शनिवार, 24 जुलाई 2010

जयकृष्ण गौड़
दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर भी आरोप लगाए हैं। स्वयं हिंदू होते हुए भी कांग्रेस और अन्य कथित सेक्यूलर नेताओं ने हिंदू आतंकवाद शब्द का प्रयोग प्रारंभ किया है। आतंकवादियों का संगठित गिरोह होता है,वे हिंसा में विश्वास करते हैं,लेकिन जिन्होंने हिंदुत्व की अवधारणा का अध्ययन किया है,उसमें आतंकवाद या हिंसा का कोई स्थान नहीं है। सर्वोच्य न्यायालय ने भी अपने निर्णय में कहा था कि हिंदूत्व एक जीवन पद्धति है। हिंदू आतंकवाद शब्द का प्रयोग राजनैमिक दृष्टि से किया जाता है। जेहादी आतंकवाद के समक्ष इस शब्द को प्रयोग कर मुस्लिम मतों को प्रभावित करने की नीतिगत राजनीति है। जो हिंदू आतंकवाद का भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें ध्यान में रखना चाहिए कि भारत में करीब नब्बे प्रतिशत हिंदू,भारत में की सनातन पहचान हिंदूराष्ट्र के नाते है। यहां कि संस्कृति,परंपरा ओर जीवन मूल्य हिंदूत्व की अवधारणा के अनुकूल हैं। जो लोग हिंदू आतंकवाद का भ्रम फैलाकर अपनी राजनैतिक रोटी सेंकना चाहते हैं,वे यह भूल जाते हैं कि वे पूरी राष्ट्रीय कौम को बदनाम कर रहे है। वे भारत की आत्मा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इस प्रकार के शब्द प्रयो से न केवल हिंदू को बदनाम करने की साजिश है,बल्कि इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय समाज की छवि खराब होगी।
हिंदू संगठनों को आतंकवादी कार्रवाई में लिप्त होने के आरोप में दिग्विजय सिंह ने लगाए हैं,इसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम लिया है। कुछ लोग मांलेगांव,अजमेर,हैदाबाद के विस्फोटों में के सिलसिले में पकडाएं हैं,उनका सरोकार संघ से है,इस आरोप का खंडन संघ का केंद्रीय नेतृत्व कर चुका है।जो कुछ लोग पकड़ाएं है उनका संबंध संघ से नहीं है। संघ की कार्यपद्धति की थोड़ी जानकारी दिग्विजय सिंह को भी होगी। उनके परिवार का भी संघ से सरोकार रहा है। संघ की कार्य दिशा एक खुली किताब है।
हिंदूओं को संस्कारित करने और संगठित करने की दृष्टि से डॉ. हेडगेवार ने सन् 1925 में संघ की स्थापना की। संघ शाखाओं पर देश भक्ति की घुट्टी पिलाई जाती है। देश और समाज के लिए पूरा जीवन समर्पित करने की प्रेरणा दी जाती है। तेरा वैभव अमर रहे मां,हम दिन चार रहें या न रहें’ इस प्रकार के गीत स्वयंसेवक गाते हैं। प्रचार-प्रसार से दूर रहकर संघ अपनी साधना में लगा हुआ है। संघ को भी राजनीति में घसीटने का पाप दिग्विजय सिंह जैसे नेता कर रहे हैं। शुचिता,देशभक्ति,और राष्ट्र के प्रति जीवन का समर्पण,संघ की कार्यपद्धति में ही दिखाई देगा।
संघ पर जितने भी आरोप लगे,वे न्यायालय द्वारा निराधार सिद्व हुए। तत्कालीन नेहरू सरकार ने संघ पर गांधी जी की हत्या का झूठा आरोप लगाय। संघ के खिलाफ चलाए जा रहे निंदा अभियान का अंत नहीं हुआ। करीब दो दशक बाद इंदिरा सरकार ने 1966 में महात्मा गांधी की हत्या की जांच के लिए न्यायिक आयोग गठित किया। इस आयोग के अध्यक्ष थे सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जे एल कपूर। वर्ष 1969 में आयोग की रिपोर्ट प्रकाशित हुई उसमें कहा गया कि आरोपियों का संघ का सदस्य होना साबित नहीं होता है और न ही हत्या में संगठन का हाथ होना पाया गया है। आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दिल्ली में भी ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि एक संगठन के रूप मे संघ महात्मा गांधी या कांग्रेस के अन्य नेताओं के खिलाफ गतिविधियों में लिप्त था। हम सच्चाई के बाद भी कथित सेक्यूलर और विशेषकर कम्यूनिष्ट संघ को बदनाम करने की कोशिश करते रहे हैं। दंगों के आरोप में संघ को बदनाम करने करने की सजिश चलती रही है। एक भी दंगे में संघ पर लगाए आरोप सिद्व नहीं हो सके हैं। संघ के द्वारा तो मुस्लिम वतनपरस्ती की चेतना जागृत करने का अभियान चलाया जा रहा.

1 टिप्पणी:

RAJ SINH ने कहा…

इस सत्य से देश द्रोहियों को सही ' लालमिर्ची ' लग जानी चाहिए पर ये बेशर्म हैं .