मंगलवार, 3 मार्च 2009


साहित्य अकादमी का अलंकरण समारोह अनेक साहित्यकार सम्मानित 
भारत में आतंकवाद और कलम के सिपाही पर विमर्श  
भोपाल। साहित्य अकादमी द्वारा साहित्यकारों के अलंकरण हेतु समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में अखिल भारतीय और प्रादेशिक पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व राज्यपाल श्री त्रिलोकीनाथ चुतुर्वेदी उपस्थित हुए। श्री चतुर्वेदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न संस्थाओं और संगठनों के बीच अच्छा तालमेल है, इसी के कारण शासन अच्छा परिणाम दे पा रही है। शासन के मंत्री के रूप में श्री लक्ष्मीकांत शर्मा के सकारात्मक और सहयोगी प्रयासों की श्री चतुवेर्दी ने सराहना की। यहां के संस्थान कम लागत में अच्छे साहित्य उपलब्ध कराने के लिए साधुवाद के पात्र हैं। इससे साहित्य को लोकप्रियता मिलेगी और साहित्य जन सामान्य के बीच पहुंच पायेगा। अलंकरण हेतु साहित्यकारों के चयन की प्रक्रिया भी काफी पारदर्शी और स्पष्ट है। अलंकरण समारोह कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने की। श्री शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा साहित्य अकादमी के प्रयासों सराहना करते हुए कहा कि इन प्रयासों के कारण प्रदेश में संस्कृति को एक नया आयाम और गति मिली है। उन्होंने कार्यक्रमों के विकेन्द्रित आयोजन की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधयों को आयोजित करने के मामले में देश का सर्वोत्तम प्रदेश है। लेकिन हम अभी भी असंतुष्ट हैं, अभी और भी बहुत अधिक काम करना है। माननीय मुख्यमंत्री जी ने जो दायित्व दिया है उसे पूरी निष्ठा और उत्साह से पूरा करना है। भाजपा सरकार ने सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भरपूर वित्तीय प्रावधान किया है। धन की कमी पहले भी नहीं हुइ्र्र आगे भी नहीं होने दिया जायेगा। मराठी प्रभाग और बाल साहित्य शोध पीठ की स्थापना मध्यप्रदेश सरकार की ऐतिहासिक पहल है। हमारा यह प्रयास सतत जारी रहेगा। साहित्यकारों और विद्वानों के सुझावों पर शासन अमल करने का प्रयास करेगी। माननीय मुख्यमंत्री जी ने कला पंचायत के आयोजन की मंशा भी व्यक्त की है। आप सब के सहयोग से हमारा यह प्रयास जरूर सफल होगा। कार्यक्रम के प्रारंभ में अलंकरण समारोह की प्रस्तावना रखते हुए साहित्य अकादमी के निदेशक डाॅ. देवेन्द्र दीपक ने कहा कि शासन द्वारा लेखकों के हित में प्रमुख निर्णय लिए जिसमें राष्टीय पुरस्कार की राशि 25 हजार रुपये प्रादेशिक राशि 21 हजार रुपये करने तथा दो वर्ष की बजाय प्रति वर्ष श्रेष्ठ कृतियों को पुरस्कृत किया जाएगा। विकेन्द्रीकरण के नीति के तहत प्रत्येक जिला मुख्यालय पर अकादमी द्वारा वर्ष में एक कार्यक्रम आयोजन किया जा रहा है। श्री दीपक ने अकादमी द्वारा किए गए अभिनव कार्यक्रम प्रज्ञाचक्षु कवियों का काव्यपाठ, अनुसूचित जाति/जनजाति कवियों का काव्यपाठ और प्रशिक्षण तथा श्रम रचनाकारों की कार्यशाला की जानकारी दी। साथ ही 3 अगस्त को मैथिलीशरण गुप्त की जन्मतिथि को कवि दिवस और प्रदेश के तीन महान कवियों जन्मतिथि के अवसर पर उनके जन्म स्थान पर कार्यक्रमों को आयोजित किया गया। कार्यक्रम उपस्थित अतिथियों को स्मृतिचिन्ह भेंट किया गया। मुख्य अतिति श्री त्रिलोकीनाथ चतुर्वेदी और कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री लक्ष्मीकांत शर्मा को अकादमी के निदेशक डाॅ. देवेन्द्र दीपक ने स्मृतिचिन्ह भेंट किया। साहित्यकार श्री सुरेशचन्द्र श्ुाक्ल ने अपने उद्गार और आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन सुश्री सुधा शर्मा ने किया। कार्यक्र में बड़ी संख्या में प्रदेश के साहित्यकार और संस्कृतिकर्मियों ने हिस्सा लिया। भाजपा के वरिष्ठ नेता कप्तान सिंह सेालंकी, वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र शर्मा, समाजसेवी देवकीनंदन मिश्र भी कार्यक्रम में उपस्थित थे।

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