गुरुवार, 16 सितंबर 2010

Sarsanghachalak interacts: Indian women's press corp PDF Print E-mail
Written by Administrator
Wednesday, 15 September 2010

कानून व संविधान के तहत ही मंदिर बने
नई दिल्ली।
दिनांक १४ सितम्बर

आयोध्या मामले में अदालत के निर्णय से पहले सरसंघचालक श्री. मोहनजी भागवत ने मंगलवार को कहा कि वह विवादास्पद स्थल पर संसद द्वारा बनाए गए कानून के माध्यम से राम मंदिर के निर्माण के पक्ष में हैं और अयोध्या मामले पर अदालत के फैसले पर संघ की प्रतिक्रिया 'कानून एवं संविधान' के दायरे में होगी।

इंडियन विमेंस प्रेस कॉर्प द्वारा आयोजित एक वार्तालाप में महिला संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा, “निश्चित तौर पर, हिंदू समाज की आकांक्षा है कि रामजन्मभूमि पर मंदिर बनाया जाना चाहिए। इस संबंध में फैसले पर हमारी प्रतिक्रिया इन इच्छाओं के अनुरूप होगी। हम सुनिश्चित करना चाहेंगे कि वहां राम मंदिर का निर्माण हो”।
अदालत के निर्णय के बारे में पूछे जाने पर सरसंघचालक ने कहा, “फैसला आने के बाद ही हम प्रतिक्रिया दे सकते हैं, आगे के कानूनी विकल्प भी मौजूद होंगे”।उन्होंने संकेत दिया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला जिस संबंधित पार्टी के पक्ष में नहीं जाता है, वह उच्चतम न्यायालय जा सकता है।
इस विषय में 24 सितंबर को अदालत का फैसला आने के बाद कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न होने की आशंकाओं के बारे में बार बार पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि फैसले पर संघ की प्रतिक्रिया 'कानून, संविधान औरलोकतांत्रिक सीमाओं में' होगी। भागवत ने पत्रकारों से कहा, 'हमारे तरफ से कोई झंझट नहीं होगा।'
मोहनजी भागवत ने कहा, “हम समाज में किसी तरह का विभाजन नहीं चाहते, हम इसे हिंदू-मुस्लिम विवाद के रूप में नहीं देखते बल्कि इसे हम राष्ट्रीय मूल्यों के आदर के रूप में देखते हैं। वास्तव में अगर मंदिर बनता है तो इससे समाज में एकता स्थापित करने में मदद मिलेगी”।
यह पूछने पर कि क्या इस मुद्दे पर वह बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी से वार्ता करेंगे तो उन्होंने कहा कि समाज में खाई को कम करने के लिए आरएसएस धार्मिक नेताओं के साथ वार्ता कर रहा है लेकिन मंदिर मुद्दे पर कोई भी वार्ता मंदिर आंदोलन के 'संतों' की समिति की परिधि में किया जाएगा।
यह पूछने पर कि क्या मंदिर मुद्दे पर भाजपा के रूख से आरएसएस हताश है ?तो उन्होंने कहा, 'राम मंदिर आंदोलन से भाजपा को सहायता मिली है। परन्तु इस बारेमें निर्णय भाजपा को ही करना होगा. बहरहालअपने आंदोलन को चलाने के लिए हमें किसी के सहयोग की जरूरत नहीं है।'
भगवा आतंकवाद ग़लत
गृह मंत्री के भगवा आतंकवाद से देश को खतरे और संघ के कुछ कार्यकर्ताओं के बम विस्फोटो की जांच में नाम सामने आने परसरसंघचालक ने कहा कि ‘भगवा आतंकवाद’ सही शब्द नहीं है.
जहां तक संघ के कुछ लोगो के नाम है, आरएसएस इन्हें अपवाद के रुप में देखता है और अगर कोई पकड़ा जाता है तो कानून को अपना काम करना चाहिए.
लेकिन उन्होंने गृह मंत्री पी चिदंबरम को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ''ये कुछ ताक़तो के देश को बदनाम करने की कोशिश है. जब आप भगवा आतंकवाद कहते है तो कहते है कि ये देश के अंदर पैदा हुआ आतंकवादहै. दुनिया के सामने इसका क्या संदेश जाएगा. लोग हमें ‘अराजक देश’ कहेंगे. गृह मंत्री को ज़िम्मेदारी से शब्दों का चयन करना चाहिए. हिंदू और आतंकवाद कभी साथ नहीं हो सकते.’’
कश्मीर
कश्मीर की स्थिति और स्वायत्तता के सवाल पर उन्होंने कहा, 'हम आजादी या स्वायत्तता जैसे शब्दों को पसंद नहीं करते। हम अलगाववादियों से बात करने की जरूरत नहीं समझते। हमारा मानना है कि कश्मीर को पूरी तरह भारत में मिला देना चाहिए।'उनका मानना है कि सरकार का रूख और नीतियां इसी विचार पर आधारित होनी चाहिए न कि क्षेत्र के साथ अलग व्यवहार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि कश्मीर के लोगों में विश्वास बढ़ाने की जरूरत है।

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