मंगलवार, 28 सितंबर 2010

विश्व हिन्दू परिषद के अन्तरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंहल का मन्दिर मामले पर बयान

उच्चतम न्यायालय के आज के निर्णय का हम स्वागत करते हैं । इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खण्डपीठ द्वारा दिनांक 24 सितम्बर को आने वाले फैसले पर ठीक एक दिन पूर्व सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाये गये रोक से लोगों के मन में बहुत बड़ा सन्देह उत्पन्न हो गया था कि यदि यह फैसला 30 तारीख तक नही आ पाया और तीन में से एक जज न्यायमूर्ति श्री धर्मवीर शर्मा 1 अक्टूबर 2010 को सेवानिवृत्त हो गये तब एक नयी पीठ का निर्माण होकर नये सिरे से वाद को सुना जायेगा और इसमें बहुत लम्बा समय लग जायेगा । जो पक्ष इसको रोकने में लगे थे उनकी अपकीर्ति भी चारों ओर हो रही थी । इस बात का भी पता लगाने की आवश्यकता है कि कौन से तत्व और शक्तियां निर्णय रोकने के पीछे लगी थीं । किन्तु आज के उच्चतम न्यायालय के निर्णय से जन्म भूमि से जुड़े लगभग सभी पक्षों को समाधान हुआ होगा और संदेह का वातावरण अब समाप्त होगा। यही पीठ यह निर्णय सुनायेगी तथा जो प्रतीक्षा पूरे भारत के द्वारा की जा रही है वह अब पूर्ण हो सकेगी, ऐसा जानकर सभी को अवश्य अच्छा लगा होगा ।
हमारे सन्तों ने बहुत ही स्पष्ट रूप से कहा है कि हमें हमारे पक्ष में या विपक्ष में चाहे जैसा भी निर्णय आता है देश में सर्वत्र शान्ति बनाये रखनी है । सन्तों के वचन का पालन सब हिन्दू समाज करे ऐसा इस अवसर पर मेरा निवेदन है ।
निर्णय आने के पश्चात सन्तों के द्वारा एक निर्देश जारी होगा ऐसा निर्णय 24 सितम्बर को सन्त उच्चाधिकारी समिति की बैठक में उदासीन आश्रम नई दिल्ली में लिया गया था । सन्तों के उस निर्देश का सभी पालन करेंगे और सर्वत्र शान्ति का वातावरण बना रहेगा ऐसा मुझे विश्वास है । श्री हनुमत् शक्ति जागरण का कार्यक्रम बिना किसी अवरोध के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम अनुसार सभी स्थानों पर यथावत चलता रहेगा । चार महीने के कार्यक्रम में हनुमान चालीसा, पारायण के यज्ञ, शान्ति के साथ सम्पन्न होंगे ।

3 टिप्‍पणियां:

Dr.J.P.Tiwari ने कहा…

A good message for pice

मंजुला ने कहा…

बहुत अच्छा लगा ये लेख पढ़कर वरना मै बहुत चिंतित थी ...की पता नहीं क्या होने वाला है ...

मंजुला ने कहा…

बहुत अच्छा लगा ये लेख पढ़कर वरना मै बहुत चिंतित थी ...की पता नहीं क्या होने वाला है ...