सोमवार, 7 सितंबर 2009

रामषंकर अग्निहोत्री को माणिकचन्द्र वाजपेयी राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान



दो दिवसीय संगोष्ठी में विष्व सभ्यता, आतंकवाद, मीडिया और भारत के बौद्धिकों पर महत्वपूर्ण चर्चा
मातृभाषा को मिले सम्मान और प्रोत्साहन: श्री सुदर्शन
मध्यप्रदेश शासन द्वारा स्व. माणिकचन्द्र वाजपेयी की स्मृति में पत्रकारिता सम्मान की स्थापना की गई है। राष्ट्रीय स्तर का यह सम्मान प्रति वर्ष वरिष्ठ पत्रकार को दिया जाता है। वर्ष 2008 का सम्मान वरिष्ठ पत्रकार श्री रामशंकर अग्निहोत्री को दिया गया है। गत वर्ष श्री ओमप्रकाश कुन्द्रा को सम्मानित किया गया था। 23 अगस्त को आयोजित इस सम्मान समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निवर्तमान सरसंघचालक श्री कृप्प.सी. सुदर्शन, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान, अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के सह-संयोजक श्री श्रीधर पराड़कर और मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति एवं जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे।
इस अवसर पर मुख्यअतिथि के रूप में उपस्थित श्री सुदर्शन जी ने कहा कि देश में अंग्रेजी को अनावश्यक महत्व दिये जाने के कारण इसे न जानने वाले लोगों में हीन भावना का विकास होता है। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पाती। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी के साथ अन्य विदेशी भाषाओं का अध्ययन भी किया जाना चाहिए। लेकिन मातृ भाषा में अध्यापन होने से देश की प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ सकेंगी। उन्होंने हिन्दी भाषी राज्यों में एक विश्वविद्यालय हिन्दी माध्यम से विकसित करने का सुझाव दिया। श्री सुदर्शन जी ने कहा कि देश के कई गैर हिन्दी भाषी क्षेत्रों में अपनी मातभाषा के प्रति लगाव अभी भी कायम है परंतु हिन्दी क्षेत्रों में अंग्रेजी को अधिक प्रधानता दी जाती है। उन्होंने हिन्दी समाचार-पत्रों में अंग्रेजी भाषा के उपयोग अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हिन्दी के पत्रों में हिन्दी शब्दों का ही उपयोग करना चाहिएं। उन्होंने कहा कि भाषाा की शुद्धता का भी अपना महत्व है। अंग्रेजी तथा अन्य विदेशी भाषाओं को सीखने में कोई आपत्ति नही है, परन्तु हमें अपनी-अपनी मातृ-भाषा से लगाव होना चाहिएं यह हमारे राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत बनाने और विश्व में देश को अग्रणी बनाने के लिए आवश्यक है।
संघ के निवर्तमान सरसंघचालक श्री सुदर्शन जी ने कहा कि भाषा के विषय पर दिल्ली, हरियाणा, मध्यप्रदेश सहित अनेक राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मुलाकात कर वे अपना सुझाव दे चुके हैं और इस संबंध में कम से कम एक विश्वविद्यालय हिन्दी माध्यम से शुरू करने का आग्रह भी वे कर चुके हैं। पत्रकारित सम्मान के अवसर पर श्री सुदर्शन जी ने स्व. श्री माणिकचन्द्र वाजपेयी ‘‘मामाजी’’ और श्री रामशंकर अग्निहोत्री से अपने सुदीर्घ संबंधें का उल्लेख किया। दोनों महान विभूतियों के पत्रकारिता में योगदान की भी उन्होंने चर्चा की।
सम्मान समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान ने कहा कि देश की पत्रकारिता आजादी की लड़ाई, स्वतंत्रता के बाद विकास और नव-निर्माण, राष्ट्रीय अपेक्षाओं के पूरा न होने पर निराशा, जयप्रकाश जी के नवनिर्माण आंदोलन तथा आपातकाल के दौरान आजादी की तीसरी लडाई और अब आधुनिक-वैश्विक व्यवसाय जैसे विभिन्न दौर से गुजरी है। लेकिन समाज में जिस प्रकार से मूल्यों का ह्यस हो रहा है अब जरूरी लगता है कि राजनेता, मंत्री और पत्रकार भी अपनी-अपनी आचार संहिताओं के दायरे में काम करें।
श्री चैहान ने आगे कहा कि शासन व्यवस्था में मीडिया की स्वस्थ आलोचना से गड़बड़ियों के सुधार में सहायता मिलती है, लेकिन यह भी आवश्यक प्रतीत होता है कि पत्रकारिता में आलोचना तथा रचनात्मकता में संतुलन हो। श्री चैहान ने मामाजी का स्मरण करते हुए सम्मानित पत्रकार श्री रामशंकर अग्निहोत्री के पत्रकारिता योगदान का भी उल्लेख किया।
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए श्री रामशंकर अग्निहोत्री ने कहा कि पत्रकारिता हमेशा मिशन रही है और रहेगी। पत्रकारों को अपने भीतर मिशन की भावना जागृत रखने की आवश्यकता है। विचार तथा मिशन ही पत्रकारिता के लिए स्थाई आदर्श हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में लोकमत के परिष्कार का भी प्रावधान है।
कार्यक्रम में विशेष अतिथि के तौर पर उपस्थित मध्यप्रदेश शासन के जनसंपर्क और संस्कृति मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने इस अवसर पर सभी अतिथियों का शाल-श्रीफल एवं पुष्पमाला से स्वागत किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट की। अपने वक्तव्य में श्री शर्मा ने कहा कि राज्य शासन ने पत्रकारों के हित में कई कदम उठाए हैं तथा भविष्य में भी इस दिशा में प्रयास जारी रहेंगे। उन्होंने समारोह के दौरान आयोजित दो दिवसीय विचार गोष्ठी पर केन्द्रित पुस्तिका प्रकाशित करने और सीडी जारी करने की घोषणा भी की।
जनसंपर्क विभाग के सचिव श्री मनोज श्रीवास्तव ने सम्मानित पत्रकार श्री रामशंकर अग्निहोत्री का प्रशस्ति वाचन किया। श्री श्रीवास्तव ने इस अवसर पर स्व. श्री माणिकचन्द्र वाजपेयी के पत्रकारिता योगदान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने भारत भवन में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
इस समारोह में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से पत्रकार, साहित्यकार और प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लिया। पूर्व मुख्यमंत्री श्री कैलाश जोशी, श्री सुंदरलाल पटवा, राज्यसभा सांसद श्री कप्तान सिंह सोलंकी, श्री प्रभात झा, डाॅ. महेशचन्द्र शर्मा, कलाकार श्रीमती स्मृति ईरानी, लेखक श्री शंकर शरण, डाॅ. मधुकर श्याम चतुर्वेदी, श्रीमती कुसुमलता केडिया, प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज, श्री अच्युतानंद मिश्र, प्रा. पी. के. वर्मा आदि की उपस्थिति विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
इसके पूर्व जनसंपर्क मंत्री श्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने सभी अतिथियों का शाल-श्रीफल एवं पुष्पमाला से सम्मान किया तथा उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। श्री सुदर्शन जी ने श्री रामशंकर अग्निहोत्री को शाल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया। जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक श्री ए.के. कबीर ने सभी प्रतिभागियों और अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कोई टिप्पणी नहीं: