गुरुवार, 8 अप्रैल 2010

राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां विषय पर व्याख्यान में पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा ने कहा सुरक्षा के मामले में देश के सामने गंभीर चुनौती

भोपाल। जिस दिन छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में माओवादी सुरक्षा बल के जवानों का कत्लेआम किया उसके ठीक दो दिन पूर्व मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल एसके सिन्हा लोगों को आगाह कर रहे थे। पूर्व राज्यपाल श्री सिन्हा ने कहा कि सुरक्षा के मामले में आज भारत दोहरी चुनौती का सामना कर रहा है। पहली चुनौती बाहरी है जो देश की सीमा के बाहर से हमारे पड़ोसी देश उत्पन्न कर रहे हैं और दूसरी चुनौती देश के भीतर पनप रहे जेहादी आतंकवाद एवं माओवाद के कारण पैदा हो रही है। देश की सुरक्षा से जुडी इन चुनौतियों से तभी निपटा जा सकता है, जब राजनीति से दूर हटकर सुरक्षा से संबंधित मामलों में एकजुटता दिखाई जाए। देश की सुरक्षा के मामले में वोट की राजनीति को दूर ही रखा जाना चाहिए। युद्ध के भय से सुरक्षा को दांव पद नहीं लगाया जा सकता।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा भोपाल में आयोजित व्याख्यान में पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल और असम तथा जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल एसके सिन्हा ने व्यक्त किये।इस अवसर पद मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश शासन के वित्तमंत्री राघवजी भाई और विशिष्ट अतिथि के रूप में जनसंपर्क आयुक्त मनोज श्रीवास्तव उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश के मुख्य सूचना आयुक्त पद्मपाणि तिवारी ने की। यह व्याख्यान माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पद आयोजित था।
अपने व्क्तव्य में श्री सिन्हा ने कहा कि हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान एवं चीन से हमें सबसे ज्यादा खतरा है। विश्व के पटल पर भारत तेजी से एक शक्ति के रूप में विकसित हो रहा है। चीन भारत की इस वृद्धि से चिंतित है। चीन इसे खतरा मानता है और दक्षिण एशिया में भारत के प्रभुत्व को समाप्त कर देना चाहता है। चीन तेजी से भारतीय सीमा के पार सड़क और हवाई अड्डे सहित अन्य अधोसंरचनाओं का विकास कर रहा है। हमें चीन से प्रतिस्पद्र्धा के लिए और अधिक तैयारी करनी होगी। उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा के मामले में हमारा दूसरा खतरा पाकिस्तान है। पाकिस्तान हमेशा से यह मानता रहा है कि शांत और समृद्ध पाकिस्तान का निर्माण भारत के कारण संभव नहीं हो पा रहा है। इसलिए पाकिस्तान भारत में लगातार आतंकवादी गतिविधियों को प्रश्रय दे रहा हैं। पाकिस्तान परमाणु शक्ति के बूते भारत को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है। देश की आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि असम एवं पूर्वोत्तर राज्यों में तेजी से फैले हिंसक आंदोलन हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है। नागालैंड एवं मिजोरम में हिंसक वारदातों में कमी आई है। परन्तु त्रिपुरा और मणिपुर में अभी स्थिति में काफी सुधार की जरूरत है। त्रिपुरा में बंग्लादेशी घुसपैठियों के कारण हमें कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
श्री सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अशांति एवं असुरक्षा का मुख्य कारण धार्मिक कट्टरवाद एवं पाकिस्तान द्वारा किया जाने वाला छद्म युद्ध है। यह दुष्प्रचार किया गया है जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी मुसलमान बहुसंख्यक है। जबकि इसकी संख्या सिर्फ 42 प्रतिशत है। पूरे देश और दुनियाभर में कश्मीरी मुसलमान को बहुसंख्यक बताकर वहां धार्मिक कट्टरवाद फैलाया जा रहा है। जम्मू और कश्मीर को समूचे रूप न देख पाने के कारण ही हम इस आंतरिक असुरक्षा से मुक्त नहीं हो पाये हैं। श्री सिन्हा ने सुरक्षा मामले पर सेक्यूलरिस्ट और मीडिया के रवैये को भी आड़े हाथों लिया।
व्याख्यान कार्यक्रम के मुख्यअतिथि मध्यप्रदेश के वित मंत्री राघवजी ने कहा कि आर्थिक सम्पन्नता तब तक किसी काम की नहंीं जबतक कि शक्तिशाली नहीं हो जाते। हमें भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाना है। यह तभी संभव होगा जब हम राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि माने। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित जनसंपर्क आयुक्त मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि भारत सुरक्षित होने के भ्रम का हमेशा शिकार रहा है। पृथ्वीराज चैहान ने बार-बार मोहम्मद गौरी को पराजित किया और छोड़ दिया। यह सुरक्षा के प्रति भ्रम की स्थिति ही थी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का भ्रम टूटना चाहिए और इसमें मीडिया की बड़ी भूमिका है। कार्यक्रम में भोपाल के सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी सहित अनेक गण मान्य नागरिक उपस्थित थे।
अनिल सौमित्र भोपाल से।

कोई टिप्पणी नहीं: