शनिवार, 27 फ़रवरी 2010

सद्भावना बैठक और हिन्दू समागम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत भोपाल में
सद्भावना बैठक और हिन्दू समागम में शामिल हुए
भोपाल 26 फरवरी। अपने तीन दिवसीय प्रवास पर 26 फरवरी को सांय 7ः25 बजे मुंबई से भोपाल पधार रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत शनिवार, 27 फरवरी को सुबह 10ः00 बजे सामाजिक सद्भावना बैठक में भाग लेंगे। सद्भावना बैठक को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवतजी संबोधित करेंगे। बैठक का आयोजन शहीद भवन, विधायक विश्राम गृह के पास, मालवीय नगर, में किया गया है। बैठक में 100 से अधिक विभिन्न जाति, धर्म, संप्र्रदाय के भोपाल जिले के पदाधिकारी उपस्थित रहेंगे। हिन्दू समागम आयोजन समिति के महासचिव श्री दीपक शर्मा ने बताया कि सरसंघचालक श्री मोहनजी भागवत रविवार, 28 फरवरी को सांय 4 बजे लाल परेड मैदान में होने जा रहे हिन्दू समागम को संबोधित करेंगे। इस दौरान उनके साथ अखिल भारतीय सह शारीरिक प्रमुख श्री अनिल ओक, अखिल भारतीय सम्पर्क प्रमुख श्री हस्तीमलजी, क्षेत्र संघचालक श्रीकृष्ण माहेश्वरी सहित समिति व संघ के पदाधिकारी भी उपस्थित रहेंगे।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विभाग संघचालक कांतिलाल चतर ने बताया कि हिन्दू समागम के लिये भोपाल महानगर के 40 हजार परिवारों से सीधा संपर्क किया जा चुका है। विभिन्न समूह बनाकर सामाजिक व धासद्भावना समाज और राष्ट्र को विकसित और सुरक्षित करने का आधार है ः परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत
भोपाल 27 फरवरी। समाज में सुधार, विकास, सेवा का कार्य करते हुए अपने कार्य में अन्य समाज के लोगों को बुलाने से समाज में सामाजिक सद्भाव उत्पन्न किया जा सकता है। समाज को विकसित और सुरक्षित रखने के लिये एक रहना आवश्यक है। सद्भावना समाज और राष्ट्र को विकसित और सुरक्षित करने का आधार है। मनुष्य को आपस में भेदभाव नहीं करनी चाहिये। उक्त बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत जी ने आज यहां सामाजिक सद्भावना बैठक में प्रस्ताविक उद्बोधन देते हुए कही। यह उनकी 24वीं बैठक थी इसके पूर्व 23 प्रांतों के प्रांतीय मुख्यालयों इसी तरह की बैठकों को सम्बोधित कर चुके हैं। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संचालक श्री श्रीकृष्ण माहेश्वरी, क्षेत्रीय प्रचारक विनोद कुमार, मध्य भारत प्रांत के संघचालक श्री शशिभाई सेठ, विभाग संघचालक श्री कांतिलाल चतर, हिन्दू समागम आयोजन समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आर.डी. शुक्ला, महासचिव दीपक शर्मा सहित हिन्दू समाज के संत, धर्माचार्य तथा 100 से अधिक सामाजिक संगठनों के सैकड़ों पदाधिकारी व प्रतिनिधि उपस्थित थे।
प.पू. सरसंघचालक श्री भागवतजी ने सामाजिक समरसता के लिये दलितों, पिछड़ों, उपेक्षितों, अनुसूचित जाति@जनजाति की उपेक्षा नहीं करने, उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने तथा उनके दुःख में शामिल होते हुए उन्हें समाज में यथोचित सम्मान और सत्कार दिये जाने की अपील की।
डॉ. भागवतजी ने कहा कि भारत आक्रमणग्रस्त है। यदि हिन्दू समाज एकजुट होकर खड़ा हो जाता है तो भविष्य में भारत किसी भी आक्रमण को सहन कर सकता है। इनसे भली-भांति परिचित विदेशी ताकतें अपने स्वार्थ और एकाधिकार के चलते हिन्दू समाज को तोड़ने का प्रयास कर रही हैं जो कदापि नहीं होने दिया जायेगा। इसके लिए उन्होंने हिन्दू समाज को एकजुट होने का आव्हान किया।
श्री भागवतजी ने प्रांत स्तर पर वर्ष में दो बार सामाजिक सद्भावना बैठक करने और उसे विकासखण्ड स्तर से नीचे गांवों तक ले जाने की बात पर जोर दिया।
कार्यक्रम में समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने सामाजिक कार्यों के बारे में जानकारी दी और समाज को एकजुट रखने के लिये सुझाव भी दिये।
प्रारंभ में आमंत्रित संतों, धर्माचार्यों को श्री कांतिलालजी चतर द्वारा तिलक लगाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन वंदेमातरम् गीत से किया गया जिसे बालिका पूर्वी सप्रे ने प्रस्तुत किया। संचालन सोमकांत उमालकर ने किया।
र्मिक संगठनों, इंजीनियरों, डॉक्टरों, अधिवक्ताओं, सीए, शिक्षकों, प्रोफेसरों, पत्रकारों, लेखकों, रंगकर्मियों, विद्यार्थियों आदि से सम्पर्क किया जा चुका है। हिन्दू समागम में नारी शक्ति की विशेष सहभागिता दिखाई दें इसके लिये सभी क्षेत्रों में कार्यरत् बहिनों से सम्पर्क हेतु अब तक महिलाओं की 50 बैठकें की जा चुकी हैं।

कोई टिप्पणी नहीं: