सोमवार, 10 जनवरी 2011

माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ

हिन्दू समाज में श्रेष्ठतम् दार्षनिक सिðांत होने के बावजूद काल प्रवाह मंे अनेक ऐसी षिथिलताएं और कुरीतियां समाज में प्रवेष करती चली गयीं, जिनमे सर्वाधिक कष्ट कर विड्ढय जाति के आधार पर हिन्दू और हिन्दू के बीच भेद-भाव एवं अस्पृष्यता रहा,जिनसे हमारे षत्रुओं केा हमें परास्त करने और दासत्व में रखने का अवसर प्राप्त हुआ। इसमें मुख्य रुप से तेरह सौ वर्ड्ढ मुगल एवं पांच सौ वर्ड्ढ ईसाइयांें का रहा। इतने वर्ड्ढों तक विदेषी आक्रांताओं की उपस्थिति के बावजूद हिन्दू धर्म की सर्वव्यापकता के कारण हिन्दू धर्म का अस्तित्व एवं राष्ट्र की एकता अक्षुण्ण रही। विष्व का अन्य कोई भी देष 100-150 से ज्यादा वर्ड्ढों के संघर्ड्ढ मंे अपना अस्तित्व कायम नही रख पाया।
हमारे समाज को कुरीतियों से मुक्त करने के लिए जितना कार्य किया जाना चाहिए था, उतना अभी हुआ नहीं है । बौð, जैन, सिक्ख सभी अपने - अपने तत्वज्ञान को कायम रखते हुए हिन्दू धर्म के व्यापक सहायक अंग हैं, अतः हिन्दू समाज को अपने तत्व ज्ञान के अनुरुप अपना आचरण दिखाना है। कुरीतियों और रुढ़ियांे से ग्रस्त इस समाज में बदलाव आना चाहिए। हिन्दू समाज की मूल धारा रहे, जनजातीय व वनवासी बन्धुओं को अलग करने का एक ड्ढड्य××ंत्र चल रहा है। अतः आज स्वयं में परिवर्तन लाये जाने की जरुरत है। हिन्दू ही अपनी संस्कृति से दूर हटेगा तो कौन इस महान संस्कृति का धारक होगा। हम सब भारत माता के पुत्र हैं यह भाव सभी में उत्पन्न करना, यही हम सब का लक्ष्य होना चाहिये। हिन्दू समानता की कल्पना सर्वांगीण समरसता की कल्पना है। सभी में एक ही ईष्वर का अंष है इसलिए न कोई ऊंचा है और न कोई निम्न।
इस माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ में देषभर से संत, महात्माआंे एवं प्रबुðजनों के अलावा लगभग बीस लाख लोगों के आने की संभावना है। इसकी सुचारु व्यवस्था के लिये हजारों कार्यकर्ताओं की आवष्यकता होगी जो दस दिनांे तक रहकर कुंभ मंे आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों की व्यवस्था में लगेंगे। विगत 12,13 व 14 नवम्बर को मंडला मंे कुंभ के संचालन हेतु लगभग पांच हजार कार्यकर्ताओं को व्यवस्था संम्बधी प्रषिक्षण दिया गया। इस कुंभ में सहभागिता हेतु बड़ी संख्या में साधु संतों के अपनी षिष्य मंडली सहित आगमन की सहमति प्राप्त हो रही है। समूचे राष्ट्र से सभी जाति बिरादरियों के बंधु इस कुंभ में पधार रहे हैं।
इस आयोजन से सामाजिक समरसता के निर्माण एवं धर्म की दृढ़ता की परिणति राष्ट्र की सुदृढ़ एकता के रुप में होगी। जबलपुर में दिनांक 21/11/2010 रविवार को आयोजित इस पत्रकार वार्ता को मार्गदर्षक द्वय मा.श्री मुकुंदराव जी पणषीकर(अ.भा.धर्मजागरण प्रमुख), स्वामी महामण्डलेष्वर अखिलेष्वरानंद जी सरस्वती, श्री राजेन्द्र जी (सचिव) माँ नर्मदा सामाजिक कुंभ ने सम्बेाधित किया।

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