बना रहता औश्र हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा के प्रचलन से आतंकवाद के मनौवैज्ञानिक अपराधिक बोध के भाव से भी मुक्ति मिलती। दूसरे संघ को मुसलमानों की दृष्टि में एक बार फिर अपराधी सिद्ध किया जा सकता था लेकिन संघ भारत सरकार और कांग्रेस के बिछाए गए इस जाल में भी नहीं फंसा औश्र उसने स्पष्ट ही यह मांग की ईमानदारी से जांच के बाद अपराधियोें के दण्ड दिया जाएग। कारण भी स्पष्ट था संघ ने कोई भूमिगत संगठन है और न ही उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आतंकवाद में विश्वास करता है। आतंकवाद कायारों का ही हथियार होता है और वैचारिक नपुंसकता वाले संगठन ही इसका उपयोग करते हैं। संघ एक सांस्कृतिक आंदोलन है। आतंकवादस से सांस्कृतिक आदोलनों को उर्जा नहीं मिलती बल्कि उसके उजास्त्रोत सूखने लगते हैं। आतंकवाद से तानाशाही और एकाधिकारवादी प्रवृत्तियांे को भी बढावा मिलता है। कांग्रेस एवं कम्युनिस्ट टोले में यह प्रवृत्तियां पायी जाती हैं। इतिहास इसका गवाह है। यही कारण है कि कांग्रेस एंव कम्युनिस्ट आतंकवाद से लडने के बजाय उसे अप्रत्यक्ष समर्थन देते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपनी इन्हीं प्रवृत्तियों के कारण कांग्रेस ने राष्ट्रीय स्वयसेवक संघ को बदनाम करने के लिए, मुसलमानों के मन में उसका भय पुनः सृजित करने के लिए दूसरी व्यूह रचना की। इस बार जांच एजेंसियों के माध्यम से इन्द्रेश कुमार का नाम जोड दिया गया। सरकार जानती थी आठ सौ पृष्ठों की जांच रिपोर्ट में एकाध बार संघ और इन्द्रेश कुमार का नाम आ जाने से मीडिया के एक वर्ग को मनमाफिक मशाला मिल जाएगा और संघ और इन्द्रेश कुमार की आतंकवाद में संलिप्तता की मशालेदार कहानियां इधर -उधर तैरने लगेंगी। कहानी का अंत क्या होगा इसकी न कांग्रेस को चिंता है और न सरकार को। लेकिन इस बीच जब मीडिया से संघ एवं इन्द्रेश कुमार का नाम उछलेगा तो मुसलमानों के मन में संघ को लेकर भ्रम पैछा हो सकेगा और आम भारतीय भी संघ को लेकर प्रश्न खडा कर सकता है। इसी रणनीति के तहत सरकार अजमेर बम विस्फोट के मामले में सुनियोजित प्रयास कर रही है। संघ और इन्द्रेश कुमार के नाम का उपयोग कर रही ह।। जबकि लगभग आठ सौ पृष्ठों की जांच रिपोर्ट में संगठन के नाते संघ और व्यक्ति के नामे इन्द्रेश कुमार पर कोई आरोप नहीं हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;लेकिन जांच एजेंसी का उद्देश्य सत्य की तह तक पहुचना नही है बिल्क उसका नाटक करते हुए संघ को बदनाम करना है। इन्द्रेश कुमार का नाम लेने से कांग्रेस एक और फायदे की सम्भावना देखती है। उसे लगता है कि इन्द्रेश के नाम पर विवाद पैदा करने से मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का जो सांस्कृतिक आसन निर्मित हुआ है उसमें दरारें पड सकती है। संघ को बदनाम करने की भारत सरकार के ठन सभी प्रयासों का यदि नामकारण करना हो तो उसे ‘सरकारी आतंकवाद’ कहा जा सकता है। लेकिन कांग्रेस औ सरकार अपने इस प्रयास में सफल नहीं होंगे। पंजाब के इतिहास में भी मन्नू का उद्धरण सामने आता है। इस विदेशी आका्रंता ने पंजाबियों पर अमानुषिक अत्याचार किए , उन्हें मौत के घाट उतारा। तब पंजाब में एक लाोक उक्ति प्रसिद्ध हुई -&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मन्नू असाडी दातरी , असी मन्नू दे सोये।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ज्यूं -ज्यूं मन्ने बड्ढ दा , असी दूणे चौणे होए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सोया सरसो की जाति का एक पौधा होता है उसे जितना काटा जाता है वह उतना ही फलता फूलता है। इसी तरह मन्नू पंजाबियों को जैसे मारता काटता था वैसे-वैसे उनका उत्साह बढता, वे फलते-फूलते।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकार ज्यों-ज्यों संघ पर प्रहार करगी त्यो-त्यों संघ फलेगा-फूलेगा। यह भारतीय इतिहास की परम्परा है। लेकिन दुर्भाग्य से साम्यवादियों का भारतीय इतिहास से कुछ लेना-देना नहीं है और कांग्रेस धीरे-धीरे भारतीय इतिहास से कटती जा रही है। सरकार द्वारा संघ पर किया गया यह प्रहार भारतीय परम्परा पर किया गया प्रहार है और भारतीय परम्परा इस प्रहार को निष्प्रभावी कर देगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-4367160864919291763?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/4367160864919291763/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=4367160864919291763' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/4367160864919291763'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/4367160864919291763'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/blog-post_31.html' title='मुसलमानों की संवाद रचना बनी कांग्रेस की आंख की किरकिरी'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-6743785326666455147</id><published>2010-10-29T02:38:00.000-07:00</published><updated>2010-10-29T02:40:18.969-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='इन्द्रेश'/><title type='text'>संघ के इन्द्रेश मुसलमानों के शत्रु हैं या उनके चहेते ?</title><content type='html'>-मंगलमय&lt;br /&gt;संघ के वरिष्ठ प्रचारक इन्द्रेश को जो लोग थोडा बहुत जानते हैं, वे उनके नाम का उच्चारण करने से पहले स्वतः ही आदरणीय शब्द लगा लेते हैं. जो उनके बारे में काफी कुछ जानते हैं, वे उन्हें परम आदरणीय कहते हुए उनका नाम लेते हैं तथा उनके निरंतर संपर्क में रहने वाले उन्हें माननीय इन्द्रेश जी कहा करते हैं.&lt;br /&gt;हरियाणा स्थित कैथल के अपने अत्यंत प्रतिष्ठित और धनाढ्य परिवार से लगभग चार दशक पूर्व विरक्त होकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में जीवन भर अविवाहित रहते हुए देश सेवा का संकल्प लेने वाले इन्द्रेश देश हित के विभिन्न कार्यों में सदैव सक्रिय रहते हैं और संघ के अनेक बड़े प्रकल्पों से जुड़े रहते हैं. वे अपनी बहु आयामी प्रतिभा के दम पर अपने हाथ में लिए गए लगभग सभी कठिन कार्यों को कुशलतापूर्वक संपन्न कर दिखाते हैं. उन्होंने पिछले कुछ ही वर्षों में लाखों देशभक्त मुसलमानों को राष्ट्रहित में एकजुट करके दिखाया है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अपने देश के वे सभी नेता, जो आजकल एक नए छद्म सेकुलर धर्म के अनुयायी बन गए हैं, एक ही सामूहिक एजेंडे को लेकर चल रहे हैं और वह है- देश में विभिन्न मत, सम्प्रदाय और जातियों के लोगों में अलगाव की भावना उत्पन्न करना, समाज को तोड़ना और लोगों को मूर्ख बनाकर उन्हें आपस में लड़वाते हुए सत्ता से चिपके रहना.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;संघ के इन्द्रेश देश के समाजभंजक नेताओं के राष्ट्रविरोधी एजेंडे की राह में एक बहुत बड़ा रोड़ा हैं. वे देश के छद्म सेकुलर नेताओं की आँखों में सदा से ही रड़कते रहे हैं, परन्तु आजकल तो वे मानों उनकी आँखों की किरकिरी ही बन गए हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि कुछ ही वर्ष पहले इन्द्रेश ने देश में हिंदू-मुसलमान के बीच पनपने वाले शत्रु भाव को मिटाने का बीड़ा उठाया था और इन दिनों वे देश में हिंदू-मुसलमान के बीच वैमनस्य की दीवारें गिराने में जुटे हुए हैं और अपने लक्ष्य में लगातार सफलता प्राप्त करते जा रहे हैं. इन्द्रेश ने हज़ारों मुस्लिम परिवारों को संघ के राष्ट्रवादी एजेंडे के साथ जोड़ लिया है. वे आज के छद्म सेकुलरों के लिए एक बड़ी चुनौती इसलिए हैं, क्योंकि यदि देश में हिंदू और मुसलमान दोनों सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के नाम पर एकमत होकर एक ही दिशा में चलने लगेंगे तो सेकुलरों की दुकानों पर ग्राहक आने बंद हो जाएँगे. तब हिंदू-मुसलमान के बीच घृणा फैलाने वालों का बाज़ार भाव गिर जाएगा और ऐसे में संभव है देशवासी इन छद्म सेकुलरों पर देशद्रोह के दावे ठोकने लगें और उन्हें सलाखों के पीछे भिजवा दें.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अतः आर एस एस के इन्द्रेश उन सब लोगों के लिए एक मुसीबत बन चुके हैं, जो देशवासियों को हिंदू-मुस्लिम के नाम पर हमेशा लड़वाते रहना चाहते हैं, क्योंकि इन्द्रेश ने देशभक्त मुसलमान बंधुओं का संगठन करने की दिशा में बड़ी सफलता प्राप्त कर ली है. उन्होंने ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ के साथ हज़ारों मौलानाओ और मुस्लिम बुद्धिजीवियों को भी जोड़ दिया है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसका एक बड़ा प्रमाण हमने अपनी आँखों से तब देखा, जब दो वर्ष पहले अमरनाथ आन्दोलन के समय जब उमर अब्दुल्ला ने (दुर्योधन की तरह) संसद में घोषणा कर डाली थी कि ‘हम’ कश्मीर की एक इंच भी भूमि अमरनाथ के तीर्थयात्रियों के लिए नहीं देंगे और वहीं पर बैठे हुए राहुल और उसकी गोरी मम्मी सोनिया माइनो (गाँधी?) ने उसकी बात का मौन समर्थन कर दिया था, तो इन्हीं इन्द्रेश के नेतृत्व में देश के हज़ारों राष्ट्रवादी मुसलमान आंदोलित हो उठे थे और वे बाबा अमरनाथ के भक्तों व जम्मू के लोगों को अपना पूरा समर्थन देने के लिए कश्मीर की ओर उमड़ पड़े थे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उस समय ‘मुस्लिम राष्ट्रीय मंच’ के बैनर तले मुसलमानों का एक विशाल काफिला मार्ग में स्थान-स्थान पर अमरनाथ आन्दोलन के लिए जन-जागरण करता हुआ कश्मीर की ओर चल निकला. उसी दौरान हरियाणा के अम्बाला में देर रात उस काफिले ने अपना पड़ाव डालने का फैसला किया. पड़ाव डालने का निर्णय अचानक होने के कारण ठीक से खाने-सोने की व्यवस्था नहीं थी. कुछ स्थानीय लोगों ने उस काफिले के भोजन की व्यवस्था की. काफिले में शामिल बहुत से मुस्लिम बंधुओं को रात साढ़े ग्यारह बजे के बाद भी सिर्फ रूखा-सूखा भोजन ही उपलब्ध कराया जा सका. व्यवस्था की कमी के कारण काफिले में शामिल जो लोग ओढ़ने-बिछाने का कपड़ा पाए बिना नीचे दरी पर ही सो गए थे, उनमे बहुत से बुद्धिजीवी, मौलाना और हज कमेटियों के प्रमुख भी थे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इन्द्रेश उस काफिले के साथ नहीं थे. हमें कई घंटे उस काफिले के प्रमुख लोगों के साथ रहने का अवसर मिला और उनसे बातचीत हुई. हमने उस दिन तक संघ के किसी इन्द्रेश का नाम सुना भी न था, परन्तु काफिले के उन मुसलमान भाइयों के मन में इन्द्रेश के प्रति अपार श्रद्धा को देखकर अद्भुत आनंद हुआ और ‘आर एस एस के इन्द्रेश’ से मिलने की प्रबल इच्छा जाग उठी. बाबा अमरनाथ आन्दोलन के समर्थन में मुसलमान बंधुओं के कश्मीर की ओर कूच करने के समाचार कई दिनों तक अख़बारों में प्रकाशित होते रहे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आगे पहुँचकर, उन मुसलमान बंधुओं को सरकारी दमन के कारण जम्मू-कश्मीर की सीमा पर लाठियां खानी पड़ी और उनमे से बहुत थोड़े ही लोगों को श्रीनगर तक जाने की अनुमति दी गयी थे, शेष सभी को गिरफ्तार कर लिया गया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हज़ारों मुसलमानों को देशहित में एकजुट करने का यह कार्य इन्द्रेश जी ने कर दिखाया है. कांग्रेस सरकार द्वारा उन पर आरोप लगाने का मुख्य कारण मुसलमानों में उनकी छवि को खराब करने का घिनौना प्रयास ही है. कांग्रेस का यह बेशर्म सिद्धांत है कि राजनीति में सब जायज़ है. इस नाजायज़ राजनीति के फेर में सोनिया के चेलों ने अब देश हित के बारे में सोचना लगभग छोड़ ही दिया है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य इन्द्रेश पर लगाए गए आरोपों में कोई दम नहीं है. ये आरोप भले ही देशद्रोही राजनेताओं के कुत्सित इशारों पर घड़े गए हों, परन्तु इन झूठे आरोपों को तैयार करने के लिए जिन पुलिस अधिकारियों पर दबाव डाला गया है, उनमे भी तो देशभक्ति का अंश हैं. वैसे भी झूठ तो झूठ ही रहता है, इसलिए इन झूठे आरोपों में से कोई भी आरोप अदालत में टिका रहने वाला नहीं है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कांग्रेस ने संघ के वरिष्ठ प्रचारक इन्द्रेश पर आरोप लगाकर संघ को बदनाम करने के लिए यही समय क्यों चुना, उसके तीन तात्कालिक कारण हैं-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;1 . बिहार के चुनाव में गोरी के लाल राहुल की थोड़ी-बहुत इज्ज़त बचाने के लिए स्वयं को आर एस एस का घोर विरोधी सिद्ध करके मुस्लिम वोटों का अपने पक्ष में ध्रुवीकरण करने का प्रयास करना.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;2 . गुलाममंडल खेलों के नाम पर हुई लूट में शीला की दिल्ली सरकार लपेटे में आ रही है, इससे लोगों का ध्यान हटाना.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;3 . गुजरात में कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया और सभी मुस्लिम और दलितों ने नरेन्द्र मोदी को अपना निर्विवाद नेता घोषित करके सेकुलरों के मुह पर कालिख ही पोत दी, बिहार के लोगों का इस खबर पर ध्यान न जाए, इसलिए मीडिया में एक नया बवाल खड़ा करना.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कांग्रेस के आयातित नेता उस इतिहास की ओर से आँखें मूंदे बैठे हैं, जो कांग्रेस को यह सीख दे सकता है कि संघ पर झूठे आरोप लगाओगे और इसे अनुचित तरीके से दबाने का प्रयास करोगे तो यह पहले से भी अधिक प्रखर और ताकतवर होकर सामने आ खड़ा होगा.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-6743785326666455147?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/6743785326666455147/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=6743785326666455147' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/6743785326666455147'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/6743785326666455147'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/blog-post_29.html' title='संघ के इन्द्रेश मुसलमानों के शत्रु हैं या उनके चहेते ?'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-6392507956131455108</id><published>2010-10-28T03:33:00.000-07:00</published><updated>2010-10-28T05:47:14.803-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कश्मीर'/><title type='text'>पाकिस्तानी कब्जे से कश्मीर को मुक्त कराइये : मेजर जनरल (से.नि.) गगनदीप बक्शी</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TMlwqtzyB4I/AAAAAAAAAQ8/GE-s2eKmJ_M/s1600/DSC_0017.JPG"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 213px;" src="http://4.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TMlwqtzyB4I/AAAAAAAAAQ8/GE-s2eKmJ_M/s320/DSC_0017.JPG" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5533077496354965378" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;आतंकवादियों के खिलाफ युद्ध के अलावा कोई विकल्प नहीं - मुख्यमंत्री श्री चौहान&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भोपाल। अरुंधती राय अगर महिला न होती तो सेना उनसे अलग तरीके से निपटती। सुश्री राय, चेतन भगत और पडगांवकर जैसे बुद्धिजीवी अलगाववाद की भाषा बोल रहे हैं। इससे देशद्रोहियों का ही मनोबल बढ़ेगा। हरेक भारतीय को जागरुक होकर सरकार से पूछना होगा कि हम पाकिस्तान के सामने इतने कमजोर क्यों हो गए हैं। अब हमें अपनी संसद के प्रस्ताव पर अमल करते हुए पाकिस्तानी कब्जे से कश्मीर को मुक्त कराना होगा। कश्मीर पर राजनेताओं और सरकार के ढुल-मुल रवैये के कारण समस्या बढ़ती जा रही है। सेना तैयार है, लेकिन उसे आदेश देने वाले मुंह पर पट्टी बांधे बैठे हैं। आखिर हम कब तक चुप्पी साधे रहेंगे। सेना ने हमेशा युद्ध जीत कर दिया है। कश्मीर को बचाने में सेना ने अपनी कुर्बानी दी है। देश का हजारों करोड़ रू. कश्मीर पर लगा है। क्या यह सब इसीलिए किया गया कि कश्मीर पाक को सौंप दिया जाए। जम्मू और लेह-लददाख सहित अनेक हिस्सों से आजादी या स्वायत्ता की कोई मांग नहीं हो रही है। सिर्फ श्रीनगर और कश्मीर के आस-पास के कुछ जिले पाकिस्तान प्रेरित आजादी की मांग कर रहे हैं। केन्द्र सरकार देश के करोड़ों मुसलमानों की बजाए इन मुट्ठीभर कश्मीरी मुसलमानों की के आगे क्यों नतमस्तक हो रही है। ‘कश्मीर ः समस्या एवं समाधन’ विषय पर व्याख्यान देते हुए सेवानिवृत्त मेजर जनरल गगनदीप बख्शी ने यह बात कही। श्री बक्शी भोपाल में स्पंदन, प्रज्ञा प्रवाह, भारत विकास परिषद् और म.प्र. राष्ट्रीय एकता समिति द्वारा आयोजित संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को कश्मीर के लोगों से हमदर्दी नहीं है। उसे कश्मीर के लोग नहीं वहां के संसाधन चाहिए। कश्मीर समस्या के समाधान के लिए भारत को अपनी बर्दाश्त की सीमा निर्धारित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें अपनी रेड लाइन डिफाइन करनी होगी। लेकिन दुर्भाग्य है कि केन्द्र सरकार के इशारे पर कश्मीर के वार्ताकारों ने यह कहा हे कि हमारी कोई रेडलाइन नहीं है। &lt;br /&gt;पाकिस्तान कश्मीर में सेना का मनोबल तोड़ने की साजिश कर रहा है। योजनाबद्ध तरीके से उसने पहले भारतीय पुलिस का मनोबल तोड़ा अब वह सेना पर मानवाधिकार हनन के झूठे आरोप लगवाकर सेना का ध्यान कश्मीर से हटाना चाह रहा है। मेजर जनरल बक्शी ने मानवाधिकार संगठनों को कटघरे में खडा करते हुए कहा कि सेना पर लगाए गए मानवाधिकार हनन के 94 प्रतिशत मामले गलत पाए गए हैं। सही आरोपों पर तत्काल सुनवाई और कार्यवाई की गई है। उन्होंने कहा कि दुनिया में सिर्फ भारत ही एक ऐसा देश है जो आतंकवाद से लड़ने में भारी हथियारों का उपयोग नहीं कर रहा है। अमेरिका, पाकिस्तान, चीन, रूस और श्रीलंका जैसे देशों ने हमेेंशा आतंकवाद से लड़ने में बड़ और भारी हथियारों का उपयोग किया है। इसके बावजूद भारतीय सेना पर मानवाधिकार हनन के सबसे ज्यादा आरोप लगे। &lt;br /&gt;मेे.जे. बक्शी ने अपने कार्यकाल के अनुभवों के आधार पर कश्मीर की आज की समस्या और उसके समाधान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि कश्मीर में आतंकवाद के अंत के लिये एक स्पष्ट नीति के साथ कार्य करने की जरूरत है। कश्मीर राज्य के कुछ जिलों में ही उपद्रवी तत्व सक्रिय है। वहाँ भी शांतिप्रिय लोग है जिसका सबसे प्रामाणिक तथ्य है कि 60 प्रतिशत से अधिक नागरिकों ने जम्मू-कश्मीर के निर्वाचन में भाग लेकर भारत की प्रजातांत्रिक व्यवस्था में भरोसा व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि हमें कश्मीर समस्या को व्यापक परिदृश्य में देखना होगा। कश्मीर को छोड़ने की बात देश में रहने वाले 15 करोड़ लोकतांत्रिक मुसलमानों के सम्मान को चोट पहुँचाना है। उन्होंने कश्मीर के सामरिक महत्व को समझाते हुए पाकिस्तान और चीन के सामरिक गठजोड़ की आशंकाओं पर भी प्रकाश डाला। श्री बक्शी ने कहा कि पाक से जल्दी नहीं निपटा गया तो उसका सहयोगी चीन हमारे लिए बड़ी चुनौती खडी कर देगा। हमें पाक के सामने घुटने टेकना बंद कर देना चाहिए। अब मुहतोड जवाब देने का समय आ गया है। &lt;br /&gt;कार्यक्रम के मुख्यअतिथि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने कहा कि हिन्दुस्तान की सरकार इतनी कमजोर हो गई कि पाकिस्तान को सबक सिखने की बजाये समझौतों में अटकी हुई है। भारत को ग्लोबल पावर बनाने का सपना देख रहे हैं लेकिन हदय से देशभक्ति की भावना लुप्त होती जा रही है।  कश्मीर विलय दिवस पर श्री चैहान ने कहा कि वोट बैंक की राजनीति ने देश को आतंकवाद से ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। हमारे यहां ऐसे -ऐसे चिंतक हो गए हैं जो पाक को कश्मीर देकर समस्या सुलझाने की बात करते हैंं। उन्होंने सवाल किया कि क्या अरुंधती राय का बयान चीन में बर्दाश्त किया जाता? कश्मीर के विलय पर उंगली उठाने वाले जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और कश्मीर को पाक का हिस्सा बताने वाले गिलानी को तो जेल में होना चाहिए। जबकि उन्हें सम्मान दिया जा रहा है। जिनके हदय में देशप्रेम नहीं वे ही ऐसा राज कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्दी सत्ता की चाह में भारतमाता को आजादी के समय ही ख्ंाडित कर दिया गया। आज अखंड भारत कहां है। पांच नदियों के कारण पंजाब कहलाने वाले राज्य में अब दो ही नदियां हैं। उन्होंने कहा कि सेना के साथ ठीक सलूक नहीं हो रहा है। उसे आजादी के साथ काम करने देना होगा। श्री चैहान ने कहा कि आतंकवाद की लडाई में अगर कुछ निर्दोष मर भी जाएं तो गम नहीं, लेकिन आतंकी नहीं छूटने चाहिए। दुष्ट बिना भय के काबू में नहीं आते हैंं।&lt;br /&gt;मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद आतंकवादियों के तो मानव अधिकार हैं लेकिन सेना व जनता के मानव अध्किारों का क्या? अरुंधती राय और मेधा पाटकर कश्मीरी पंडितों के मानव अधिकार की लड़ाई लड़ें। सोनिया राहुल गांधी से देशभक्ति के जज्बे की उम्मीद नहीं की जा सकती। कश्मीर बचाने के लिए जनता आगे आए। मैं हमेशा उनके साथ हूं। हम आतंकवादियों को पाक में घुसकर क्यों नहीं मार सकते। उन्होंने कहा कि अगर भारत पाक अधिकृत कश्मीर के लिये पुरजोर आवाज उठाता तो आज जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता का मुद्दा नहीं उठता। देश बचाने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। उन्होंने कहा कि कश्मीर के लिये अब वार्ता की नहीं दृढ़ता की जरूरत है। भारत ने उदारता एवं शांति का संदेश दिया है लेकिन अखण्डता के लिये अब शक्ति प्रदर्शन की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की समस्या देश की समृद्ध सांस्कृतिक अखंडता से अपरिचित नीति नियंत्रकों के ढुलमुल रवैये का परिणाम है। इसे सिर्फ विलय नहीं, बल्कि संकल्प दिवस के रूप में भी मनाएं। उन्होंने कहा कि धारा 370 खत्म कर वहां सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों को बसा दिया जाए, वहां की हालत सुधर जायेगी। देशभक्ति वोट बैंक का हिस्सा क्यों नहीं बन सकती है? अब समय आ गया है कि जनता देश की सत्ता पर देशभक्तों को बैठाये। अखंडभारत का सपना साकार करने के लिए सेना को पूरे अधिकार मिलने चाहिए। उन्होंने सेना को स्वतंत्र करने को कहा। &lt;br /&gt;श्री शिवराजसिंह चैहान ने कहा कि देश की एकता और अखंडता के लिये वोट की राजनीति आतंकवाद से ज्यादा खतरनाक है। जिस दिन जनता जाग गई सत्ता लोलुप कुर्सी पर नहीं रह पायेंगे।&lt;br /&gt;इस अवसर पर राष्ट्रीय एकता समिति के उपाध्यक्ष रमेंश शर्मा और महेश श्रीवास्तव, प्रज्ञा प्रवाह संयोजक बालकृष्ण दवे, स्पंदन के उपाध्यक्ष जी.के. छिब्बर उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन दीपक शर्मा ने किया।&lt;br /&gt;अनिल सौमित्र, भोपाल&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-6392507956131455108?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/6392507956131455108/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=6392507956131455108' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/6392507956131455108'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/6392507956131455108'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/blog-post_4249.html' title='पाकिस्तानी कब्जे से कश्मीर को मुक्त कराइये : मेजर जनरल (से.नि.) गगनदीप बक्शी'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TMlwqtzyB4I/AAAAAAAAAQ8/GE-s2eKmJ_M/s72-c/DSC_0017.JPG' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-2476637446394275123</id><published>2010-10-28T01:45:00.000-07:00</published><updated>2010-10-28T01:46:25.127-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कुरान'/><title type='text'>ताकि मुसलमान के बेटे आतंकवादी न बनें</title><content type='html'>राजीव कुमार&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कुरान की कुछ आयतें जो हैं वो बहुत निर्दयता पूर्वक गैर इस्‍लामियों की हत्‍या करने वाली हैं. &lt;br /&gt;लेकिन अब पूरे विश्‍व में शांति के लिये दुबई सरकार ने शांति पूर्ण कदम उठाया है.  पूरे यूरोप के दबाव  खासकर अमेरिका के दबाव से अब कुरान की उन आयतों को अरब सरकार ने बदल दिया गया है जो जो काफिरों का खून करने को कहती थीं, इसी तरह वे गैर इस्‍लामी औरतों के साथ बलात्‍कार को भी हलाल कहती थी, इसी तरह गैर इस्‍लामी औरतों को लूट कर उनकी आबरू को लूटने वाली आदि जितनी आयतें कुरान में मौजूद थीं सबको बदलकर बच्‍चों को पढ़ाया जा रहा है ताकि ये बच्‍चें बड़े होकर आतंकवादी न बनें. ये कदम मुस्लिम जगत के लिये पूरे विश्‍व में नजीर बनेंगे क्‍योंकि अक्‍सर कुरान की गलत आयतों को पढ़कर लड़का जेहादी आतंकी बनकर पूरे विश्‍व के लिये सरदर्द बन जाता था मगर अब उनके भविष्‍य के लिये उम्‍मीद की किरणें दिखती नजर आ रही हैं. मगर भारत में या अन्‍य देश पाकिस्‍तान आदि में इसे नही बदला गया है संभव है भारत सरकार इस दिशा में कदम उठायेगी.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस नये  कुरान का नाम रखा गया हैः द ट्रू फुरकान&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस कुरान का लिंक है-http://web.archive.org/web/20080531044110/www.islam-exposed.org/ind...&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यू ट्यूब पर आडियो सूनने के लिये यहां क्लिक करें-http://www.youtube.com/watch?v=plMNN30foXY&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बार-बार कुछ कट्टर मुस्लिम मेरा विरोध कर रहे थे कि कुरान बहुत प्‍यारा धर्म है आखिर कुरान में गलत नही था तो क्‍यों अरब सरकार इसे बदली.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बहरहाल जो भी हो अरब सरकार यदि अनवरत प्रयासरत रहेगी तो मुसलमानों के सर पर आतंकी होने का कलंक मिट जायेगा और लोग उन्‍हें शक की निगाहों से नही देखेंगे.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जहां-जहां जेहाद आदि था सब को हटा दिया गया है. कुरान से हटायी गयी मुख्‍य आयतें निम्‍न हैं-&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;1 -गैर मुसलमानों पर रौब डालो ,और उनके सर काट डालो .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;काफिरों पर हमेशा रौब डालते रहो .और मौक़ा मिलकर सर काट दो .सूरा अनफाल -8 :12&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;2 -काफिरों को फिरौती लेकर छोड़ दो या क़त्ल कर दो .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"अगर काफिरों से मुकाबला हो ,तो उनकी गर्दनें काट देना ,उन्हें बुरी तरह कुचल देना .फिर उनको बंधन में जकड लेना .यदि वह फिरौती दे दें तो उनपर अहसान दिखाना,ताकि वह फिर हथियार न उठा सकें .सूरा मुहम्मद -47 :14&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;3 -गैर मुसलमानों को घात लगा कर धोखे से मार डालना .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;'मुशरिक जहां भी मिलें ,उनको क़त्ल कर देना ,उनकी घात में चुप कर बैठे रहना .जब तक वह मुसलमान नहीं होते सूरा तौबा -9 :5&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;4 -हरदम लड़ाई की तयारी में लगे रहो .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"तुम हमेशा अपनी संख्या और ताकत इकट्ठी करते रहो.ताकि लोग तुमसे भयभीत रहें .जिनके बारेमे तुम नहीं जानते समझ लो वह भी तुम्हारे दुश्मन ही हैं .अलाह की राह में तुम जो भी खर्च करोगे उसका बदला जरुर मिलेगा .सूरा अन फाल-8 :60&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;5 -लूट का माल हलाल समझ कर खाओ .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"तुम्हें जो भी लूट में माले -गनीमत मिले उसे हलाल समझ कर खाओ ,और अपने परिवार को खिलाओ .सूरा अन फाल-8 :69&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;6 -छोटी बच्ची से भी शादी कर लो .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"अगर तुम्हें कोई ऎसी स्त्री नहीं मिले जो मासिक से निवृत्त हो चुकी हो ,तो ऎसी बालिका से शादी कर लो जो अभी छोटी हो और अबतक रजस्वला नही हो .सूरा अत तलाक -65 :4&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;7 -जो भी औरत कब्जे में आये उससे सम्भोग कर लो.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"जो लौंडी तुम्हारे कब्जे या हिस्से में आये उस से सम्भोग कर लो.यह तुम्हारे लिए वैध है.जिनको तुमने माल देकर खरीदा है ,उनके साथ जीवन का आनंद उठाओ.इस से तुम पर कोई गुनाह नहीं होगा .सूरा अन निसा -4 :3 और 4 :24&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;8 -जिसको अपनी माँ मानते हो ,उस से भी शादी कर लो .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"इनको तुम अपनी माँ मानते हो ,उन से भी शादी कर सकते हो .मान तो वह हैं जिन्होंने तुम्हें जन्म दिया .सूरा अल मुजादिला 58 :2&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;9 -पकड़ी गई ,लूटी गयीं मजबूर लौंडियाँ तुम्हारे लिए हलाल हैं .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"हमने तुम्हारे लिए वह वह औरते -लौंडियाँ हलाल करदी हैं ,जिनको अलाह ने तुम्हें लूट में दिया हो .सूरा अल अह्जाब -33 :50&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;10 -बलात्कार की पीड़ित महिला पहले चार गवाह लाये .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"यदि पीड़ित औरत अपने पक्ष में चार गवाह न ला सके तो वह अलाह की नजर में झूठ होगा.सूरा अन नूर -24 :१३&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;11 -लूट में मिले माल में पांचवां हिस्सा मुहम्मद का होगा .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"तुम्हें लूट में जो भी माले गनीमत मिले ,उसमे पांचवां हिस्सा रसूल का होगा .सूरा अन फाल- 8 :40&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;12 -इतनी लड़ाई करो कि दुनियामे सिर्फ इस्लाम ही बाकी रहे .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"यहांतक लड़ते रहो ,जब तक दुनिया से सारे धर्मों का नामोनिशान मिट जाये .केवल अल्लाह का धर्म बाक़ी रहे.सूरा अन फाल-8 :39&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;13 -अवसर आने पर अपने वादे से मुकर जाओ .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"मौक़ा पड़ने पर तुम अपना वादा तोड़ दो ,अगर तुमने अलाह की कसम तोड़ दी ,तो इसका प्रायश्चित यह है कि तुम किसी मोहताज को औसत दर्जे का साधारण सा खाना खिला दो .सूरा अल मायदा -5 :89&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;14 - इस्लाम छोड़ने की भारी सजा दी जायेगी .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"यदि किसी ने इस्लाम लेने के बाद कुफ्र किया यानी वापस अपना धर्म स्वीकार किया तो उसको भारी यातना दो .सूरा अन नहल -16 :106&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;15 - जो मुहम्मद का आदर न करे उसे भारी यातना दो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"जो अल्लाह के रसूल की बात न माने ,उसका आदर न करे,उसको अपमानजनक यातनाएं दो .सूरा अल अहजाब -33 :57&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;16 -मुसलमान अल्लाह के खरीदे हुए हत्यारे हैं .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"अल्लाह ने ईमान वालों के प्राण खरीद रखे हैं ,इसलिए वह लड़ाई में क़त्ल करते हैं और क़त्ल होते हैं .अल्लाह ने उनके लिए जन्नत में पक्का वादा किया है .अल्लाह के अलावा कौन है जो ऐसा वादा कर सके .सूरा अत तौबा -9 :111&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;17 -जो अल्लाह के लिए युद्ध नहीं करेगा ,जहन्नम में जाएगा .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"अल्लाह की राह में युद्ध से रोकना रक्तपात से बढ़कर अपराध है.जो युद्ध से रोकेंगे वह वह जहन्नम में पड़ने वाले हैं और वे उसमे सदैव के लिए रहेंगे .सूरा अल बकरा -2 :217&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;18 -जो अल्लाह की राह में हिजरत न करे उसे क़त्ल करदो&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जो अल्लाह कि राह में हिजरत न करे और फिर जाए ,तो उसे जहां पाओ ,पकड़ो ,और क़त्ल कर दो .सूरा अन निसा -4 :89&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;19 -अपनी औरतों को पीटो.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"अगर तुम्हारी औरतें नहीं मानें तो पहले उनको बिस्तर पर छोड़ दो ,फिर उनको पीटो ,और मारो सूरा अन निसा - 4 :34&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;20 -काफिरों के साथ चाल चलो .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"मैं एक चाल चल रहा हूँ तुम काफिरों को कुछ देर के लिए छूट देदो .ताकि वह धोखे में रहें अतता.सूरा रिक -86 :16 ,17&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;21 -अधेड़ औरतें अपने कपडे उतार कर रहें .&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;"जो औरतें अपनी जवानी के दिन गुजार चुकी हैं और जब उनकी शादी की कोई आशा नहीं हो ,तो अगर वह अपने कपडे उतार कर रख दें तो इसके लिए उन पर कोई गुनाह नहीं होगा .सूरा अन नूर -24 :60&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-2476637446394275123?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://web.archive.org/web/20080531044110/www.islam-exposed.org/ind...' title='ताकि मुसलमान के बेटे आतंकवादी न बनें'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/2476637446394275123/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=2476637446394275123' title='7 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/2476637446394275123'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/2476637446394275123'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/blog-post_28.html' title='ताकि मुसलमान के बेटे आतंकवादी न बनें'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-2430288412358079606</id><published>2010-10-23T04:47:00.000-07:00</published><updated>2010-10-23T04:49:38.503-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='महिला sahityakar'/><title type='text'>भोपाल में महिला साहित्यकारों का सम्मेलन शुरू</title><content type='html'>पुरानी नींव में नया निर्माण नारी को करना होगाः मृदुला सिन्हा&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भोपाल। भारतीय साहित्य परिषद द्वारा आयोजित दो दिवसीय महिला साहित्यकारों का सम्मेलन शनिवार को शारदा विहार आवासीय विद्यालय में शुरू हुआ। सम्मेलन में देश भर की कई ख्यात साहित्यकारों ने भागीदारी की। सम्मेलन का उद्घाटन महामहीम राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने किया। जबकि मुख्यअतिथि के रूप में संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा उपस्थित थे। इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने कहा कि समाज को जागृत करने में महिलाएं बडी भूमिका का निर्वहन कर सकती हैं। समाज और देश के उत्थान में महिला का बराबर का दर्ज है। भारतीय संस्कृति में भी नारी का महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए साहित्यकार नारी की भूमिका भी अह्म होनी चाहिए। श्री ठाकुर ने महिला शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि जब एक बच्चा शिक्षित होता है तो एक व्यक्ति का निर्माण होता है। जबकि जब एक महिला शिक्षित होती है तो पूरी एक पीढ.ी का निर्माण होता है। महिला के शिक्षित होने से उसके उत्थान में कोई बाधक नहीं बन सकेगा।&lt;br /&gt;इस मौके पर प्रख्यात सहित्यकार मृदुला सिन्हा ने कहा कि समाज में काफी बदलाव आ रहा है। वैश्वीकरण के नाम पर पाश्चात्य परंपराओं के नाम पर नारी के स्वरूप को विकृत किया जा रहा है। नारी सशक्तीकरण के नारे से नारी घर,सड़क और दफ्तर में असुरक्षित हो गई है। वह वहां पर अकेली खडी है। जबकि नारी की समस्या पूरे समाज की समस्या है। इसलिए नारी को पुरानी नींव पर नया निर्माण करना होगा। इसमें भी पुरुष का साथ होना जरूरी है। श्रीमती सिन्हा ने कहा कि वर्तमान दौर में महिलाओं में मातृत्व के प्रति कमी दिखाई दे रही है। सहित्य में मातृत्व के प्रति खुशबू पैदा करना होगा। साहित्य में हमें इन जीवन मूल्यों को बढावा देना होगा। उन्होंने सीता और सावित्री को नारी के लिए आदर्श बताते हुए कहा कि वह बेचारी नहीं हैं। इनकी ही तरह हमें अपनी बेटियों को बनाना होगा।&lt;br /&gt;कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने महिला साहित्यकारों के सम्मेलन में आई साहित्यकारों का स्वागत करते हुए कहा कि यह प्रदेश के लिए एक उपलब्धि है कि इतनी बडी प्रतिभा हमारे प्रदेश में पधारी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सरकार महिलाओं के सशक्त बनाने की दिशा में अग्रसर है। साहित्य और कला को बढावा देना हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।&lt;br /&gt;कार्यक्रम के संयोजक और साहित्य परिषद के सह संगठनमंत्री श्रीधर पराडकर ने कहा कि साहित्य वह होना चाहिए जिसमें लोक मंगल हो। लेकिन जब सहित्य में वर्ग विशेष की बात होने लगे तो वह साहित्य नहीं होता। लेकिन दुर्भाग्य से समाज में इसी तरह का साहित्य बाजारवाद के चलते सुलभ हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज भी अच्छा पढने वाला पाठक है लेकिन उसे अच्छा साहित्य उपलब्ध नहीं हो रहा है। इसलिए भारतीय परंपरा पर केंद्रीत साहित्य की रचना करना होगी। इस अवसर पर बडी संख्या में देश भर से आई महिला साहित्यकार उपस्थित थीं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-2430288412358079606?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/2430288412358079606/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=2430288412358079606' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/2430288412358079606'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/2430288412358079606'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/blog-post_23.html' title='भोपाल में महिला साहित्यकारों का सम्मेलन शुरू'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-843900340284578319</id><published>2010-10-21T06:27:00.000-07:00</published><updated>2010-10-21T06:28:50.736-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कश्मीर्'/><title type='text'></title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TMA_8EGO8yI/AAAAAAAAAQ0/xLVdnGYG37c/s1600/flax-1.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 320px; height: 160px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TMA_8EGO8yI/AAAAAAAAAQ0/xLVdnGYG37c/s320/flax-1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5530490643535557410" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-843900340284578319?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/843900340284578319/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=843900340284578319' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/843900340284578319'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/843900340284578319'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/blog-post_21.html' title=''/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/TMA_8EGO8yI/AAAAAAAAAQ0/xLVdnGYG37c/s72-c/flax-1.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-2954156287593102106</id><published>2010-10-17T22:40:00.000-07:00</published><updated>2010-10-17T22:42:18.837-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Deganga'/><title type='text'>A Dark Dusshera for Deganga</title><content type='html'>Kolkata,&lt;br /&gt;42 Puja Mandaps across Deganga Block will go empty. The biggest festival of the Bengali Hindus for which the populace excitedly waits the full year will be sacrificed and boycotted by the Goddess' followers. Located in Barasat Subdivision of N 24 Parganas, Deganga Hindus have decided not to bring Mother Durga and her 4 children home, ie NOT to celebrate Durga Puja, ie, Sacrifice Durga Puja in 2010.&lt;br /&gt;Has there been a calamity, an earthquake, a typhoon, or flood ?   NO !  Over 500 Hindu homes and 500 Hindu owned businesses have been attacked, Hindu women attacked and physically abused, multiple Hindu temples have been desecrated and defiled, all with synchronized orchestration by a planned well organized mob under the leadership of MP Haji Nurul Islam.  All within a three day span in September, 2010. &lt;br /&gt; Hindus in Deganga have treated this as more serious than a calamity, an earthquake, a typhoon, or a flood.  The biggest festival of Deganga's Hindus is being boycotted by all the Puja committees of the Deganga Puja Samanvay Committee.  They hope that this will catch the attention of the anti-Hindu media, anti-Hindu administration, anti-Hindu Police, and the anti-Hindu politicians of West Bengal.&lt;br /&gt;Today, while thousands of Hindus in Deganga spend another day in fear, trepidation and uncertainty for their and their children's future,  the corrupt local media and the vote hungry politicians are doing everything to hide the reality from the masses in Kolkata, living 20 miles away.&lt;br /&gt; Hindu Samhati endorses to the fullest, the decision by the Puja Samanvay Committee to boycott this Puja in protest of the anti-Hindu stance of the West Bengal media, politicians and the administration and police under their control.  We want to see that the situation is changed, so that we would be able to do the Pujas in full pristine form in 2011, or else, we have to expand our struggle beyond Deganga and N 24 Parganas.&lt;br /&gt;*In October-November 1946 the whole of India, especially North and Central India observed a Black Diwali in protest against the horrific riots and Hindu genocide in Noakhali, in erstwhile East Bengal. Maybe this Dark Dussera of Deganga will alert us to an impending calamity of similar proportions that hit the Hindus of India in 1946-47.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-2954156287593102106?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/2954156287593102106/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=2954156287593102106' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/2954156287593102106'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/2954156287593102106'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/dark-dusshera-for-deganga.html' title='A Dark Dusshera for Deganga'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-5466774014459314973</id><published>2010-10-17T01:25:00.000-07:00</published><updated>2010-10-17T01:27:01.644-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='संघ'/><title type='text'>सरसंघचालक श्री मोहनजी भागवत के विजयादशमी भाषण का सारांश</title><content type='html'>अश्विन शु.दशमी युगाब्द 5112 (17 अक्टूबर, 2010)&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;श्री रामजन्मभूमि न्यायिक निर्णयः एक शुभ संकेत &lt;br /&gt; प्राचीन समय से अपने देश में धर्म की विजय यात्रा के प्रारम्भ दिवस के रूप में सोत्साह व सोल्लास मनाये जानेवाला यह विजयदशमी का पर्व इस वर्ष संपूर्ण राष्ट्र के जनमन में, 30 सितंबर 2010 को श्री रामजन्मभूमि के विषय को लेकर मिले न्यायिक निर्णय से व्याप्त आनन्द की पृष्ठभूमि लेकर आया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ का यह निर्णय अंततोगत्वा श्रीरामजन्मभूमि पर एक भव्य मंदिर के निर्माण का ही मार्ग प्रशस्त करेगा। मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम, विश्वभर के हिन्दुओं के लिए देवतास्वरुप होने के साथ-साथ इस देश की पहचान, अस्मिता, एकात्मता, स्वातंत्र्याकांक्षा तथा विजिगीषा के मूल में स्थित जो हम सभी की राष्ट्रीय संस्कृति है उसकी मानमर्यादा के प्रतीक भी हैं। इसीलिए हमारे संविधान के मूलप्रति में स्वतंत्र भारत के आदर्श, आकांक्षाएँ तथा परम्परा को स्पष्ट करनेवाले जो चित्र दिये हैं, उसमें मोहनजोदड़ो के अवशेष तथा आश्रमीय जीवन के चित्रों के पश्चात् पहला व्यक्तिचित्र श्रीराम का है। श्री गुरू नानक देव जी ने सन 1526 में समग्र भारत का भ्रमण करते हुए श्री रामजन्मभुमि के दर्शन किये थे। यह बात सिख पंथ के इतिहास में स्पष्ट उल्लिखित है। ऐतिहासिक, पुरातात्विक तथा प्रत्यक्ष उत्खनन के साक्ष्यों के आधार पर श्रीरामजन्मभूमि पर इ.स. 1528 के पहले कोई हिन्दू पवित्र भवन था, यह बात मान ली गई।&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;नियति द्वारा प्रदत्त शुभ अवसर&lt;br /&gt; श्री रामजन्मभूमि संबंधित न्यायिक प्रक्रिया 60 वर्ष तक खींची जाने के कारण संपूर्ण समाज की समरसता में विभेद का विष व संघर्ष की कटुता व पीड़ा को घोलनेवाला, एक अकारण खड़ा किया गया विवाद समाप्त कर, अपनी राष्ट्रीय मानमर्यादा के प्रतीक मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम की अयोध्या स्थित जन्मभूमि पर उनका भव्य मंदिर बनाने के निमित्त, हम सभी को बीती बाते भूलकर एकत्र आना चाहिए। यह निर्णय अपने देश के मुसलमानों सहित सभी वर्गों को आत्मीयतापूर्वक मिलजुलकर एक नया शुभारम्भ करने का नियति द्वारा प्रदत्त एक अवसर है यह संघ की मान्यता है। अपनी संकीर्ण भेदवृत्ति, पूर्वाग्रहों से प्रेरित हट्टाग्रह तथा संशयवृत्ति छोड़कर, अपने मातृभूमि की उत्कट अव्यभिचारी भक्ति, अपनी समान पूर्वज परंपरा का सम्मान तथा सभी विविधताओं को मान्यता, सुरक्षा व अवसर प्रदान करनेवाली, विश्व की एकमेवाद्वितीय, विशिष्ट, सर्वसमावेशक व सहिष्णु अपनी संस्कृति को अपनाकर, स्व. लोहिया जी के शब्दों में भारत की उत्तर दक्षिण एकात्मता के सृजनकर्ता श्रीराम का मंदिर जन्मभूमि पर बनाने के लिए हमे एकत्रित होना चाहिए। यही संपूर्ण समाज की इच्छा है। 30 सितंबर को निर्णय आने के पश्चात समाज ने जिस एकता व संयम का परिचय दिया वह इसी इच्छा को स्पष्ट करता है।&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;षड्यंत्रकारियों से सावधान&lt;br /&gt; परन्तु राष्ट्रीय एकता के प्रयासों के लिए प्राप्त इस अवसर को भी तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के स्वार्थसाधन का हथियार बनाने की दुर्भाग्यपूर्ण चेष्टा, निर्णय के दूसरे दिन से ही प्रारम्भ हुयी हम देखते है। पंथ, प्रान्त, भाषा की हमारी विविधताओं को आपस में लड़ाकर मत बटोरने वाले यही कुछ लोग, एक तरफ मुख से ‘सेक्युलॅरिज्म’ का जयकारा लगाकर, बड़ी-बड़ी गोलमटोल बातों को करते हुए सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने के सूक्ष्म षड्यंत्र को रचते हुए सद्भाव निर्माण करनेवाले प्रसंगों व प्रयत्नों में बाधा डालते रहते हैं। माध्यमों व तथाकथित बुद्धिजीवियों में भी अपने भ्रामक विचार का अहंकार पालनेवाले, हिन्दू विचार व हिन्दू के लिए चलनेवाले प्रयासों के पूर्वाग्रहग्रसित द्वेष्टा, व अपने स्वार्थों व व्यापारिक हितों के लिए सत्य, असत्य की परवाह न करते हुए ”न भयं न लज्जा“ ऐसा व्यवहार करनेवाले कुछ लोग हैं। 30 सितम्बर को दोपहर 4ः00 बजे तक की इनकी भाषा तथा निर्णय आने के पश्चात् की भाषा व व्यवहार का अंतर देखेंगे तो यह बात आप सभी के ध्यान में आ जायेगी। समाज के विभिन्न वर्गों में एक दूसरे के प्रति अथवा एक दूसरे के संगठनों के प्रति भय व अविश्वास का हौवा खड़ा करने का उनका काम सदैव ‘सेक्युलॅरिज्म’ का चोला ओढ़कर, कुटिल तर्कदुष्टता से चलता रहता है। इन सभी से सदा ही सावधान रहने की आवश्यकता है। अपने स्वार्थ को साधने के लिए विश्वबंधुत्व, समता, शोषणमुक्ति आदि बड़ी-बड़ी बातों की आड़ में समाज में इन बातों को अवतीर्ण होने से इन्ही लोगों ने रोका है।&lt;br /&gt;इसी स्वार्थकामना व विद्वेष के चलते कुछ आतंक की घटनाओं में कुछ थोड़े से हिन्दू व्यक्तियों की तथाकथित संलिप्तता को लेकर ‘हिन्दू आतंकवाद’ ‘भगवा आतंकवाद’ जैसे शब्दप्रयोग प्रचलित करने का देशघाती षड्यंत्र चलता हुआ स्पष्ट दिखाई देता है। उसमें संघ को भी गलत नियत से घसीटने का दुष्ट प्रयास हो रहा है। असत्य के मायाजाल में जनता को भ्रमित करने की तथा हिन्दू संत, सज्जन, मंदिर व संगठनों को बदनाम करने की यह कुचेष्टा किनके इशारे पर चल रही है व किनको लाभान्वित कर रही है इसको जानने का हमने प्रयत्न नहीं किया है। परंतु यह किसी को लाभान्वित करने के स्थान पर अपने राष्ट्र को अपकीर्ति व आपत्ति में डालेगी यह निश्चित है।&lt;br /&gt;अपने देश के संविधान सम्मत राष्ट्रध्वज के शीर्षस्थान पर विराजमान त्याग, कर्मशीलता व ज्ञान के प्रतीक भगवे रंग को; स्वयं आतंकी प्रवृत्तियों से मुक्त रहकर, आतंक से संघर्षरत हिन्दू समाज व संतों, साध्वियों को; भारत देश को; प्रत्येक प्राकृतिक आपदा में तथा आतंक व युद्ध जैसे मानवनिर्मित संकटों में शासन-प्रशासन का प्राणपण से सहयोग करनेवाले, 1 लाख 57 हजार के ऊपर छोटे-बड़े सेवा केन्द्र देश की अभावग्रस्त जनता के लिए बिना किसी भेदभाव अथवा स्वार्थ के उद्देश्य से चलानेवाले स्वयंसेवकों को, संघ को व अन्य संगठनों को कलंकित करने की यह चेष्टा असफल ही होगी। न्यायालयों के अभियोगों के निर्णयों के पूर्व ही माध्यम-अभियोगों के सूचनाभ्रम-तंत्र [disinformation campaign via media trial]का उपयोग संघ के विरुद्ध करने के पूर्व अपने कलंकित गिरेबान में झाँकने का प्रयास ये शक्तियाँ करके देखें। ये लोग अपने राजनैतिक स्वार्थों के लिए ‘भगवा आतंक’ शब्द का प्रयोग करके भारत की श्रेष्ठ परंपरा और सभी संत महात्माओं का अपमान करने से भी बाज नहीं आ रहे है। यह समय देश को अपने क्षुद्र व घृणित चुनावी षड्यंत्रों में उलझानें का नहीं है।&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;कश्मीरः अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति की बिसात &lt;br /&gt; कश्मीर में संकट गंभीर व जटिलतर बन गया है। हमारी उपेक्षा के कारण बाल्टिस्तान व गिलगिट पाकिस्तान के अंग बन गये और चीन ने अपनी सेना की उपस्थिति वहाँ दर्ज कराते हुए भारत को घेरने का कार्य पूर्ण कर लिया है। अफगानिस्तान से बाइज्जत व सुरक्षित स्थिति में भागकर पाकिस्तान को अपने साथ रखते हुए कश्मीर घाटी में अपने पदक्षेप के अनुकूल स्थिति बनाने के लिए अमरीका बढ़ रहा है। अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति की यह बिसात घाटी में बिछ जाने के पहले ही हमारी पहल होनी चाहिए। अफगानिस्तान में अपने हितों के अनुकूल वातावरण को बनाते हुए, घाटी की परिस्थितियाँ हमे शेष भारत के साथ सात्मीकरण की ओर मोड़नी ही पड़ेगी। किसी भी केन्द्र सरकार का अपने देश के अविभाज्य अंगों के प्रति यह अनिवार्य कर्तव्य होता है। भारत की सार्वभौम प्रभुसत्तासंपन्न सरकार को अलगाववादी तत्वों के द्वारा कराये गये प्रायोजित पथराव के आगे झुकना नहीं चाहिए। सेना के बंकर्स हटाने से व उसके अधिकार कम करने से वहाँ भारत की एकात्मता व अखण्डता की रक्षा नहीं होगी। संसद के वर्ष 1994 में सर्वसम्मति से किये गये प्रस्ताव में व्यक्त संकल्प ही अपनी नीति की दिशा होनी चाहिए। हमें यह सदैव स्मरण रखना है कि महाराजा हरिसिंह के द्वारा हस्ताक्षरित विलयपत्र के अनुसार कश्मीर का भारत में विलीनीकरण अंतिम व अपरिवर्तनीय है।&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;जम्मू-कश्मीर की सब जनता अलगाववादी नहीं &lt;br /&gt; जम्मू व कश्मीर राज्य में केवल कश्मीर घाटी नहीं है। और उसमें भी स्वायतत्ता की माँग करने वाले व उसकी आड़ में अलगाव को बढ़ावा देकर आजादी का स्वप्न देखने वाले लोग तो बहुत थोड़े ही है। अतः केवल इन अलगाववादी समूहों व उनके नेतृत्व को ही विभिन्न वार्ताओं के माध्यम से मुख्य रूप से सुनना व प्रश्रय देना समस्या को सुलझाने की बजाय उसे और अधिक उलझाने का ही कारण बनता दिख रहा है। अतः हमें घाटी के साथ-साथ जम्मू एवं लद्दाख की कठिनाइयों व उनके साथ सालों से चले आ रहे भेदभाव के बारे में भी गम्भीरता से विचार करना होगा। घाटी में अलगाववादी तत्वों के बहकावे में आ गये नौजवानों एवं सामान्य जनता से बात अवश्य ही होनी चाहिए। पर इसके साथ ही समूचे जम्मू-कश्मीर के राष्ट्रवादी सोच के मुसलमानों, गुज्जर-बक्करवालों, पहाड़ियों, शियाओं, सिक्खों, बौद्धों, कश्मीरी पण्डितों एवं अन्य हिन्दुओं की भावनाओं, आवश्यकताओं व आकांक्षाओं को भी ध्यान में रखना नितांत आवश्यक है। साथ ही पाक अधिकृत कश्मीर से आये शरणार्थियों की लम्बे समय से चली आ रही न्यायोचित माँगों पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है। अपने गाँव व घरों से उजड़े कश्मीरी पण्डितों को ससम्मान, अपनी सुरक्षा व रोजगार के प्रति पूर्ण आश्वस्त हो कर शीघ्रातिशीघ्र घाटी में उनकी इच्छानुसार पुनः स्थापित कराया जाना चाहिए। ये सब भारत के साथ सम्पूर्ण सात्मीकरण चाहते हैं। अतः इन सब की सुरक्षा, विकास व आकांक्षाओं का विचार जम्मू-कश्मीर समस्या के सम्बन्ध में होना ही चाहिए। इन सब पक्षों का विचार करने पर ही जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में चलायी जाने वाली वार्तायें सर्वसमावेशी और फलदायी हो सकेगी। &lt;br /&gt;स्वतंत्रता के तुरन्त बाद से ही जम्मू व काश्मीर की प्रजा भेदभाव रहित सुशासन व शांति की भूखी है। वह उनको शीघ्रातिशीघ्र मिले ऐसे सजग शासन व प्रशासन की व्यवस्था वहां हो यह आवश्यक है।&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;चीनः एक गम्भीर चुनौती &lt;br /&gt; तिब्बत में अपनी बलात् उपस्थिति को वैध सिद्ध करने के चक्कर में तिब्बत समस्या की तुलना कश्मीर से करनेवाला चीन अब गिलगिट व बाल्टिस्थान में प्रत्यक्ष उपस्थित है। जम्मू व कश्मीर राज्य तथा उत्तरपूर्वांचल के नागरिकों को चीन में प्रवेश करने के लिए वीसा की आवश्यकता नहीं ऐसा जताकर उसने भारत के अंतर्गत मामलों में हस्तक्षेप करने का प्रयास किया है। चीन के उद्देश्यों के मामले में अब किसी के मन में कोई भ्रम अथवा अस्पष्टता रहने का कोई कारण नहीं रहना चाहिए। उन उद्देश्यों को लेकर भारत को घेरने, दबाने व दुर्बल करने के चीन के सामरिक, राजनयिक व व्यापारिक प्रयास भी सबकी आँखों के सामने स्पष्ट है। उस तुलना में हमारी अपनी सामरिक, राजनयिक व व्यापारिक व्यूहरचना की सशक्त व परिणामकारक पहल, शासन की इन मामलों में सजगता, समाज मन की तैयारी इन पर त्वरित ध्यान देने की कृति होने की आवश्यकता है। इसमें और विलंब देश के लिए भविष्य में बहुत गंभीर संकट को निमंत्रण देने वाला होगा।&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;नक्सली आतंक&lt;br /&gt; चीन के समर्थन से नेपाल में माओवादियों का उपद्रव खड़ा हुआ व बड़ा हुआ। नेपाल के उन माओवादियों का अपने देश के माओवादी आतंक के साथ भी संबंध है। उनका दृढ़तापूर्वक बंदोबस्त करने के बारे में अभी शासन अपनी ही अंदरुनी खींचतान में उलझकर रह गया है। प्रशासन को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाना, माओवादी प्रभावित अंचलों में विकासप्रक्रिया को गति देना इसके भी परिणामकारक प्रयास नहीं दिखते। कहीं-कहीं तो इस समस्या का भी अपने राजनीतिक स्वार्थों के लिए साधन के रूप में उपयोग किया जा रहा है। देश की सुरक्षा व प्रजातंत्र के लिए यह बात बहुत महंगी पडेगी।&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;उत्तरपूर्वांचलः देशभक्त जनता की उपेक्षा &lt;br /&gt; उत्तरपूर्वांचल के संदर्भ में भी यह बात महत्वपूर्ण है। वहाँ पर भी अलगाववादी स्वरों को प्रश्रय मिलता है व देश के प्रति निष्ठा रखनेवालों की उपेक्षा होती है। इसी नीति के कारण जनसमर्थन खोकर मृतप्राय बनते चले N.S.C.N. जैसे अलगाववादी आतंकी संगठन को फिर से पुनरुज्जीवित होकर अपने आतंक व अलगाव सहित खड़े होने का अवसर मिला। उत्तरपूर्व सीमा के रक्षक बनकर चीन के आह्वान को झेलने की हिम्मत दिखानेवाले अरुणाचल की उपेक्षा ही चल रही है। मणिपुर की देशभक्त जनता तो उन अलगाववादियों द्वारा किये गये प्रदीर्घ नाकाबंदी में जीवनावश्यक वस्तुओं के घोर अभाव में तड़पती, राहत के लिए गुहार लगाते-लगाते थक गयी, निराशा के कारण प्रक्षुब्ध हो गयी। अपनी ही देश की देशभक्त जनता की उपेक्षा व अलगाववादियों की बिना कारण खुशामद चीन के विस्तारवादी योजनाओं की छाया में देश की सीमाओं की सुरक्षा की स्थिति को कितना बिगाड़ेगी इसकी कल्पना क्या हमारे नेतागण नही कर सकते? विदेशी ईसाई मिशनरियों के षड्यंत्रों एवं उपद्रवों के प्रति लगातार बरती जा रही उपेक्षा ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। &lt;br /&gt; &lt;br /&gt;अनुनय की राजनीतिः एक गंभीर खतरा&lt;br /&gt; एक तरफ तो शासन प्रशासन का यह अंधेरनगरी के राजा को ही शोभा देनेवाला इच्छाशक्तिविहीन ढुलमुल रवैय्या, दूसरी तरफ स्वतंत्रता के 60 वर्षों के बाद भी सच्छिद्र रखी गयी सीमाओं से निरंतर चलनेवाली बांगलादेशी घुसपैठ का क्रम। न्यायालयों तथा गुप्तचर एजेंसियों के द्वारा बार-बार दी गयी detect, delete, and deport की राय के बावजूद, उसके प्रथम चरण detect तक की कार्यवाही करने की इच्छाशक्ति व दृढ़ता चुनावों में मतों की प्राप्ति के लिए अनुनय में किसी भी स्तर तक उतर सकने वाले हमारे राज्यों के व केन्द्रों के नेताओं ने खो दी है, ऐसा ही चित्र सर्वत्र दिखता है। उत्तरपूर्वांचल के राज्यों व बंगाल व बिहार के सीमावर्ती जिलों में जनसंख्या का चित्र बदल देनेवाली इस घुसपैठ ने वहाँ पर कट्टरपंथी सांप्रदायिक मनोवृत्ति को बढ़ाकर वहाँ की मूलनिवासी जनजातियाँ व हिन्दू जनता को प्रताड़ित करनेवाली गुंडागर्दी व अत्याचारी उपद्रवियों की उद्दंडता व दुःसाहस को और प्रोत्साहित किया है। हाल ही में बंगाल के देगंगा में हिन्दू समाज पर जो भयंकर आक्रमण हुआ, वह इन सीमावर्ती प्रदेश में देशभक्त हिन्दू जनता पर गत कुछ वर्षों से जो कहर बरसाया जा रहा है उसका एक उदाहरण है। न वहाँ के राज्य शासन को, न केन्द्र में सत्तारूढ़ नेताओं को हिन्दू जनता के इस त्रासदी की कोई परवाह है। सबकी नजर अपने मतस्वार्थों पर ही पक्की गड़ी है। अंतर्गत कानून, सुव्यवस्था तथा हिन्दुओं की सुरक्षा का सीमावर्ती जिलाओं में टूटना हमारी सीमासुरक्षा को भी ढीला करता है इसका अनुभव शासन-प्रशासन सहित सभी को कई बार देश में सर्वत्र आ चुका है फिर भी यह स्थिति है। &lt;br /&gt;शंका तो यहॉं तक आती है की इस बात की चिंता भी शासन वास्तविक रूप में करता है कि नहीं? जिस ढंग से इस बार की जनगणना में बिना किसी प्रमाण के, केवल बतानेवाले का कथनमात्र प्रमाण मानकर साथ-साथ ही नागरिकता की भी निश्चिति का प्रावधान किया उससे तो अपने देश में अवैध घुसा कोई भी व्यक्ति नागरिक बन जाता। अब सभी नागरिकों को विशिष्ट पहचान क्रमांक [unique Identification number] मिलनेवाला है। परंतु पहचान क्रमांक प्राप्त करनेवाले वास्तव में इसी देश के नागरिक है यह प्रमाणित करने की क्या व्यवस्था है? योजनाओं के बनाते समय इन सजगताओं को बरतने में ढिलाई अथवा भूलचूक नहीं होनी चाहिए।&lt;br /&gt;जन्मना जातिविरहित समाज की रचना का दावा करते है तो फिर एक देश के एक जन की गणना में जाति पूछकर फिर एक बार उसका स्मरण दिलानेवाली योजना क्यों बनी? एकरस समाजवृत्ति उत्पन्न करने के लिए अपनी जाति हिन्दू, हिन्दुस्थानी अथवा भारतीय लिखो, बोलो, मानो ऐसा आवाहन देश के गणमान्य विद्वान व सामाजिक कार्यकर्ता कर रहे हैं, तब देश में भावनात्मक एकता लाने के लिए कर्तव्यबद्ध शासन उनका विरोध करते हुये तथा एक-एक नागरिक से उनकी जाति गिनवायेगा क्या? नियोजन के लिये आंकड़ों का संकलन करनेवाली किसी अलग, स्वतंत्र, तात्कालिक व मर्यादित व्यवस्था का निर्माण करना सरकारी क्षमता के बाहर नही है।&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;करनी और कथनी में अंतर्विरोध &lt;br /&gt; देश को कहाँ ले जाने की हमारी घोषणाएँ है और हम उसको कहां ले जा रहे हैं। अपने देश के जिस सामान्य व्यक्ति के आर्थिक उन्नयन की हम बात करते हैं, वह तो कृषक है, खुदरा व्यापारी, अथवा ठेले पर सब्जी बेचनेवाला, फूटपाथ पर छोटे-छोटे सामान बेचनेवाला है, ग्रामीण व शहरी असंगठित मजदूर, कारीगर, वनवासी है। लेकिन हम जिस अर्थविचार को तथा उसके आयातित पश्चिमी मॉडेल को लेकर चलते हैं वह तो बड़े व्यापारियों को केन्द्र बनाने वाला, गाँवों को उजाड़नेवाला, बेरोजगारी बढ़ानेवाला, पर्यावरण बिगाड़कर अधिक ऊर्जा खाकर अधिक खर्चीला बनानेवाला है। सामान्य व्यक्ति, पर्यावरण, ऊर्जा व धन की बचत, रोजगार निर्माण आदि बातें उसके केन्द्र में बिल्कुल नहीं है।&lt;br /&gt;एक तरफ हम सबके शिक्षा की बात करते हैं, दूसरी तरफ शिक्षा व्यवस्था का व्यापारीकरण करते हुए उसको गरीबों के लिए अधिकाधिक दुर्लभ बनाते चले जाते हैं। मानवीय भावना, सामाजिक दायित्वबोध, कर्तव्यतत्परता, देशात्मबोध अपने समाजजीवन में प्रभावी हो ऐसा उपदेश शिक्षा संस्थाओं में जाकर हम देते हैं और इन मूल्यों को संस्कार देनेवाली सारी बातों को निकाल बाहर कर ”पैसा, अधिक पैसा और अधिक पैसा“ किसी भी मार्ग से कमाने में ही जीवन की सफलता मानकर, निपट स्वार्थ, भोग तथा जड़वाद सिखानेवाला पाठ्यक्रम व पुस्तकें लागू करते है। कथनी व करनी के इस अन्तर्विरोध के मूल में अपने देश की वास्तविक पहचान, राष्ट्रीयता, वैश्विक दायित्व तथा एकता के सूत्र का घोर अज्ञान, अस्पष्टता अथवा उसके प्रति गौरव का अभाव तथा स्वार्थ व विभेद की प्रवृत्ति है। सभी क्षेत्रों में राष्ट्र के नेतृत्व करनेवाले लोगों में उचित स्वभाव हों, उचित चरित्र हो, उचित प्रवृत्ति बनी रहे, कभी उसमें भटकाव न आये यह चिन्ता सजगता से करनेवाला जागृत समाज ही इस परिस्थिति का उपाय कर सकता है।&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;हिन्दुत्वः अनिवार्य आवश्यकता &lt;br /&gt; &lt;br /&gt;गत 85 वर्षों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ऐसे ही समाज की निर्मिती के लिए सुयोग्य व्यक्तियों के निर्माण में लगा है। अपने इस सनातन राष्ट्र की विशिष्ट पहचान, देश की अखंडता व सुरक्षा का आधार, समाज की एकात्मता का सूत्र तथा पुरुषार्थी उद्यम का स्रोत, तथा विश्व के सुख शांतिपूर्ण जीवन की अनिवार्य आवश्यकता हिन्दुत्व ही है, यह अब सर्वमान्य है और अधिकाधिक स्वतःस्पष्ट होते जा रहा है। अढ़ाई दशक पहले श्री विजयादशमी उत्सव के इसी मंच से संघ के उस समय के पू. सरसंघचालक श्री बालासाहब देवरस के इस कथन को कि - ‘भारत में पंथनिरपेक्षरता, समाजवाद व प्रजातंत्र इसीलिए जीवित है क्योंकि यह हिन्दुराष्ट्र है’, आज श्री एम.जे अकबर व श्री. राशिद अलवी जैसे विचारक भी लिख बोल रहे हैं। सभी विविधताओं में एकता का दर्शन करने की सीख देनेवाला, उसको सुरक्षा तथा प्रतिष्ठा देनेवाला व एकता के सूत्र में गूंथकर साथ चलानेवाला हिन्दुत्व ही है। हिन्दुत्व के इस व्यापक, सर्वकल्याणकारी, व प्रतिक्रिया तथा विरोधरहित पवित्र आशय को मन-वचन-कर्म से धारण कर इस देश का पुत्ररूप हिन्दु समाज खड़ा हो। निर्भय एवं संगठित होकर अपनी पवित्र मातृभूमि भारतमाता, उज्ज्वल पूर्वज-परंपरा तथा सर्वकल्याणकारी हिन्दू संस्कृति के गौरव की घोषणा करें यह आज की महती आवश्यकता ही नही, अनिवार्यता है। स्वार्थ और भेद के कलुष को हटाकर परमवैभवसंपन्न, पुरूषार्थी दिग्विजयी भारत के निर्माण के लिए सब प्रकार के उद्यम की पराकाष्ठा करें। संपूर्ण विश्व को समस्यामुक्त कर सुखशांति की राह पर आगे बढ़ाये। सब प्रकार की विकट परिस्थितियों का यशस्वी निरसन करने का यही एकमात्र, अमोघ, निश्चित व निर्णायक उपाय है।&lt;br /&gt;इसलिए नित्य शाखा की साधना के द्वारा प्रत्येक व्यक्ति को हिन्दुत्व के संस्कारों तथा गौरव से परिपूरित कर, निःस्वार्थ व भेद तथा दोष से रहित अंतःकरण से तन-मन-धन पूर्वक देश, धर्म, संस्कृति व समाज के लिए जीवन का विनियोग करने की प्रेरणा व गुणवत्ता देकर, सम्पूर्ण समाज को संगठित व शक्तिसंपन्न स्थिति में लाने का संघ का कार्य चल रहा है। पूर्ण होते तक इस कार्य को करते रहने के अतिरिक्त संघ का और कोई प्रयोजन अथवा महत्वाकांक्षा नहीं है। केवल आवश्यक है, इस पवित्र कार्य को समझकर, उसे अपना कार्य मानकर आप सभी सहयोगी भाव से इसमें जुट जायें। यही आपसे विनम्र अनुरोध तथा हृदय से आवाहन है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-5466774014459314973?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/5466774014459314973/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=5466774014459314973' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/5466774014459314973'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/5466774014459314973'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/blog-post_17.html' title='सरसंघचालक श्री मोहनजी भागवत के विजयादशमी भाषण का सारांश'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-7386541810246737271</id><published>2010-10-15T02:37:00.000-07:00</published><updated>2010-10-15T02:38:45.913-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='राहुल Gandi'/><title type='text'>Equating Nationalist and Anti Nationalist Organisation for Political Gains</title><content type='html'>Prateek Goyal&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;As we all know that Mr Rahul gandhi is in Madhya pradesh for youth congress membership programme and i am surprised to read his statement in which he equates RSS with SIMI.According to him congress party is the party which is only for people who do not support ideology neither of RSS nor of SIMI.We will discuss about this later lets first compare between RSS and SIMI.lets put some light on some facts about SIMI.The Students Islamic Movement of India (SIMI which is a banned organisation and proscribed under the Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967. It is an islamic fundamental organisation which wanted to convert India in to islamic state by using force or violence.This organisation believes in establishing sharia based islamic rule in India by mobilising youth and involving them in terrorist activities.For the kind information of Shri Rahul Gandhiji SIMI doest not believe in secularism as well as Indian Constitution.According to the ideology of SIMI Nationalism,Democracy,Secularism are against Islam and we all know these are the three things which prevails in our country and our constitution is based on it.Not only this according to the SIMI, Al Qaeda chief Osama bin Laden is an outstanding example of a true Mujahid, who has undertaken Jihad on behalf of the 'ummah'(muslim brotherhood).SIMI was closely associated with organisations like Hizbul mujahiddin,jammat -e-islam units of pakistan and bangladesh,lashkar-e-toiba,ISI and as we know all these organisations are enemies of our country which are responsible for all the terror plots in our nation.So basically SIMI is an organistion who was hell bound to destroy peace and harmony of our country,who is responsible for creating communal discord between our own countrymen and who consider Osama bin Laden as a true believer of Islam and respect him as an 'Islamic Hero' .According to my view any sensible person will consider organisations like this as a terrorist organisation or organisation involved in promotion of militancy and will consider members of this organisation as anti national elements who are enemies of India.Now lets discuss about the other organisation which is know as RSS.Rashtriya Swayamsewak Sangh or National Volunteer organisation . The name itself depicts that this organisation works on the ideology of nationalism.Have you ever heard about the indulgence of RSS in any anti national activity ?I think everybody will say a big no to this question but there are some people who are misguided about RSS.So inorder to clear thier views lets find out what this organisation is all about?Rashtriya Swayamsewak Sangh is an organisation which was founded by Dr keshav baliram Hedgewar in the year 1925 to protest against british imperialism.Since that time RSS volunteers have participated in many social and political movements for the betterment of nation.There are many organisation like Vanvasi Kalyan Ashram,Ekal vidyalaya,Bhartiya Kisan Sangh , Bharatiya Mazdoor Sangh, Vidya Bharati, Seva Bharati who are working under the banner of RSS for the development of socially deprived and economically poor countrymen.It is involved in various social reforms like it has promoted training of dalits to work as a temple high priest which is a place generally reserved for the brahmin society .There is nothing such as casteism in RSS .Let me describe you one incidence when Mahatama Gandhi visited one RSS camp at wardha and later on he commented "When i visited the RSS Camp. I was very much surprised by discipline and absence of untouchablity .RSS has always worked in the favour of society .RSS volunteers are famous for their relief and rehabilitation work during natural calamities ( Gujrat earth quake,Tsunami,Orissa cyclone and many more) and for running more then 1 lakh service programmes in Education ,health care,rural development,tribal liberation,village self sufficiency and the rehabilitaion of disable children. Not only this right from Land reform (Bhoodan Movement) ,Rashtriya swayamsewak sangh has participated in Liberation of Dadra and Nagar Haveli and Goa,India-China war of1962 and were also involved in protecting Sikhs during 1984 anti sikh riots .So this organisation seems to have done work for the welfare of nation and can be declare as a patriotic organisation.But then also people are equating RSS with SIMI its just like equating a patriot and an antinational which is not at all fair in the view of a common Indian.Before i put a full stop to this discussion lets take in to account Mr Rashid Alvi Honourable Member of Indian National Congress .Hecommented on the day of VIJAYDIWAS (day of kargil martyrs) that "Kargil is not a thing to celebrate.The war was fought in our territory.We didnt even come to know when the pakistani army crossed and built bunkers inside our territory.Its only the NDA which can celebrate and on top of that other leader of Congress party Mr Shri Prakash Jaiswal didnt even know when the kargil war was fought and won.So before making such irresponsible comments Mr rahul Gandhi should think first and should not utter something which is totally irrelevant.Last but not least a responsible and sensible human being can easily differentiate between nationalist and antinationalist organisations&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-7386541810246737271?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/7386541810246737271/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=7386541810246737271' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/7386541810246737271'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/7386541810246737271'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/equating-nationalist-and-anti.html' title='Equating Nationalist and Anti Nationalist Organisation for Political Gains'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-6210140907422810095</id><published>2010-10-13T02:24:00.000-07:00</published><updated>2010-10-13T02:26:36.430-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Congressmen'/><title type='text'>The Haircut एंड Congressmen</title><content type='html'>A Must Read: The Haircut &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;        One day a florist went to a barber for a haircut. After the cut, he asked about his bill, and the barber replied, 'I cannot accept money from you. I'm doing community service this week.' The florist was pleased and left the shop. When the barber went to open his shop the next morning, there was a 'thank you' card and a dozen roses waiting for him at his door.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;        Later, a cop comes in for a haircut, and when he tries to pay his bill, the barber again replied, 'I cannot accept money from you. I'm doing community service this week.' The cop was happy and left the shop. The next morning when the barber went to open up, there was a 'thank you' card and a dozen donuts waiting for him at his door.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;        Then a Congressman came in for a haircut, and when he went to pay his bill, the barber again replied, 'I can not accept money from you. I'm doing community service this week.' The Congressman was very happy and left the shop. The next morning, when the barber went to open up, there were a dozen Congressmen lined up waiting for a free haircut.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;        And that, my friends, illustrates the fundamental difference between the citizens of our country and the politicians who run it.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;        BOTH POLITICIANS AND DIAPERS NEED TO BE CHANGED OFTEN AND FOR THE SAME REASON!&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;        If you don't forward this you have no sense of humor. Nothing bad will happen, however, you must live with yourself knowing that laughter is not in your future. Now send it to everyone you know.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;        Vr not changing our politicians every 5 years.It's high time we did itn&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-6210140907422810095?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/6210140907422810095/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=6210140907422810095' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/6210140907422810095'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/6210140907422810095'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/haircut-congressmen.html' title='The Haircut एंड Congressmen'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-1921498945559486084</id><published>2010-10-13T02:03:00.001-07:00</published><updated>2010-10-13T02:03:39.864-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अयोध्या'/><title type='text'>अयोध्या में रामजन्म भूमि का मामला</title><content type='html'>हिंदू लॉ पर हाथ नहीं डालना चाहता मुस्लिम पक्ष&lt;br /&gt;सुहेल वहीद &lt;br /&gt;लखनउ। अयोध्या विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले पर आस्था के हावी होने का हल्ला मचाने वालों को शायद पता ही नहीं है कि धार्मिक आस्था भारतीय कानून में एक तथ्य है। आस्था को कानूनी जामा पचास के दशक में पहनाया जा चुका है, तो फैसला आस्था की बुनियाद पर ही होना था और मुद्दा भी आस्था ही थी। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जान बूझकर अदालत में रामलला को पार्टी नहीं बनाया। बोर्ड वकील जफरयाब जीलानी का तर्क है कि हम विवादित स्थल पर रामलला के वजूद को ही नहीं मानते। समाचार पत्र नवदुनिया से चर्चा में वह कहते हैं कि जिस दिन हम वहां रामलला को स्वीकार कर लेंगे मुकदमा हार जाएंगे। उधर हिंदू पक्ष के एक पक्षकार श्रीराम जन्मभूमि पुनरूद्धार समिति की वकील रंजना अग्निहोत्री ने अदालत में तर्क दिया था कि जब सुन्नी वक्फ बोर्ड ने रामलला को पार्टी ही नहीं बनाया तो वह एडवर्स पजेशन का दावा किससे कर रहे हैं। विवादित जगह वह मांग किससे रहे हैं। मुस्लिम पक्ष ने जान-बूझ कर रामलला को पार्टी नहीं बनाया, क्योंकि रामलला को पार्टी बनाने का मतलब हिंदू लॉ को छेड़ना था और मुस्लिम पक्ष इसे छेड़ना नहीं चाहता, क्योंकि इस पर हाथ डालने का मतलब है कि बात मुस्लिम पर्सनल लॉ तक पहुंच जाएगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-1921498945559486084?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/1921498945559486084/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=1921498945559486084' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/1921498945559486084'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/1921498945559486084'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/blog-post_9149.html' title='अयोध्या में रामजन्म भूमि का मामला'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-3398338285244681952</id><published>2010-10-13T01:43:00.000-07:00</published><updated>2010-10-13T01:46:01.108-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अयोध्या'/><title type='text'>भारतीय पुरातत्व एवं तोजो इंटरनेशनल की विश्वसनीयता</title><content type='html'>अयोध्या प्रकरण पर प्रयाग उच्च न्यायालय की विशेष पीठ द्वारा 30 सितम्बर को दिये गये निर्णय पर अपने-अपने चश्मे के अनुसार विभिन्न दल, समाचार पत्र, पत्रिकाएं तथा दूरदर्शन वाहिनियां बोल व लिख रही हैं। इस निर्णय में मुख्य भूमिका भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और उसकी उत्खनन इकाई ने निभाई है। &lt;br /&gt;  1992 में बाबरी ढांचे के विध्वंस के बाद 1993 में तत्कालीन राष्ट्रपति डा. शंकरदयाल शर्मा ने सर्वोच्च न्यायालय से यह पूछा था कि क्या तथाकथित बाबरी मस्जिद किसी खाली जगह पर बनायी गयी थी या उससे पूर्व वहां पर कोई अन्य भवन था ? इस प्रश्न पर ही यह सारा मुकदमा केन्द्रित था।&lt;br /&gt;  सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रश्न से बचते हुए अपनी बला प्रयाग उच्च न्यायालय के सिर डाल दी। उच्च न्यायालय ने इसके लिए तीन न्यायाधीशों की विशेष पीठ बनाकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का सहयोग मांगा। पुरातत्व विभाग ने कनाडा के विशेषज्ञों के नेतृत्व में तोजो इंटरनेशनल कंपनी की सहायता ली। उसने राडार सर्वे से भूमि के सौ मीटर नीचे तक के चित्र खींचे। इनसे स्पष्ट हो गया कि वहां पर अनेक फर्श, खम्भे तथा मूर्तियां आदि विद्यमान हैं।&lt;br /&gt;   भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इसके बाद वहां कुछ स्थानों पर खुदाई करायी। इससे भी वहां कई परतों में स्थित मंदिर के अवशेषों की पुष्टि हो गयी। इस रिपोर्ट के आधार पर तीनों माननीय न्यायाधीशों ने एकमत से यह कहा कि वहां पहले से कोई हिन्दू भवन अवश्य था। अर्थात राष्ट्रपति जी के प्रश्न का स्पष्ट और निर्विवाद उत्तर प्राप्त हो गया। &lt;br /&gt;  इसके साथ मुकदमे में जो सौ से अधिक प्रश्न और उभरे, अधिकांश विद्वानों का मानना है कि उन पर तीनों न्यायाधीशों ने अपनी वैचारिक, राजनीतिक तथा मजहबी पृष्ठभूमि के आधार पर निर्णय दिया है।&lt;br /&gt;   इसके बाद भी रूस, चीन तथा अरब देशों के हाथों बिके हुए विचारशून्य वामपंथी लेखक फिर उन्हीं गड़े मुर्दों को उखाड़ रहे हैं कि वहां पशुओं की हड्डियां मिली हैं और चूना-सुर्खी का प्रयोग हुआ है, जो इस्लामी काल के निर्माण को दर्शाता है; पर वे उन मूर्तियों तथा शिलालेखों को प्रमाण नहीं मानते, जो छह दिसम्बर, 92 की कारसेवा में प्राप्त हुए थे। उनका कहना है कि उन्हें कारसेवकों ने कहीं बाहर से लाकर वहां रखा है।&lt;br /&gt;  इन अक्ल के दुश्मनों से कोई पूछे कि बाबरी ढांचा इस्लामी नहीं तो क्या हिन्दू निर्माण था ? सभी विद्वान, इतिहास तथा पुरातत्व की रिपोर्ट पहले से ही इसे कह रहे थे और अब तो तीनों न्यायाधीशों ने भी इसे मान लिया है; पर जो बुद्धिमानों की बात मान ले, वह वामपंथी कैसा ? चूना-सुर्खी का प्रयोग भारत के लाखोंं भवनों में हुआ है। सीमेंट तथा सरिये से पहले निर्माण में चूना-सुर्खी का व्यापक प्रयोग होता था। इस आधार पर तो पांच-सात सौ वर्ष पुराने हर भवन को इस्लामी भवन मान लिया जाए ?&lt;br /&gt;  जहां तक छह दिसम्बर की बात है, तो उस दिन दुनिया भर का मीडिया वहां उपस्थित था। क्या किसी चित्रकार के पास ऐसा कोई चित्र है, जिसमें कारसेवक बाहर से लाकर मूर्तियां या शिलालेख वहां रखते दिखाई दे रहे हों ? इसके विपरीत प्रायः हर चित्रकार के पास ऐसे चलचित्र (वीडियो) हैं, जिसमें वे शिलालेख और मूर्तियां ढांचे से प्राप्त होते तथा कारसेवक उन्हें एक स्थान पर रखते दिखाई दे रहे हैं। हजारों चित्रकारों के कैमरों में उपलब्ध चित्रों से बड़ा प्रमाण और क्या हो सकता है ?&lt;br /&gt;   न्यायालय के मोर्चे पर पिटने के बाद अब वामपंथी इस बात को सिर उठाये घूम रहे हैं कि प्रमाणों के ऊपर आस्था को महत्व दिया गया है, जो ठीक नहीं है और इससे भविष्य में कई समस्याएं खड़ी हो जाएंगी, जबकि सत्य तो यह है कि न्यायालय ने पुरातत्व के प्रमाणों को ही अपने निर्णय का मुख्य आधार बनाया है।&lt;br /&gt;  इस निर्णय से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और तोजो इंटरनेशनल के प्रति दुनिया भर में विश्वास जगा है। भारत में हजारों ऐसी मस्जिद, मजार और दरगाह हैं, जो पहले हिन्दू मंदिर या भवन थे। भारतीय इतिहास ग्रन्थों में इनका स्पष्ट उल्लेख है। लोकगीतों में भी ये प्रसंग तथा इनकी रक्षा के लिए बलिदान हुए हिन्दू वीरों की कथाएं जीवित हैं। यद्यपि अपने स्वभाव के अनुसार वामपंथी इसे नहीं मानते।&lt;br /&gt;  क्या ही अच्छा हो यदि ऐसे कुछ भवनों की जांच इन दोनों संस्थाओं से करा ली जाए। काशी विश्वनाथ और श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा की मस्जिदें तो अंधों को भी दिखाई देती हैं। फिर भी उनके नीचे के चित्र लिये जा सकते हैं। दिल्ली की कुतुब मीनार, आगरा का ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, भोजशाला (धार, म0प्र0), नुंद ऋषि की समाधि (चरारे शरीफ, कश्मीर), टीले वाली मस्जिद, (लक्ष्मण टीला, लखनऊ), ढाई दिन का झोपड़ा (जयपुर) आदि की जांच से सत्य एक बार फिर सामने आ जाएगा।&lt;br /&gt;  मुसलमानों के सर्वोच्च तीर्थ मक्का के बारे में कहते हैं कि वह मक्केश्वर महादेव का मंदिर था। वहां काले पत्थर का विशाल शिवलिंग था, जो खंडित अवस्था में अब भी वहां है। हज के समय संगे अस्वद (संग अर्थात पत्थर, अस्वद अर्थात अश्वेत अर्थात काला) कहकर मुसलमान उसे ही पूजते और चूमते हैं। इसके बारे में प्रसिद्ध इतिहासकार स्व0 पी.एन.ओक ने अपनी पुस्तक ‘वैदिक विश्व राष्ट्र का इतिहास’ में बहुत विस्तार से लिखा है।&lt;br /&gt;  अरब देशों में इस्लाम से पहले शैव मत ही प्रचलित था। इस्लाम के पैगम्बर मोहम्मद के चाचा उम्र बिन हश्शाम द्वारा रचित शिव स्तुतियां श्री लक्ष्मीनारायण (बिड़ला) मंदिर, दिल्ली की ‘गीता वाटिका’ में दीवारों पर उत्कीर्ण हैं। क्या ही अच्छा हो कि मक्का के वर्तमान भवन के चित्र भी तोजो इंटरनेशनल द्वारा खिंचवा लिये जाएं। राडार एवं उपग्रह सर्वेक्षण से सत्य प्रकट हो जाएगा।&lt;br /&gt;  क्या स्वयं को दुनिया का सबसे बड़ा बुद्धिवादी मानने वाले वामपंथी तथा प्रयाग उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद छाती पीट रहे मजहबी नेता इस बात का समर्थन करेंगे ?   &lt;br /&gt;विजय कुमार - &lt;br /&gt;संकटमोचन आश्रम, रामकृष्णपुरम्@6, नई दिल्ली - 22)&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-3398338285244681952?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='related' href='http://shreeramjanmabhoomi.org/' title='भारतीय पुरातत्व एवं तोजो इंटरनेशनल की विश्वसनीयता'/><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/3398338285244681952/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=3398338285244681952' title='1 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/3398338285244681952'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/3398338285244681952'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/blog-post_6139.html' title='भारतीय पुरातत्व एवं तोजो इंटरनेशनल की विश्वसनीयता'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-4302118995012620237</id><published>2010-10-13T00:00:00.000-07:00</published><updated>2010-10-13T00:03:12.814-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='अयोध्या'/><title type='text'>अयोध्या पर सेक्युलर समूह का छल</title><content type='html'>अयोध्या पर हाई कोर्ट के निर्णय के बाद विभिन्न कोनों से आई&lt;br /&gt;प्रतिक्रियाएं विचारणीय हैं। जहां मुकदमे के पक्षकारों ने संयम और सद्भाव&lt;br /&gt;दिखाया वहीं कुछ जाने-माने वामपंथी बुद्धिजीवियों ने निर्णय का विरोध&lt;br /&gt;किया है। रोमिला थापर, डीएन झा, केएन पणिक्कर जैसे कई लोगों ने संयुक्त&lt;br /&gt;हस्ताक्षर करके कहा है कि यह निर्णय देश के सेक्युलर चरित्र पर आघात है&lt;br /&gt;और इससे न्यायपालिका की प्रतिष्ठा गिरी है। उन्होंने यह भी कहा है कि&lt;br /&gt;विवादित स्थल पर पहले राममंदिर होने की बात एक धोखाधड़ी है। एक बार फिर यह&lt;br /&gt;एक उचित अवसर है कि देश में साप्रदायिक विभेद और तनाव बढ़ाने वालों को&lt;br /&gt;ठीक से पहचाना जाए। सच तो यह है कि मुसलमानों की तरफ से तरह-तरह की&lt;br /&gt;शिकायत, मांग और विरोध आदि को मुस्लिम नेताओं ने उतना नहीं उठाया जितना&lt;br /&gt;ऐसे लिबरल-सेक्युलर कहलाने वाले हिंदू बुद्धिजीवियों ने। ऐसा करते इनमें&lt;br /&gt;न कोई न्याय-बोध रहता है, न साविधानिक या निष्पक्ष आधार। ऐसे लोगों ने&lt;br /&gt;मुस्लिमों के स्वयंभू हितचिंतक बनकर देश के साप्रदायिक वातावरण को जितना&lt;br /&gt;बिगाड़ा है उतना किसी अन्य चीज ने नहीं। इन सेक्युलर बौद्धिकों का&lt;br /&gt;वास्तविक चरित्र घोर पक्षपाती रहा। उनकी हर सक्रियता ने दोनों समुदायों&lt;br /&gt;की मानसिकता पर हानिकारक प्रभाव डाला है। अयोध्या प्रसंग में भी यह बात&lt;br /&gt;बार-बार दिखाई पड़ी। थापर, झा, पणिक्कर आदि ये वही लोग हैं जिन्होंने 1989&lt;br /&gt;में 'पॉलिटिकल एब्यूज ऑफ हिस्ट्री' नामक एक उग्र पुस्तिका लिखकर अयोध्या&lt;br /&gt;विवाद को एक नया आयाम दिया था। उसमें श्रीराम के अस्तित्व को ही नकारा&lt;br /&gt;गया था और हिंदू पक्ष को सीधे-सीधे राजनीति-प्रेरित कहकर हटाने, हराने की&lt;br /&gt;मांग रखी गई थी। इसने विवाद को बुरी तरह बदल दिया। इसके पहले तक विवादित&lt;br /&gt;स्थल पर मात्र कानूनी लड़ाई चल रही थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कभी भी मुस्लम पक्ष ने श्रीराम के अस्तित्व आदि पर प्रश्न नहीं उठाया था।&lt;br /&gt;वे तो मात्र वर्तमान नागरिक कानून आदि के आधार पर विवादित ढांचे को अपने&lt;br /&gt;हाथ में रखने की जिद कर रहे थे। इतिहास पर उन्होंने प्रश्न नहीं उठाया&lt;br /&gt;था। यह तो ऐसे सेक्युलर ठग थे, जिन्होंने राम के जन्म का 'ऐतिहासिक&lt;br /&gt;प्रमाण' मांगकर मामला बिगाड़ा। ऐसे बौद्धिकों के हस्तक्षेप में किसी&lt;br /&gt;समाधान की चाह नहीं थी। वे तो बस अपनी हिंदू-विरोधी विचारधारा सब पर&lt;br /&gt;थोपना चाहते थे। बाद में, प्रधानमंत्री नरसिंह राव द्वारा बनाई गई सरकारी&lt;br /&gt;समिति ने भी इनके बारे में यही पाया। पहले तो उन्हीं इतिहासकारों ने&lt;br /&gt;बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के आधिकारिक पैरोकार बनकर मुस्लिम पक्ष को आपसी&lt;br /&gt;समाधान करने से रोका। उन्हें भरोसा दिलाया कि राम या रामजन्मभूमि का कोई&lt;br /&gt;प्रमाण नहीं है और इसी से विवादित स्थल पर उनका एकमात्र हक है, लेकिन जब&lt;br /&gt;प्रधानमंत्री चंद्रशेखर द्वारा दोनों पक्षों को बिठाकर प्रमाणों की&lt;br /&gt;जांच-पड़ताल होने लगी तो मुस्लिम पक्ष के यही पैरोकार बहाना बनाकर बीच&lt;br /&gt;रास्ते भाग खड़े हुए। इन सेक्युलर-वामपंथी बौद्धिकों की नीयत कितनी खराब&lt;br /&gt;थी, यह तब पुन: प्रमाणित हुआ जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मार्च 2003 में&lt;br /&gt;भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को अयोध्या में विवादित स्थल की खुदाई का आदेश&lt;br /&gt;दिया ताकि वहां पहले से राममंदिर होने या न होने का प्रमाण पाया जा सके।&lt;br /&gt;इस पर सबसे आक्रामक प्रतिक्रिया इन्हीं इतिहासकारों की आई जो अब तक&lt;br /&gt;रामजन्मभूमि या मंदिर का प्रमाण मांगते रहे थे! खुदाई का आदेश देने के&lt;br /&gt;लिए इन्होंने न्यायाधीशों पर पक्षपात का आरोप लगाने में भी देर नहीं&lt;br /&gt;लगाई। पुरातत्व सर्वेक्षण पर भी लाछन जड़ा कि वे बेईमानी करेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अयोध्या मसले के समाधान में इन कथित सेक्युलर लोगों ने हमेशा अड़ंगा लगाया&lt;br /&gt;है। ऐसे लोगों ने 1989-90 में यही किया, फिर वही बाद में और आज भी वे यही&lt;br /&gt;कर रहे हैं। अत: आवश्यक है कि ऐसे कथित सेक्युलर लिबरल बुद्धिजीवियों की&lt;br /&gt;घातक राजनीतिक भूमिका ठीक से परखी जाए। अभी जिस तरह हिंदू-मुस्लिम&lt;br /&gt;समुदायों तथा उनके नेताओं ने न्यायालय के निर्णय पर संयम दिखाया, वह&lt;br /&gt;प्रसन्नता और संतोष की बात होनी चाहिए थी। उनके लिए तो विशेषकर जो स्वयं&lt;br /&gt;को धर्म-मजहब से ऊपर रहकर उन्नति, विकास आदि के लिए फिक्रमंद बताते हैं,&lt;br /&gt;किंतु ठीक इन्हीं लोगों ने एक समुदाय विशेष को भड़काने के लिए फिर&lt;br /&gt;अनावश्यक बयानबाजी आरंभ कर दी है। इस लिबरल-सेक्युलर बौद्धिक गिरोह की&lt;br /&gt;कुटिलता तब और स्पष्ट दिखती है जब याद करें कि यही लोग निर्णय आने से&lt;br /&gt;पहले न्यायालय का 'जो भी निर्णय हो' वह मानने की भरपूर वकालत कर रहे थे।&lt;br /&gt;संविधान की सर्वोच्चता और सामुदायिक सद्भाव को सर्वोपरि रखने की सीख दे&lt;br /&gt;रहे थे। ये सब तर्क उन्होंने निर्णय आते ही तिरोहित कर दिया। क्यों?&lt;br /&gt;कयोंकि उनके सभी तकरें के पीछे सदैव एक घातक राजनीति छिपी होती है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;30 सितंबर से पहले के उनके सभी तर्क एक अनुमान पर आधारित थे कि निर्णय&lt;br /&gt;कुछ और आएगा। अर्थात एक विशेष प्रकार का निर्णय करना, करवाना और मनवाना&lt;br /&gt;ही उनका लक्ष्य था और है। इसीलिए यह निर्णय आने के बाद सामुदायिक शाति&lt;br /&gt;बने रहने पर ठीक यही लोग बुरी तरह असंतुष्ट हैं। वे तरह-तरह से अपनी&lt;br /&gt;अप्रसन्नता प्रकट कर रहे हैं। एक वामपंथी इतिहासकार कह रहे हैं कि&lt;br /&gt;न्यायालय ने कानून का ध्यान छोड़कर मानो पंचायत का फैसला सुना दिया है।&lt;br /&gt;दूसरी प्रखर सेक्युलरवादी बौद्धिका कह रही हैं कि अब मुसलमानों का भारतीय&lt;br /&gt;राजसत्ता से विश्वास उठ गया है। तीसरा इसे न्यायिक नहीं, राजनीतिक निर्णय&lt;br /&gt;बता रहा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;[एस. शंकर: लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं]&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-4302118995012620237?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/4302118995012620237/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=4302118995012620237' title='0 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/4302118995012620237'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/4302118995012620237'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/blog-post_13.html' title='अयोध्या पर सेक्युलर समूह का छल'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-5859753385881924977</id><published>2010-10-07T04:45:00.000-07:00</published><updated>2010-10-07T04:46:29.482-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='राहुल'/><title type='text'>राहुल उंटपटांग गांधी के शगूफे</title><content type='html'>कांग्रेस के युवराज और नए-नवेले नेता राहुल बाबा फिर चर्चा में हैंं। राहुल बाबा जहां जाते हैं कोई न शिगूफा छोड़ ही देते हैं। इस बार मध्यप्रदेश दौरे पर आए तो आरएसएस की तुलना सिमी से कर दिया। टीकमगढ़ के दौरे पर आए राहुल ने कह दिया कि संघ और सिमी की विचारधारा को छोड़कर आने वालों को ही कांगे्रस में जगह मिलेगी। 6 अक्टूबर को राजधानी भोपाल में जब पत्रकारों ने राहुल से उनके टीकमगढ वाले बयान के बाबत पूछा तो उन्होंने कहा - आरएसएस और सिमी दोनों ही कट्टरवादी संगठन है। वैचारिक कट्टरता की दृष्टि से इनमें कोई फर्क नहीं है। यहां के लोगों में चर्चा है कि राहुल बाबा मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह की बोली बोल रहे है। बोलना भी चाहिए, राहुल आखिर अपने सलाहकार की भाषा न बोले तो किसकी बोले! राहुल को कौन समझाये कि उनके शगूफे और सूर्रे से उनकी, उनकी अम्मा और पूरी पार्टी की भद्द पिट रही है। राहुल जब कांग्रेस का असत्मसम्मान ढूंढते हुए बंगाल के दोरे पर गए थे तो वहां की युवतियों ने जरूर उनके लिए सीटियां बजाई और राहुल-राहुल के नारे लगाए, लेकिन ममता बहन को वे नाराज ही कर आए थे। राहुल ने माक्र्सवाद को मरी हुई विचारधारा कह कर वहां के वामपंथियों को नाराज कर दिया था। वहां उन्होंने कम्युनिस्टों के बारे में कहा था कि - यह मृत विचारधारा हो गई है जो क्यूबा सहित पूरे विश्व में असफल हो चुकी है। माकपा महासचिव प्रकाश करात ने पलटवार करते हुए राहुल की राजनीतिक समझ पर ही सवाल खड़ा कर दिया था। करात ने कहा कि राहुल में वो राजनैतिक समझ नहीं है जो जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी में था।&lt;br /&gt;संघ और सिमी से तुलना वाले बयान को लेकर राहुल फिर विवादों में घिर गए हैंं। हालांकि संघ ने उनके बयान को शिगूफा मानकर हल्के में लिया और उनके बयान को हवा में उड़ा दिया। दिल्ली से लेकर भोपाल तक भाजपा ने जरूर इसे गंभीरता से लिया और जवाब देने के लिए अपने प्रवक्ताओं को आगे किया। भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि सब प्रकार के प्रयास करने के बावजूद राहुल गांधी का जादू चल नहीं पा रहा है, इसलिए वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। राहुल का यह बयान उनकी ‘राजनैतिक अपरिपक्वता, अज्ञानता और उद्दंडता’ का परिचायक है। मध्यप्रदेश के भाजपा अध्यक्ष प्रभात झा ने तो राहुल का नया नामकरण ही कर दिया। प्रभात झा ने राहुल को ‘उंटपटांग गांधी’ कह दिया। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के लिए तो राहुल बिन बुलाए मेहमान’ ‘हो गए। प्रदेश के मुखिया होने के नाते मुख्यमंत्री ने बड़प्पन दिखाते हुए राहुल को राज्य अतिथि का दर्जा दिया। लेकिन मध्यप्रदेश में राज्य अतिथि बने राहुल ‘अतिथि देवो भवः’ नहीं बन सके। अपने बयान पर उन्हें भाजपा की खरी-खोटी सुननी पड़ी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने कहा कि संघ देशभक्ति का पाठ पढ़ाने के साथ ही राष्ट्रभक्त नागरिकों को तैयार करता है। संघ की सिमी जैसे प्रतिबंधित संगठन से किसी प्रकार की तुलना उचित नहीं है।&lt;br /&gt;हांलाकि संघ ने मध्यप्रदेश में राहुल के बयान को जरा-सा भी तवज्जो नहीं दिया। भोपाल में संघ पदाधिकारियों ने राहुल के बयान को उनका बड़बोलापन और नासमझी भरा बयान मान उसपर चर्चा से भी मनाही कर दी। लेकिन दिल्ली में संघ के पूर्व प्रवक्ता और केन्द्रीय कार्यकारिणी के सदस्य राममाधव ने कहा कि राहुल को निरर्थक बयानबाजी करने से पहले अपना ज्ञानवद्र्धन करना चाहिए। उन्हें संघ और प्रतिबंधित संगठनों के बीच अंतर पता होना चाहिए और कांग्रेस संगठन का इतिहास भी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर पिछले छह दशकों से कट्टरपंथ को बढ़ावा देने का आरोप लग रहा है। श्री राममाधव ने राहुल को सलाह दी कि उन्हें अभी लंबा राजनीतिक सफर तय करना है। उन्हें देश और संगठनों के बारे में बेहतर ज्ञान होना चाहिए। उन्हें और अधिक अध्ययन की जरूरत है। भोपाल से सामाजिक कार्यकर्ता बीएल तिवारी ने राहुल के बयान और कांग्रेस के रवैये पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि भैंसे के आगे बिन बजाए, भैंस रहि पगुराये। ‘‘राहुल और दिग्विजय कांग्रेस के दो भैंस हैं। इनके सामने संघ के लोग बीन क्यों बजा रहे हैं। दोनों गुरु-शिष्य देशद्रही संगठनों और विचारों का समर्थन कर रहे हैं। गौरतलब है कि पिछले दिनों उड़ीसा के दौरे पर राहुल माओवादियों के साथ मंच साझा कर चुके हैं। इसको लेकर उड़ीसा सहित पूरे देश में काफी बवाल मचा था। कश्मीर के सवाल पर उमर अब्दुल्ला का पक्ष लेकर वे पहले ही कांग्रेस की किरकिरी करा चुके हैं। राहुल से शह मिलने के बाद उमर ने पाकिस्तान समर्थक बयान दे डाला। दिग्विजय सिंह पहले ही बटला हाउस, नक्सली समस्या और हिन्दू आतंकवाद के सवाल पर अपना राष्ट्रविरोधी चरित्र उजागर कर चुके हैंं। राहुल ने सिमी से संघ की तुलना कर प्रकाश करात के वक्तव्य का सही सिद्ध कर दिया है। भाजपा ने तो राहुल, दिग्विजय और कांग्रेस को राजनैतिक भाषा में जवाब दे दिया है। लेकिन संघ इस मामले पर चुप ही रहना चाहता है। शायद संघ की चुप्पी ही राहुल को जवाब हो। संघ सुर्रे और शगूफे पर अपना वक्त जाया करना नहीं चाहता। कुछ राजनेताओं को भड़काउ और आपत्तिजनक बयान देने में ही लाभ दिखता है। मुलायम, पासवान, लालू, दिग्विजय, चिदंबरम और राहुल को संघ ने अब इसी श्रेणी में रख दिया है। संभव है आने वाले दिनों में इनके बयानों पर संघ चुप ही रहे जब तक कि ये ‘राजनैतिक अपरिपक्वता, अज्ञानता और उद्दंडता नहीं छोड़ते। संघ को शायद उम्मीद है कि ऐसे नेता आज नही ंतो कल देशद्रोही और देशभक्ति की विचारधारा में फर्क समझेंगे, भले ही वो विचार कट्टर ही क्यों न हो।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/946205114346787330-5859753385881924977?l=lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/feeds/5859753385881924977/comments/default' title='टिप्पणियाँ भेजें'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=946205114346787330&amp;postID=5859753385881924977' title='2 टिप्पणियाँ'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/5859753385881924977'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/946205114346787330/posts/default/5859753385881924977'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://lalmirchi-anilsaumitra.blogspot.com/2010/10/blog-post.html' title='राहुल उंटपटांग गांधी के शगूफे'/><author><name>LALMIRCHI</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13715282948179942550</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://1.bp.blogspot.com/_5rc-kyyzbos/SaKKZm-Oa5I/AAAAAAAAAF8/ZaxU5UpI1N4/S220/DSCF0110.JPG'/></author><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-946205114346787330.post-2713924183509479134</id><published>2010-10-04T04:25:00.001-07:00</published><updated>2010-10-04T04:25:55.776-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Pakistan'/><title type='text'>Pakistan and the U.S. Exit From Afghanistan</title><content type='html'>September 28, 2010 | 0855 GMT&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;By George Friedman&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;By George Friedman&lt;br /&gt;Bob Woodward has released another book, this one on the debate over Afghanistan strategy in the Obama administration. As all his books do, the book has riveted Washington. It reveals that intense debate occurred over what course to take, that the president sought alternative strategies and that compromises were reached. But while knowing the details of these things is interesting, what would have been shocking is if they hadn’t taken place.&lt;br /&gt;It is interesting to reflect on the institutional inevitability of these disagreements. The military is involved in a war. It is institutionally and emotionally committed to victory in the theater of combat. It will demand all available resources for executing the war under way. For a soldier who has bled in that war, questioning the importance of the war is obscene. A war must be fought relentlessly and with all available means.&lt;br /&gt;But while the military’s top generals and senior civilian leadership are responsible for providing the president with sound, clearheaded advice on all military matters including the highest levels of grand strategy, they are ultimately responsible for the pursuit of military objectives to which the commander-in-chief directs them. Generals must think about how to win the war they are fighting. Presidents must think about whether the war is worth fighting. The president is responsible for America’s global posture. He must consider what an unlimited commitment to a particular conflict might mean in other regions of the world where forces would be unavailable.&lt;br /&gt;A president must take a more dispassionate view than his generals. He must calculate not only whether victory is possible but also the value of the victory relative to the cost. Given the nature of the war in Afghanistan, U.S. President Barack Obama and Gen. David Petraeus — first the U.S. Central Command chief and now the top commander in Afghanistan — had to view it differently. This is unavoidable. This is natural. And only one of the two is ultimately in charge.&lt;br /&gt;The Nature of Guerrilla Warfare&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;In thinking about Afghanistan, it is essential that we begin by thinking about the nature of guerrilla warfare against an occupying force. The guerrilla lives in the country. He isn’t going anywhere else, as he has nowhere to go. By contrast, the foreigner has a place to which he can return. This is the core weakness of the occupier and the strength of the guerrilla. The former can leave and in all likelihood, his nation will survive. The guerrilla can’t. And having alternatives undermines the foreigner’s will to fight regardless of the importance of the war to him.&lt;br /&gt;The strategy of the guerrilla is to make the option to withdraw more attractive. In order to do this, his strategic goal is simply to survive and fight on whatever level he can. His patience is built into who he is and what he is fighting for. The occupier’s patience is calculated against the cost of the occupation and its opportunity costs, thus, while troops are committed in this country, what is happening elsewhere?&lt;br /&gt;Tactically, the guerrilla survives by being elusive. He disperses in small groups. He operates in hostile terrain. He denies the enemy intelligence on his location and capabilities. He forms political alliances with civilians who provide him supplies and intelligence on the occupation forces and misleads the occupiers about his own location. The guerrilla uses this intelligence network to decline combat on the enemy’s terms and to strike the enemy when he is least prepared. The guerrilla’s goal is not to seize and hold ground but to survive, evade and strike, imposing casualties on the occupier. Above all, the guerrilla must never form a center of gravity that, if struck, would lead to his defeat. He thus actively avoids anything that could be construed as a decisive contact.&lt;br /&gt;The occupation force is normally a more conventional army. Its strength is superior firepower, resources and organization. If it knows where the guerrilla is and can strike before the guerrilla can disperse, the occupying force will defeat the guerrilla. The occupier’s problems are that his intelligence is normally inferior to that of the guerrillas; the guerrillas rarely mass in ways that permit decisive combat and normally can disperse faster than the occupier can pinpoint and deploy forces against them; and the guerrillas’ superior tactical capabilities allow them to impose a constant low rate of casualties on the occupier. Indeed, the massive amount of resources the occupier requires and the inflexibility of a military institution not solely committed to the particular theater of operations can actually work against the occupier by creating logistical vulnerabilities susceptible to guerrilla attacks and difficulty adapting at a rate sufficient to keep pace with the guerrilla. The occupation force will always win engagements, but that is never the measure of victory. If the guerrillas operate by doctrine, defeats in unplanned engagements will not undermine their basic goal of survival. While the occupier is not winning decisively, even while suffering only some casualties, he is losing. While the guerrilla is not losing decisively, even if suffering significant casualties, he is winning. Since the guerrilla is not going anywhere, he can afford far higher casualties than the occupier, who ultimately has the alternative of withdrawal.&lt;br /&gt;The asymmetry of this warfare favors the guerrilla. This is particularly true when the strategic value of the war to the occupier is ambiguous, where the occupier does not possess sufficient force and patience to systematically overwhelm the guerrillas, and where either political or military constraints prevent operations against sanctuaries. This is a truth as relevant to David’s insurgency against the Philistines as it is to the U.S. experience in Vietnam or the Russian occupation of Afghanistan.&lt;br /&gt;There has long been a myth about the unwillingness of Americans to absorb casualties for very long in guerrilla wars. In reality, the United States fought in Vietnam for at least seven years (depending on when you count the start and stop) and has now fought in Afghanistan for nine years. The idea that Americans can’t endure the long war has no empirical basis. What the United States has difficulty with — along with imperial and colonial powers before it — is a war in which the ability to impose one’s will on the enemy through force of arms is lacking and when it is not clear that the failure of previous years to win the war will be solved in the years ahead.&lt;br /&gt;Far more relevant than casualties to whether Americans continue a war is the question of the conflict’s strategic importance, for which the president is ultimately responsible. This divides into several parts. This first is whether the United States has the ability with available force to achieve its political goals through prosecuting the war (since all war is fought for some political goal, from regime change to policy shift) and whether the force the United States is willing to dedicate suffices to achieve these goals. To address this question in Afghanistan, we have to focus on the political goal.&lt;br /&gt;The Evolution of the U.S. Political Goal in Afghanistan&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;Washington’s primary goal at the initiation of the conflict was to destroy or disrupt al Qaeda in Afghanistan to protect the U.S. homeland from follow-on attacks to 9/11. But if Afghanistan were completely pacified, the threat of Islamist-fueled transnational terrorism would remain at issue because it is no longer just an issue of a single organization — al Qaeda — but a series of fragmented groups conducting operations in Pakistan, Iraq, Yemen, North Africa, Somalia and elsewhere.&lt;br /&gt;Today, al Qaeda is simply one manifestation of the threat of this transnational jihadist phenomenon. It is important to stop and consider al Qaeda — and the transnational jihadist phenomenon in general — in terms of guerrillas, and to think of the phenomenon as a guerrilla force in its own right operating by the very same rules on a global basis. Thus, where the Taliban apply guerrilla principles to Afghanistan, today’s transnational jihadist applies them to the Islamic world and beyond. The transnational jihadists are not leaving and are not giving up. Like the Taliban in Afghanistan, they will decline combat against larger American forces and strike vulnerable targets when they can.&lt;br /&gt;There are certainly more players and more complexity to the global phenomenon than in a localized insurgency. Many governments across North Africa, the Middle East and South Asia have no interest in seeing these movements set up shop and stir up unrest in their territory. And al Qaeda’s devolution has seen frustrations as well as successes as it spreads. But the underlying principles of guerrilla warfare remain at issue. Whenever the Americans concentrate force in one area, al Qaeda disengages, disperses and regroups elsewhere and, perhaps more important, the ideology that underpins the phenomenon continues to exist. The threat will undoubtedly continue to evolve and face challenges, but in the end, it will continue to exist along the lines of the guerrilla acting against the United States.&lt;br /&gt;There is another important way in which the global guerrilla analogy is apt. STRATFOR has long held that Islamist-fueled transnational terrorism does not represent a strategic, existential threat to the United States. While acts of transnational terrorism target civilians, they are not attacks — have not been and are not evolving into attacks — that endanger the territorial integrity of the United States or the way of life of the American people. They are dangerous and must be defended against, but transnational terrorism is and remains a tactical problem that for nearly a decade has been treated as if it were the pre-eminent strategic threat to the United States.&lt;br /&gt;Nietzsche wrote that, “The most fundamental form of human stupidity is forgetting what we were trying to do in the first place.” The stated U.S. goal in Afghanistan was the destruction of al Qaeda. While al Qaeda as it existed in 2001 has certainly been disrupted and degraded, al Qaeda’s evolution and migration means that disrupting and degrading it — to say nothing of destroying it — can no longer be achieved by waging a war in Afghanistan. The guerrilla does not rely on a single piece of real estate (in this case Afghanistan) but rather on his ability to move seamlessly across terrain to evade decisive combat in any specific location. Islamist-fueled transnational terrorism is not centered on Afghanistan and does not need Afghanistan, so no matter how successful that war might be, it would make little difference in the larger fight against transnational jihadism.&lt;br /&gt;Thus far, the United States has chosen to carry on fighting the war in Afghanistan. As al Qaeda has fled Afghanistan, the overall political goal for the United States in the country has evolved to include the creation of a democratic and uncorrupt Afghanistan. It is not clear that anyone knows how to do this, particularly given that most Afghans consider the ruling government of President Hamid Karzai — with which the United States is allied — as the heart of the corruption problem, and beyond Kabul most Afghans do not regard their way of making political and social arrangements to be corrupt.&lt;br /&gt;Simply withdrawing from Afghanistan carries its own strategic and political costs, however. The strategic problem is that simply terminating the war after nine years would destabilize the Islamic world. The United States has managed to block al Qaeda’s goal of triggering a series of uprisings against existing regimes and replacing them with jihadist regimes. It did this by displaying a willingness to intervene where necessary. Of course, the idea that U.S. intervention destabilized the region raises the question of what regional stability would look like had it not intervened. The danger of withdrawal is that the network of relationships the United States created and imposed at the regime level could unravel if it withdrew. America would be seen as having lost the war, the prestige of radi
