शनिवार, 23 अक्तूबर 2010

भोपाल में महिला साहित्यकारों का सम्मेलन शुरू

पुरानी नींव में नया निर्माण नारी को करना होगाः मृदुला सिन्हा

भोपाल। भारतीय साहित्य परिषद द्वारा आयोजित दो दिवसीय महिला साहित्यकारों का सम्मेलन शनिवार को शारदा विहार आवासीय विद्यालय में शुरू हुआ। सम्मेलन में देश भर की कई ख्यात साहित्यकारों ने भागीदारी की। सम्मेलन का उद्घाटन महामहीम राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने किया। जबकि मुख्यअतिथि के रूप में संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा उपस्थित थे। इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में राज्यपाल रामेश्वर ठाकुर ने कहा कि समाज को जागृत करने में महिलाएं बडी भूमिका का निर्वहन कर सकती हैं। समाज और देश के उत्थान में महिला का बराबर का दर्ज है। भारतीय संस्कृति में भी नारी का महत्वपूर्ण स्थान है। इसलिए साहित्यकार नारी की भूमिका भी अह्म होनी चाहिए। श्री ठाकुर ने महिला शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि जब एक बच्चा शिक्षित होता है तो एक व्यक्ति का निर्माण होता है। जबकि जब एक महिला शिक्षित होती है तो पूरी एक पीढ.ी का निर्माण होता है। महिला के शिक्षित होने से उसके उत्थान में कोई बाधक नहीं बन सकेगा।
इस मौके पर प्रख्यात सहित्यकार मृदुला सिन्हा ने कहा कि समाज में काफी बदलाव आ रहा है। वैश्वीकरण के नाम पर पाश्चात्य परंपराओं के नाम पर नारी के स्वरूप को विकृत किया जा रहा है। नारी सशक्तीकरण के नारे से नारी घर,सड़क और दफ्तर में असुरक्षित हो गई है। वह वहां पर अकेली खडी है। जबकि नारी की समस्या पूरे समाज की समस्या है। इसलिए नारी को पुरानी नींव पर नया निर्माण करना होगा। इसमें भी पुरुष का साथ होना जरूरी है। श्रीमती सिन्हा ने कहा कि वर्तमान दौर में महिलाओं में मातृत्व के प्रति कमी दिखाई दे रही है। सहित्य में मातृत्व के प्रति खुशबू पैदा करना होगा। साहित्य में हमें इन जीवन मूल्यों को बढावा देना होगा। उन्होंने सीता और सावित्री को नारी के लिए आदर्श बताते हुए कहा कि वह बेचारी नहीं हैं। इनकी ही तरह हमें अपनी बेटियों को बनाना होगा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने महिला साहित्यकारों के सम्मेलन में आई साहित्यकारों का स्वागत करते हुए कहा कि यह प्रदेश के लिए एक उपलब्धि है कि इतनी बडी प्रतिभा हमारे प्रदेश में पधारी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सरकार महिलाओं के सशक्त बनाने की दिशा में अग्रसर है। साहित्य और कला को बढावा देना हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
कार्यक्रम के संयोजक और साहित्य परिषद के सह संगठनमंत्री श्रीधर पराडकर ने कहा कि साहित्य वह होना चाहिए जिसमें लोक मंगल हो। लेकिन जब सहित्य में वर्ग विशेष की बात होने लगे तो वह साहित्य नहीं होता। लेकिन दुर्भाग्य से समाज में इसी तरह का साहित्य बाजारवाद के चलते सुलभ हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज भी अच्छा पढने वाला पाठक है लेकिन उसे अच्छा साहित्य उपलब्ध नहीं हो रहा है। इसलिए भारतीय परंपरा पर केंद्रीत साहित्य की रचना करना होगी। इस अवसर पर बडी संख्या में देश भर से आई महिला साहित्यकार उपस्थित थीं।

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