सोमवार, 6 सितंबर 2010

हिंदू कभी आतंकवादी नहीं हो सकता



मीडिया आतंकवाद के लिए आॅक्सीजन का काम करती है
भोपाल। हिंदू कभी भी आतंकवादी नहीं हो सकता। हिंदू कट्टरपंथ भी विश्व शांति के लिए होगा क्योंकि वो तो हमें अपनी परंपराएं निभाना ही सिखाएगा, जिसमें आतंकवाद शामिल नहीं है। वर्तमान में भारतीय समाज आतंकवाद से लड़ाई की निर्णायक राह तलाश रहा है। इसी संदर्भ में कुछ लोगों ने भटक कर गलती कर दी। इसी वजह से गृहमंत्री चिदंबरम को ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द गढ़ने को मौका मिल गया। हिन्दू आतंकवाद या भगवा आतंकवाद का इसका सृजन इस्लामिक, माओवादी आतंकवाद तथा अन्य्ा समाज विरोधी गतिविधिय्ाों से लोगों का ध्य्ाान हटाने के उद्देश्य्ा से किय्ाा जा रहा है। भोपाल में स्वैच्छिक संस्था स्पंदन और मप्र राष्ट्रीय एकता समिति द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकारिणी सदस्य राममाधव यह बात कही। श्री राममाधव भोपाल के शहीद भवन में आयोजित एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। संगोष्ठी का विषय था - ‘आतंकवाद की राजनीति और मीडिया’।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रवक्ता श्री राममाधव ने कहा कि आतंकवाद के बारे में पूरी दुनिय्ाा मे आम सहमति है और इसकी समाप्ति के लिए तमाम देश अनेक तैय्ाारिय्ाां भी कर रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य्ा से आतंकवाद के विषय्ा में भारत में कोई स्पष्टता नहीं है। वर्तमान केंद्र सरकार ने कई आतंकवादी घटनाओं पर कोई कार्रवाई नहीं की जबकि अजमेर शरीफ की घटना को लेकर भगवा आतंकवाद का शब्दजाल रच दिया। उन्होंने कहा कि हिंदू आतंकवाद की घटनाओं से त्रस्त है और अगर हिन्दू आतंकवाद के रास्ते पर आ रहे हैं तो इसके जवाबदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पूर्व सुरक्षा विशेषज्ञ के हवाले से य्ाह प्रश्न खडा किय्ाा कि भगवा आतंकवाद का हौवा खडा करने में कहीं सेक्य्ाूरिटी ब्य्ाूरों का हाथ तो नहीं। श्री राम माधव का कहना था कि अन्य्ा जरूरी मुद्दों से हट कर भगवा आतंकवाद की बात करना राजनीति का हिस्सा है, हमें इस बात को समझ्ाना होगा। आतंकवाद तथा माओवाद का उद्देश्य्ा बंदूक के बल पर सत्ता को हासिल करना होता है, जबकि हिन्दूवादी संगठन सत्ता की लालसा से कोई ऐसा कायर््ा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष करना किसी वर्ग य्ाा संप्रदाय्ा के विरोध में जाना नहीं है। हम लडे न लडे तब भी इसके विरुद्ध्ा दुनिय्ाा लडेगी। जो लोग हिन्दू फण्डामेंटलिज्म की बात कह रहे हैं, तो उनके लिए य्ाही कहना सही होगा कि य्ाह है भी तो बुरा नहीं बल्कि अच्छा ही है।
उन्होंने मीडिया से आग्रह करते हुए कहा कि उसे हर मसले को राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। आतंकवाद से जुड़ी प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के प्रस्तुतीकरण में मीडिया को संतुलन का ध्यान रखना चहिए। उन्होंने पश्चिम की मीडिया की भारत के मीडिया से तुलना करते हुए कहा कि वहां आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में मीडिया ने तथ्य राष्ट्रहित को ध्यान में रखते हुए पेश किए, जबकि यहां पर अनेक अवसरों पर उचित संतुलन का आभाव नजर आता है। मीडिया को अपनी आजादी का उपयोग जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए।
हिन्दुवादी राजनीतिक दल शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादक प्रेम शुक्ल वक्ता के बतौर बोलते हुए उन्होंने कहा कि आतंक का रंग निर्धारण करने से पहले आतंक के ढंग को समझना होगा. इस ढंग को समझने के लिए जिस आंख की जरूरत है उसका भारत में सर्वथा अभाव है. वह आंख कुछ और नहीं बल्कि मीडिया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय मीडिया का चरित्र इस मामले में नासमझी वाला है, लेकिन अगर हमारे नेताओं के पास ही कोई विश्वदृष्टि नहीं है तो भला मीडिया से यह उम्मीद कैसे की जाए कि कि वे आतंकवाद की गंभीर चुनौती को आंकने के लिए अपनी कोई दृष्टि विकसित कर लेगी।
श्री शुक्ल ने कहा कि आतंकवाद की कल्पना बहुत प्राचीन है, हमारे सभी अवतारी पुरूषों ने जन-चेतना को आतंकवाद के खिलाफ खडा किय्ाा है। उन्होंने कहा कि भगवा आतंकवाद के विषय्ा में पी. चितम्बरम को जवाब देना चाहिए। धर्म के नाम पर जब जिéा ने देश को दो भागांे में बांटा, वह भी आतंकवादी घटना थी लेकिन उसे किसी ने आतंकवाद नहीं कहा। इसी तरह कश्मीर में लगातार हो रही आतंकी घटनाओं को आतंकवाद नहीं माना गय्ाा लेकिन 9@11 की घटना के बाद से इस्लामिक आतंकवाद का उदय्ा हुआ। उन्होंने कहा सनातन धर्म को मानने वालों ने हिन्दुत्व को स्थापित करने के लिए कभी आतंकवाद को नहीं अपनाय्ाा। साध्वी प्रज्ञा सिंह तथा कर्नल पुरोहित की कायर््ाशैली और अलकाय्ादा की कायर््ाशैली में बहुत भिéता है। जेहाद पर खडा आतंकवाद पूरी तरह से सुनिय्ाोजित और इस्लाम का परचम लहराने के उद्देश्य्ा से कायर््ारत है। जबकी कोई भी हिन्दूवादी लोक कल्य्ााण के बारे में ही सोचता है। जिन हिन्दूवादी लोगों को आतंक फैलाने के नाम पर हिरासत में लिय्ाा गय्ाा है। उनकी नार्को टेस्ट जैसी जांच करने के बाद भी कोई पुख्ता सबूत न मिलने पर कहा जाता है कि य्ो लोग य्ाोग करते हैं इसलिए इनसे सच नहीं उगलवाय्ाा जा सका।
उन्होंने कहा कि हमारा मीडिया आतंकवाद से लड़ने के बजाए लोगों में भय पैदा करता है, जबकि यूरोप और अमेरिका ने मीडिया को आतंकवाद के खिलाफ हथियार की तरह उपयोग किया है। इराक की घटना इसका उदाहरण है जहां बिना किसी रासायनिक हथियार के मिले पूरे देश पर कब्जा कर लिया गया जबकि भोपाल गैस त्रासदी में 15000 से भी अधिक लोगों के मारे जाने के बाद भी हम एक गुनाहगार तक को सजा नहीं दिलवा पाए। अमेरिका का मीडिया अपने देश के हित में काम करता है जबकि भारत का मीडिया देश का मनोबल तोड़ने का काम करता है। श्री शुक्ल ने मार्गे्रट थैचर के वक्तव्य को उद्धृत करते हुए कि भारत में भी मीडिया आतंकवाद के लिए आॅक्सीजन का काम कर रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ राजनेता महेश जोशी ने कहा कि हिंदू इसलिए कभी आतंकवादी नहीं हो सकता क्योंकि हमारे यहां जीव हत्या को पाप माना गया है। हमारे घरों की माताएं-बहनें हमें कीड़े तक नहीं मारने देतीं, ऐेसी शिक्षा के बाद हम किसी की जान कैसे ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमस ब एक हो जाएं तो आतंकवाद जड़ से समाप्त हो सकता है। कार्यक्रम का आयोजन स्वैच्छिक संस्था स्पंदन और राष्ट्रीय एकता समिति ने किया था।
अनिल सौमित्र भोपाल से

3 टिप्‍पणियां:

RAJ SINH ने कहा…

धन्यवाद अनिल जी !
यही सच्चाई है .

DEEPAK BABA ने कहा…

अनिल जी, निर्भीक रिपोर्ट के लिए साधुवाद...

vishwajeetsingh ने कहा…

आदरणीय अनिल जी नमस्कार
सत्य का दिग्दर्शन कराती अभिव्यक्ति ...... आभार ।