सोमवार, 10 जनवरी 2011

"नर्मदा संस्कृति: संक्रमण एवं समाधान" पर विमर्श

विश्व संवाद केंद्र, हिंदुस्तान समाचार तथा इंडियन मीडिया सेण्टर भोपाल ने आज उपरोक्त विषय पर एक कार्यशाला आयोजित की, जिसमे मुख्य अतिथि पूर्व मुख्य सचिव श्री कृपा शंकर शर्मा, तथा मुख्यवक्ता विश्वप्रसिद्ध मानवशास्त्री श्री विकास भट्ट थे. श्री विराग पाचपोर कार्यक्रम के अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय एकता समिति के उपाध्यक्ष रमेश शर्मा विशिष्ट अतिथि थे.
नर्मदा लोकगाथाओं और वैज्ञानिक तथ्यों, दोनों से ही विश्व की प्राचीनतम नदी मानी गयी है. यही कारण है की इसके तट पर विश्व की प्राचीनतम सभ्यता विकसित हुई. जब विश्व की अनेक प्राचीन संस्कृतियों ने साम्राज्यवाद और अनेक अन्य आक्रमणों के आगे घुटने टेक दिए और पूर्णतः नाश्ता हो गयीं, विश्व नर्मदा की सभ्यता ने अपना अस्तित्व कायम रखा और स्वयं को हर युग में अभिव्यक्त करती रही. इस महान संस्कृति के संरक्षक नर्मदाक्षेत्र के वनवासी हैं जो युगों से अपनी आस्था का केंद्र अपनी नरबदा मैया, अपने संस्कारों, अपनी परम्पराओं और अपने देशज ज्ञान को मानते रहे हैं. वर्तमान युग में यह समाज की जिम्मेदारी है की वे वनवासी बंधुओं से पुनः सांस्कृतिक और सामाजिक सम्बन्ध प्रगाढ़ कर सदियों पुरानी अपनी संस्कृति, कलाओं और ज्ञान को ग्रहण करें तथा इनके संरक्षण हेतु उनके साथ कंधे से कन्धा मिलाकर खड़े हों. इसी विचार से इस विषय को विस्तार से आम लोगों तक पहुंचाने, नए युग में इस संस्कृति पर आसन्न नयी चुनौतियों को पहचानने, तथा उनका समाधानों पर चर्चा हेतु ये कार्यशाला आयोजित की गयी थी.
उदबोधन:
इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्री कृपा शंकर शर्मा ने स्वयं को नर्मदा पुत्र बताते हुए इसके तट पर बसे लोगों का माँ नर्मदा के प्रति उनकी आस्थाओं के बारे मं बताया. उन्होए विश्वास व्यक्त किया की इस कार्यशाला से अनेक उपयोगी विचार निकल कर आयेंगे. मुख्यवक्ता श्री विकास भट्ट ने विस्तार से अमरकंटक से लेकर गुजरात तक नर्मदा तट पर बसे वनवासियों की आस्थाओं और उनसे जुडी परम्पराओं का वर्णन किया. उन्होंने ने इस बात पर भी प्रकाश डाला की किस प्रकार विदेशी आक्रमणकारियों ने वनवासियों को मुख्य से बाटने के हर संभव प्रयास किये, यहाँ तक की उन्हें 'आदिवासी' कह कर उनकी पहचान ही बदलने की कोशिश की. शिक्षाविद श्री संजय द्विवेदी ने नर्मदा तट पर नक्सालियों की समस्या पर प्रकाश डाला तो नर्मदा सहयता के विद्वान नरेन्द्र द्विवेदी ने अनेक नै चुनौतियों का वर्णन किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नागपुर के वरिष्ठ पत्रकार श्री विराग पाचपोर ने धर्मांतरण से उत्पन्न संकट और कम्यूनिस्ट, इस्लामी आतंकवाद, इसाई मिशनरियों तथा नाक्साल्वादियों के गठजोड़ पर गहरी चिंता जताई. बिनायक सेन की रिहाई के प्रयासों को भी उन्होंने देश के विरुद्ध एक षड़यंत्र बताया. कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन श्री अनिल सौमित्र ने किया.

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