गुरुवार, 24 जुलाई 2008

‘मेरा देश, मेरा जीवन’

एक स्वयंसेवक की आत्मकथा ‘मेरा देश, मेरा जीवन’ का भोपाल में लोकार्पण
भोपाल । आज आडवाणी पूर्व उप-प्रधानमंत्री कम, एक स्वयंसेवक अधिक दिख रहे थे। पूरे कार्यक्रम के दौरान वे भावुक भी हुए और भाव-विह्वल भी। संघ और संतों के सानिध्य में वे उत्साह और उर्जा से भरपूर दिख रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने अपने कठिन दौर का उल्लेख तो किया ही, अपने अनुभवों के आधार पर भविष्य का ताना-बाना भी प्रस्तुत कर दिया। मौका था उनकी किताब ‘माई कंट्री, माई लाईफ’’ के हिन्दी संस्करण ‘‘मेरा देश, मेरा जीवन’’ के लोकार्पण का। पूर्व उप प्रधानमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की आत्मकथा का लोकार्पण श्री श्री रविशंकर और स्वामी रामदेव की उपस्थिति में हुआ। मूलतः अंग्रेजी में लिखी पुस्तक ‘‘ माई कंट्री माई लाईफ’’ का हिन्दी संस्करण ‘‘मेरा देश, मेरा जीवन’’ के इस लोकार्पण कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी सहित पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुषमा स्वराज, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान और वरिष्ठ पत्रकार तथा माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति अच्युतानंद मिश्र उपस्थित थे। देश और दुनियाभर में विख्यात श्री श्री रविशंकर ने, आडवाणी जी आत्मकथा ‘मेरा देश, मेरा जीवन’ का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह मेरापन अगर देश के साथ जुड़ जाए तो सबका ही कल्याण हो। हमने न तो जीवन का अध्ययन किया है और नही देश के प्रति कोई अपनापन बचा है। आज आदर्श को अपराध माना जाने लगा है। उन्होंने कहा कि स्वार्थी की कोई आत्मकथा नहीं हो सकती। जो समाज और देश से जुड़ा है, उसी की आत्मकथा हो सकती है। जीवन और देश के लिए शांति और क्रांति दोनों को आवश्यक बताते हुए श्री श्री ने कहा कि अमरनाथ यात्रा के संदर्भ में जम्मू-कश्मीर में जो हो रहा है, वह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। धार्मिक मामलों में किसी भी बात का निर्धारण करने का हक धार्मिक गुरूओं को है, कोई अन्य इसमें हस्तक्षेप न करें। जीवन में चारित्रिक श्रेष्ठता और आर्थिक शुचिता केउदाहरण हैं आडवाणीजी: सुरेश सोनीकार्यक्रम में अपना वक्तव्य देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी ने कहा कि इस लगभग हजार प्ृाष्ठों की पुस्तक का शीर्षक ही, इसका सूत्र है। लेखक पंक्तियों और वाक्यों के माध्यम से लिखता है, लेकिन वाक्यों और पंक्तियों के बीच भी बहुत कुछ छुपा होता है। इस पुस्तक के शीर्षक ‘मेरा देश, मेरा जीवन’ के बीच में ‘‘ही’’ शब्द छुपा हुआ है। वस्तुतः लेखन अपनी आत्मकथा के माध्यम से कहना चाहता है कि ‘मेरा देश ही मेरा जीवन है’। आडवाणी जी कोई इतिहासकार नहीं हैं, लेकिन लेखक जरूर हैं। ऐसा लेखक जो तटस्थ भाव से इतिहास के घटना प्रवाह को देख रहा है। ऐसा लेखक है जो प्रवाह का निर्माता भी है। यह इस पुस्तक का वैशिष्ट है। इस पुस्तक में भारत के अतीत वर्तमान और भविष्य का वर्णन है। जो बीता हुआ कल है वह सूक्ष्म रूप में विद्यमान रहता है और आने वाले कल को प्रभावित करता है। इसी में उसकी सार्थकता है। इसलिए इस पुस्तक में बीता हुआ कल, आज और आने वाला कल भी है। यह पुस्तक आडवाणी जी के जन्म से आज तक का वृतांत है। अपने जीवन में संघ की भूमिका का भी उन्होंने बखूबी उल्लेख किया है। देश के प्रति एक असीम आत्मीयता, निःस्वार्थता, जीवन में शुचिता और जीवन मूल्यों के प्रति आग्रह जो तब संघ से मिला वो सब कुछ आज तक जीवन का अक्षुण्ण भाग बना हुआ है। आडवाणी जी ने अपनी पुस्तक में सच्ची और छद्म पंथनिपेक्षता का उल्लेख किया है। आज सच्ची और छद्म पंथनिरपेक्षता के बीच संघर्ष जारी है। पुस्तक में आडवाणी जी ने सामाजिक, राजनीतिक एवं अन्य क्षेत्रों में के शुचिता की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने अपने स्वयं के जीवन में भी सार्वजनिक और निजी जीवन में अन्तर नहीं रखा है। चारित्रिक श्रेष्ठता और आर्थिक शुचिता का उन्होंने उदाहरण प्रस्तुत किया है। वे संकुचित मन और अशिष्ट व्यवहार, आडवाणी जी के लिए दुःखदायी है। श्री सोनी ने कहा कि अगर ‘जीवन एक किताब है तो कृपया उसे पढ़िए।100 प्रतिशत मतदान अनिवार्य हो: बाबा रामदेवप्रख्यात योगगुरू स्वामी रामदेव जी ने अपने उद्बोधन में छुआछूत की अवधारणा पर प्रहार करते हुए कहा कि मैं छुआछूत को नहीं मानता। हम सभी संतों ने आध्यात्मिक क्षेत्र से जातिवाद को खत्म कर दिया है। फिर आडवाणी जी राजनीतिक क्षेत्र में काम करते हैं, इसलिए उन्हें अछूत क्या माना जाए। स्वामी रामदेव बाबा ने कहा कि मैं 80 वर्षीय आडवाणी जी में 18 वर्षीय युवा का जोश देखता हूं। उम्र से नहीं, विचारों में बुढ़ापा आ जाने से आदमी बूढ़ा होता है। राजनीति में रूचि लेने के आरोपों को निराधार बताते हुए रामदेव बाबा ने कहा कि सत्ता के सिंहासन से बड़ा दिल का सिंहासन है, देश के लोगों ने वह आसन मुझे पहले ही दे दिया है। अपने सपनों के भारत के बारे में बताते हुए बाबा रामदेव जी ने कहा कि मैंने स्वस्थ्य, समृद्ध और संस्कारवान भारत का सपना देखा है। इसी से गौरवशाली, समृद्धशाली और वैभवशाली भारत बनेगा। देश के राजनीतिज्ञों में पारदर्शिता, दूरदर्शिता, विनयशीलता और पराक्रमशीलता होनी चाहिए। आडवाणी जी इन सब गुणों से सम्पन्न हैं। आज सभी बातों को आडवाणी जी से जोड़कर देखा जा रहा है, इसी से यह लगता है कि उनमें कुछ खास बात तो है। आडवाणी जी जैसे व्यक्तित्व को तैयार करने के लिए देश को बहुत कुछ दांव पर लगाना पड़ता है। इस इस परिपक्व व्यक्तित्व से देश को कुछ लाभ तो उठाना ही चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में देशभक्त, राष्ट्रवादी अच्छे और सच्चे लोगों का सम्मान और देशद्रोही लोगों का चाराहों पर अपमान होना चाहिए। आज दुनिया, भारत की ओर देख रही है। लेकिन भारत में आज वैचारिक विभ्रम की स्थिति है। धार्मिक यात्राओं को सांप्रदायिक रंग देना उचित नहीं है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। चीन जैसा कम्युनिस्ट देश भी तीर्थ यात्रियों के लिए आश्रम बनाने की सुविधा दे रहा है, लेकिन अपने ही देश में कैसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। पीडीपी को राष्ट्रद्रोही पार्टी करार देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी देशभक्त के बुलावे का वे सहर्ष स्वीकार करेंगे, लेकिन पीडीपी जैसे राष्ट्रद्रोही के बुलावे को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। राजनीति, अर्थ, शिक्षा और अन्य सभी क्षेत्रों में स्वदेशी को अपनाने का आग्रह करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि हमें स्वदेशी का स्वाभिमान होना चाहिए। उन्होंने 100 प्रतिशत अनिवार्य मतदान का विशेष आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अगर देश में राजनीतिक शुचिता लाना है तो इसे लागू करना ही होगा। वर्तमान और आने वाली सरकारों को इस दिशा में प्रयास करना चाहिए। ‘‘मेरा देश, मेरा जीवन’’ समसामयिक इतिहास का प्रमाणिक दस्तावेज है: शिवराज सिंह चैहानमध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने कहा कि आडवाणी जी के लिए भारत एक ऐश नहीं, उनका जीवन है। सरलता और सहजता, उन्हें महामानव बनाती है। यह पुस्तक समसामयिक इतिहास है, प्रमाणिक दस्तावेज है। यह सिर्फ स्मृति ग्रंथ नहीं, प्रकाश स्तंभ है। इसमें विकास और सुशासन की दृष्टि भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत का उदय यानी सबका उदय है। आने वाला भारत सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का भारत होगा। सच्ची और छद्म पंथ-निरपेक्षता में संघर्ष चल रहा है - सुषमा स्वराजराज्यसभा सांसद और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने पुस्तक और आडवाणी जी के व्यक्तित्व दोनों पर टिप्पणी की। पुस्तक के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दी अनुवाद में भी मूलभाव और भाषा का सौंदर्य बरकरार है। यह आत्मकथा नहीं आजादी के बाद भारत के उतार-चढ़ाव का आंखों देखा हाल है। इसमें भारत के सरोकार हैं और समस्याओं का समाधान भी। उन्होंने कहा कि आडवाणी जी ने भारतीय राजनीतिक शब्दकोष को अनेक शब्द दिए हैं। उन्हें भारतीय सामाजिक और राजनीतिक जीवन के अविराम पथिक की संज्ञा दी जा सकती है। विनम्रता उनका आभूषण है। आडवाणीजी राजनीतिक भविष्यवेत्ता भी हैं। श्रीमती स्वराज ने कहा कि हज सब्सिडी के रूप में प्रतिवर्ष करोड़ों रू. देने वाला देश 40 बीघे जमीन की दरकार क्यों नहीं कर सकता। आज सच्ची और छद्म पंथनिरपेक्षता में संघर्ष हो रहा है। इस संघर्ष के परिणाम पर ही भारत का भविष्य निर्भर करेगा। आडवाणीजी ने जोखिम भरा काम किया है - अच्युतानंद मिश्र पुस्तक लोकार्पण के अवसर पर माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति अच्युतानंद मिश्र ने अपने वक्तव्य में कहा कि यह पुस्तक आडवाणीजी का देखा हुआ, सुना हुआ और भोगा हुआ यथार्थ है। आत्मकथा का लेखन जोखिम भरा होता है, लेकिन उन्होंने यह जोखिम उठाया। बेबाकी और सफाई से तथ्यों का उल्लेख किया है। अनुभूतियों और अनुभवों को पाठकों के साथ साझा किया है। अटलबिहारी वाजपेयी ने पार्टी के कानपुर अधिवेशन में आडवाणीजी को जनसंघ का दूसरा दीनदयाल उपाध्याय कहा था। उन्होंने अपने कर्तृत्व से इसे सिद्ध किया है। कहा कि ‘मेरा देश, मेरा जीवन’, आडवाणीजी की आत्मकथा जरूर है, लेकिन इसमें आडवाणीजी कहीं नहीं हैं। अमरनाथ श्राइन बोर्ड का मामला पूरे कार्यक्रम में छाया रहासभी वक्ताओं ने सरकार के कदम की आलोचना कीलोकार्पण कार्यक्रम में उपस्थित सभी वक्ताओं ने अपने-अपने अंदाज में अमरनाथ श्राइन बोर्ड का मामला उठाया। जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा श्राइन बोर्ड को दी गई 40 हेक्टेयर वन भूमि को वापस लेने का विरोध सभी ने किया। बाबा रामदेव, इस मुद्दे पर सबसे अधिक आक्रामक थे। उन्होंने सरकार के कदम को दुर्भाग्यपूर्ण ठहराया और पीडीपी को देशद्रोही की संज्ञा दी। आर्ट आॅफ लिविग के प्रणेता श्री श्री रविशंकर ने कहा कि अमरनाथ यात्रा पर हंगामा होना दयनीय है। यह रवैया गलत है। किसी को अधिकार नहीं है कि वह यात्रा की अवधि निर्धारित करे। यह साधु-संतों और धार्मिक नेताओं का काम है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह सुरेश सोनी ने कहा कि अमरनाथ की घटना पर प्रधानमंत्री सहित कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। यह भविष्य पर प्रश्नचिन्ह है।
मेरा जीवन जो कुछ भी है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ वजह से है: आडवाणीपुस्तक लोकार्पण कार्यक्रम में अपने उद्गार व्यक्त करते हुए लालकृष्ण आडवाणी ने अपने व्यक्तिव और जीवन की श्रेष्ठता का श्रेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को दिया। उन्होंने कहा कि मेरा जीवन जो कुछ भी है वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कारण है। उन्होंने कहा कि मेरी पुस्तक जो भी पढ़ेगा, वेा जानेगा कि मेरा जीवन जो कुछ भी है वह संघ की वजह से है। इसीलिए अंग्रेजी की पुस्तक के विमोचन के अवसर पर दिल्ली में संघ के सरकार्यवाह मोहनराव भागवत उपस्थित थे, और आज यहां सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी उपस्थित हैं। उन्होंने प्रख्यात पुस्तक ‘ए टेल आॅफ टू सिटीज’ का उल्लेख करते हुए ‘ए टेल आॅफ टू टेम्पल्स’, (सोमनाथ और अयोध्या का मंदिर) ‘ए टेल आॅफ टू इमरजेंसी’, ‘ए टेल आॅफ टू फैमिली’’ (संघ के रूप में वैचारिक परिवार और निजी परिवार) तथा ‘ए टेल आॅफ टू संत’’ (श्री श्री रविशंकर और बाबा स्वामी रामदेव ) की चर्चा भी की। भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री आडवाणी ने कहा कि जब उनकी प्रशंसा होती है तो वे भावुक हो उठते हैं, आंखे नम हो जाती हैं। कार्यक्रम के अंत में जब उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी आभार प्रकट कर रही थीं, उस दौरान उन्होंने अंग्रेजी की एक कविता ‘‘फुट प्रिंट’’ की पंक्तियों का उल्लेख किया। तभी श्री आडवाणी की आंखों में आंसू आ गए। सुश्री प्रतिभा आडवाणी ने बताया कि जब हवाला प्रकरण का भूचाल आया तब उन्होनें यह कविता अपने को पिता को भेंट की थी। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रभात प्रकाशन के प्रभात कुमार ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। अंत में सुश्री प्रतिभा आडवाणी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में संत-महात्माओें के अलावा भाजपा के अनेक वरिष्ठ नेता पूर्व मुख्यमंत्री संुदरलाल पटवा, कैलाश जोशी, सांसद प्यारेलाल खंडेलवाल, रघुनंदन शर्मा, प्रभात झा, सुमित्रा महाजन, सिद्धू आदि उपस्थित थे। मध्यप्रदेश शासन के अधिकांश मंत्री और विधायकों के अलावा विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी, रमन सिंह, वीएस यदुरप्पा आदि उपस्थित थे।

कोई टिप्पणी नहीं: