रविवार, 1 दिसंबर 2013

कलह, बगावत और असंतोष ने बिगाड़ा कांग्रेस का खेल

तोड़-फोड़, प्रदर्शन, इस्तीफा और आत्महत्या पर उतारू हुए कांग्रेसी
भोपाल। जैसे ही कांग्रेस प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी हुई असंतुष्ट नेताओं-कार्यकताओं का गुस्स फूट पड़ा। बड़े नेताओं पर अपने चहेतों को टिकट दिलाने और टिकटों की सौदेबाजी करने का आरोप लग रहा है। अनेक जिलों में नेताओं-कार्यकर्ताओं द्वारा इस्तीफे का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश कांग्रेश उपाध्यक्ष माणक अग्रवाल ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मानक अग्रवाल ने सुरेश पचौरी पर हमला बोलते हुए अरोप लगाया िकवह टिकट खरीदने और बेचने का काम करते हैं। पटलवार करते हुए पचौरी ने कहा कि घटिया लोग घटिया बातें करते हैं। पिछड़ा वर्ग विभाग के प्रदेशाध्यक्ष राजेन्द्र गेहलौत और अल्पसंख्यक विभाग के अनेक पदाधिकारियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सिंगरौली जिले में देवसर ब्लॉक कांग्रेस के सभी पदाधिकारियों ने गलत व्यक्ति को टिकट देने के विरोध में सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। पवई विधानसभा क्षेत्र से घोषित प्रत्याशी अनिल तिवारी ने अपना टिकट बदलने और मुकेश नायक को टिकट देने के विरोध में पार्टी ही छोड़ दी है। अब वे सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। पखवाड़े पहले कांग्रेस में शुरू हुआ प्रदेशव्यापी अन्तर्कलह अपने चरम पर आ पहंचा। बड़े नेताओं ने एक-दूसरे पर टिप्पणी करने में नैतिकता और मर्यादा को तक पर रख दिया। कांग्रेस के दिग्गज दूसरे दलों का दमन थामने में सबसे आगे हैं। टिकट नहीं मिलने से क्षुब्ध आगर विधानसभा क्षेत्र से दावेदारी कर रहे कांग्रेस नेता नरसिंह मालवीय ने विषपान कर आत्महत्या कर ली। वे कांग्रेस के सचिव थे। मालवीय के समर्थकों ने सांसद प्रेमचन्द गुड्डु का पुतला जलाया। जावद में नाराज कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने सांसद मीनाक्षी नटराजन को गांधी भवन में बंद कर दिया। इंदौर के जिला प्रमोद नारायण टंडन को भी कार्यकर्ताओं के विरोध का समाना करना पड़ रहा है। नाराज कांग्रेसियों ने उनका भी पुतला फूंका। हफ्ते भर पहले भाजपा से कांग्रेस में आए देवेन्द्र पटेल को टिकट देने के कारण मामले ने इतना तूल पकड़ा कि विरोध में कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कार्यालय में भारी तोड़-फोड़ की। इसके पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया की भतीजी कलावती भूरिया ने भी टिकट के लिए दबाव बनाने के लिए सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था। मालवा क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण जिले इंदौर में भी कांग्रेस का अंतर्कलह उफान पर है। इंदौर के लगभग सभी ९ सीटों पर कांग्रसे के प्रत्याशी का विरोध हो रहा है।

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