रविवार, 1 दिसंबर 2013

हिंदुत्व की राजनीतिक चिनगारी को हवा देती दीदी

सुषमा स्वराज तो पहले से ट्वीट कर रही थीं, अब भाजपा नेत्री उमाश्री भारती भी अब ट्विटर पर हैं. कभी-कभी ट्विट करती हैं, इसलिए चर्चित भी होता है. वे दिग्विजय सिंह की तरह कुछ उलूल-जुलूल नहीं लिखती. जो भी लिखती हैं सोच-समझकर शिद्दत के साथ. आज भी उन्होंने ट्विट किया तो बवाल हो गया. साध्वी उमाश्री भारती ने ट्वीट किया कि 'बापू निर्दोष हैं। उन्हें सोनिया और राहुल गांधी का विरोध करने की सजा भुगतनी पड़ रही है.
कांग्रेस शासित राज्यों में उन पर झूठा मुकदमा दर्ज किया गया। संत समाज उनके साथ है।' चूंकि ट्विट पर शब्दों की सीमा की होती है. कई बार लोग अर्थ का अनर्थ लगा लेते हैं. इसलिए ट्विट पर कही अपनी बातों को विस्तार से बताने के लिए उमा भारती ने आज प्रेस कांफ्रेंस की. आज के प्रेस कांफ्रेंस में वे अपने पूरे रौ में थीं. उन्होंने अपनी ओर से दो बातें बताई. पहली कि अयोध्या का मुद्दा आज भी विवादित है और न्यायालय में मामला चल रहा है. इसका विवाद का एकमात्र समाधान यही है कि वहाँ भगवान राम का मंदिर बने. मामला कोर्ट के बाहर भी सुलझाया जा सकता है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, मुलायम सिंह यादव और लालकृष्ण आडवाणी चाहें तो अयोध्या का विवाद कोर्ट के बाहर सुलझ सकता है. अयोध्या में चौरासी कोसी परिक्रमा को रोकना धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है. विहिप के निर्णय का उन्होंने समर्थन किया और यह भी कहा कि इस मामले में भाजपा का निर्णय और विचार चाहे जो हो लेकिन वे विहिप के साथ हैं. विहिप जो भी कहेगी वे उसका साथ देंगी. प्रेस को उन्होंने एक और बात कही. यह बात और भी ज्यादा महत्वपूर्ण थी. उन्होंने कहा कि संत आशाराम बापू पचहत्तर वर्ष के है. बहुत कम लोगों को पता है कि वे गृहस्थ संत है है. उनका एक बेटा और एक बेटी भी है. बापू की बेटी उनकी मित्र हैं. उसकी उम्र भी उमा भारती के बराबर ही है. इसलिए वे भी बापू की बेटी जैसी ही हैं. सुश्री भारती ने आशाराम बापू से टेलीफोन पर हुई बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि उनके ऊपर लगे आरोप राजनीति से प्रेरित है. चूंकि वे राहुल-सोनिया की खुलेआम मजाक उड़ाते हैं, उनकी आलोचना करते है, इसलिए उन्हें फंसाने की कोशिश हो रही है. दरअसल उमाश्री भारती ने आशाराम बापू के बहाने हिंदुत्व के मुद्दे को फिर से हवा दे दी है. चाहे अयोध्या का मुद्दा हो या संत आशाराम बापू का समर्थन, दोनों ही हिंदुत्व के सवाल हैं. एक तरफ तो उन्होंने आशाराम बापू को निर्दोष बताया, वहीं पीडित लडकी के प्रति भी पूरी सहानुभूति व्यक्त की. उन्होंने कहा कि वे किसी लडकी या महिला की रक्षा के लिए अपनी जान भी दे सकती हैं. वे महिलाओं की सुरक्षा और संवेदना से कोई समझौता नहीं कर सकतीं. यदि बापू दोषी पाए गए तो सबसे पहले एक बेटी के रूप में वे उनको प्रताडित करेंगी और सजा देंगी. लेकिन इसके साथ ही उन्होंने हिन्दू संतो के साथ होने वाले प्रताडना के मामलों को भी उठाया. वर्षों पहले तमिलनाडु में कांची के शकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती के साथ हुए ऐसे ही मामले को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस घटना को कभी नहीं भुलाया जा सकता. हालांकि बाद में स्वामी जयेन्द्र सरस्वती निर्दोष सिद्ध हुए और आरोप लगाने वाले परिवार ने भी स्वीकार किया था कि उसका आरोप झूठा था. लेकिन भारत के सबसे बड़े संत को महीनों जेल में रहना पड़ा था. उनकी मान-मर्यादा और सम्मान को कलंकित किया गया. उन्होंने जोर देकर कहा कि डर है कि इस मामले में भी कहीं ऐसा ही न हो. उन्होंने राजस्थान पुलिस की इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि कार्यवाई से पहले पुलिस छानबीन कर रही है. सुश्री भारती को इस बात का भी डर है कि कहीं एससी, एसटी और महिलाओं के लिए बने क़ानून का दुरुपयोग न हो. लोगों का इन कानूनों से भरोसा न उठ जाए. उमाश्री भारती भले ही भोपाल में हों, भाजपा में दरकिनार हों. लेकिन चरखारी से विधायक साध्वी उमा भारती ने भोपाल से माइक्रो ब्लोगिंग के जरिये राष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है. उनको पता है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री सेक्युलरिज्म की राजनीति कर रहे हैं. गुजरात के मुख्यमंत्री और भाजपा के प्रधानमंत्री छुपे दावेदार नरेन्द्र दामोदर मोदी विकास और सुशासन की राजनीति कर रहे हैं. ऐसे में हिदू राजनीति का स्पेस हैं. आरएसएस और उसके संगठन सेक्युलर और विकासवादी राजनीति से बहुत ज्यादा खुश नहीं हैं. वे हिंदुत्व के मुद्दे को ठंढे बस्ते में भी रख सकते. उमाश्री भारती ने हिन्दू राजनीति के स्पेस को समझा है. वे गाय-गंगा और नारी के अस्तित्व के लिए बोलती रही हैं. हिन्दू संटन की प्रताडना और अयोध्या का मुद्दा उठाकर हिन्दू राजनीति के केंद्र में आ गयी हैं. मसला महज आशाराम बापू का या चौरासी कोसी परिक्रमा का नहीं है. असली मसला हिन्दू राजनीति के खाली पड़े स्पेस को भरने का है. उमा भारती ने हिन्दू राजनीति की कटी डोर को थामने की पहल की है. भाजपा की फायर ब्रांड नेता उमा भारती फिर से हिंदुत्व की राजनीतिक चिनगारी को हवा दे रही हैं.

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